कांकेर में जवानों को उड़ाने की रची थी साजिश, NIA कोर्ट ने दो नक्सलियों को सुनाई 10-10 साल की कठोर जेल

VINAY VERMA | Oct 09, 2026, 18:18 IST
नक्सलियों को सजा
Kanker. बस्तर के जंगलों में सुरक्षाबलों के जवानों का खून बहाने की फिराक में बैठे नक्सलियों के मंसूबों पर कानून का बड़ा हथौड़ा चला है। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने जवानों को बारूद से उड़ाने की खौफनाक साजिश रचने वाले दो नक्सलियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने साफ कर दिया कि वर्दीधारियों को निशाना बनाने वालों के लिए कानून में कोई ढील नहीं है। दोनों दोषियों सानू कोमरा और अर्जुन साहू पर कोर्ट ने दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।



जंगल में जवानों ने दबोचा

यह पूरा मामला 28 अक्टूबर 2023 का है, जब कोयलीबेड़ा इलाके में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला पुलिस बल की संयुक्त टीम गश्त पर निकली थी। चिलपरस-नयापारा की दुर्गम पहाड़ियों के पास दो युवक जवानों को देखते ही जंगल की झाड़ियों में छिपकर भागने लगे। जवानों ने कोई मौका गंवाए बिना चारों तरफ से घेराबंदी की और दोनों को धर दबोचा। पूछताछ में इनकी पहचान 23 साल के सानू कोमरा और 22 साल के अर्जुन साहू के रूप में हुई। दोनों प्रतिबंधित माओवादी संगठन की जनमिलिशिया से जुड़े थे और जवानों को रास्ते में ही विस्फोट से उड़ाने की फिराक में थे।




झोले में मिला मौत का सामान

तलाशी के दौरान इनके पास से जो सामान बरामद हुआ, उसने जवानों के होश उड़ा दिए थे। इनके पास से नौ जिंदा डेटोनेटर, बिजली के तारों का बंडल, एक स्विच और तीन बंडल प्लास्टिक की मजबूत रस्सी मिली। इतना ही नहीं, धमाके को घातक बनाने के लिए दो पैकेट छर्रे, करीब एक किलो लोहे के धारदार टुकड़े, दो लोहे के पाइप और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। यह पूरी तैयारी सुरक्षाबलों के सर्चिंग दल को निशाना बनाकर आईईडी ब्लास्ट करने के लिए की गई थी।




एनआईए कोर्ट का सख्त फैसला

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने तमाम ठोस सबूतों और गवाहों के साथ मामला भानुप्रतापपुर स्थित विशेष एनआईए अदालत में पेश किया। विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत में अभियोजन पक्ष ने सिलसिलेवार तरीके से सारे सबूत रखे। बरामद विस्फोटक और चश्मदीद जवानों की गवाही ने दोनों आरोपियों के गुनाह पर पक्की मुहर लगा दी। साक्ष्यों की मजबूती के आगे आरोपियों की एक न चली और अदालत ने दोनों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।




लगातार आ रहे फैसले, 33 केस पेंडिंग

नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में माओवादी वारदातों पर अदालतों का यह तीसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले सितंबर 2026 में एसजेडसीएम प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे के मामले में फैसला आ चुका है, जबकि 16 सितंबर को पोलूराम आंचला को 10 साल की सजा सुनाई गई थी। जिले में अब तक लंबित 36 मामलों में से तीन का निपटारा हो चुका है और 33 केस अभी भी विचाराधीन हैं। ताबड़तोड़ आ रहे इन फैसलों से नक्सली नेटवर्क की कमर टूटती नजर आ रही है।




  1. कांकेर नक्सली मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
    विशेष अदालत ने जवानों पर विस्फोटक हमले की साजिश रचने के मामले में दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल की जेल और 2-2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
  2. कांकेर में किन दो नक्सलियों को 10 साल की सजा सुनाई गई है?
    कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर स्थित विशेष एनआईए अदालत ने सानू कोमरा और अर्जुन साहू को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
  3. इस मामले में क्या सबूत पेश किए गए थे?
    जांच के दौरान पेश किए गए सबूतों में बरामद विस्फोटक सामग्री, जैसे जिंदा डेटोनेटर, बिजली के तार, और अन्य उपकरण शामिल थे, जो आरोपियों की माओवादी गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं।
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