नक्सल मुक्त बस्तर के दावों के बीच कांकेर में बड़ी वारदात 3 पोकलेन मशीनें फूंकीं, लाल सलाम के पर्चे भी मिले

Umeshwari Baghel | Oct 06, 2026, 18:23 IST
लाल सलाम लिखे पर्चे में 7 दिनों की मोहलत
KANKER : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में लौह अयस्क खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनों को आग के हवाले करने का मामला सामने आया है। घटना लोहत्तर थाना क्षेत्र के ग्राम चेमल की है। यहां पुष्प स्टील लिमिटेड की खदान में काम करने वाली तीन मशीनें सुबह जली हुई मिलीं।

मौके से दो पर्चे भी बरामद किए गए हैं। इन पर्चों पर लाल सलाम लिखा है। इसके बाद घटना के नक्सली कनेक्शन को लेकर भी जांच शुरू हो गई है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसे नक्सली वारदात घोषित नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आग किसने लगाई और पर्चे किसने छोड़े।



शाम को काम बंद हुआ, सुबह जली मिली मशीनें

जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम खदान में रोज की तरह काम खत्म हुआ था। इसके बाद मजदूर और कर्मचारी अपने कैंप और ठहरने की जगह पर चले गए। मशीनें खदान परिसर में ही खड़ी थीं।




मंगलवार सुबह जब कर्मचारी काम पर पहुंचे तो वहां का नजारा बदला हुआ था। खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनें आग की चपेट में आ चुकी थीं। आग से मशीनों को काफी नुकसान पहुंचा है। मामला सामने आते ही खदान प्रबंधन ने पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद लोहत्तर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की।



घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम

वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने भी मौके का निरीक्षण किया। SDOP शेर बहादुर सिंह घटनास्थल पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है।



फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मशीनों में आग किस तरह लगाई गई। मौके से ऐसे सबूत भी जुटाए जा रहे हैं जिनसे आरोपियों की पहचान तक पहुंचा जा सके। पुलिस आसपास के क्षेत्र में भी जानकारी जुटा रही है। खदान में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों से भी घटना के संबंध में पूछताछ की जा सकती है।



दो पर्चों ने बढ़ाया नक्सली कनेक्शन का शक

इस घटना में सबसे ज्यादा चर्चा मौके से मिले दो पर्चों की हो रही है। इन पर्चों पर ‘लाल सलाम’ लिखा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनमें खदान के संचालन से जुड़ी मांगों का भी जिक्र है। पर्चों में कुछ मांगें एक सप्ताह के भीतर पूरी करने की बात कही गई है। इसी वजह से घटना को नक्सली तरीके से की गई वारदात से जोड़कर देखा जा रहा है।



हालांकि केवल पर्चे मिलने के आधार पर पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। जांच का एक एंगल यह भी है कि क्या किसी दूसरे व्यक्ति या समूह ने नक्सलियों के नाम और तरीके का इस्तेमाल कर वारदात की है।




पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल, पर्चे असली या किसी की चाल

पुलिस के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि घटनास्थल पर मिले पर्चे वास्तव में किसी नक्सली संगठन से जुड़े हैं या नहीं। इसका पता पर्चों की भाषा, लिखावट और उसमें दर्ज मांगों की जांच के बाद लगाया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के मामलों में पहले सामने आए पर्चों से भी इनकी तुलना कर सकती हैं।



अगर पर्चों का संबंध नक्सली संगठन से मिलता है तो मामला सुरक्षा के लिहाज से गंभीर हो सकता है। वहीं यदि पर्चे किसी दूसरे समूह ने छोड़े हैं तो वारदात के पीछे कारोबारी विवाद, स्थानीय विवाद या किसी अन्य कारण की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।



नक्सल मुक्त दावे के बाद घटना ने खड़े किए सवाल

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब वर्ष 2026 में बस्तर क्षेत्र को नक्सल गतिविधियों से मुक्त किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में खदान में मशीनें जलाने और लाल सलाम लिखे पर्चे मिलने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं।



रिपोर्ट के मुताबिक कांकेर क्षेत्र में कुछ नक्सली अब भी सुरक्षा बलों की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी तलाश के लिए समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते रहे हैं। इसी वजह से पुलिस इस घटना में नक्सली एंगल को सीधे खारिज नहीं कर रही है।



जांच पूरी होने के बाद साफ होगा मामला

फिलहाल पुलिस ने वारदात को लेकर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं रखा है। आग लगाने वालों की संख्या कितनी थी और वे किस रास्ते से खदान तक पहुंचे, इसकी भी जांच चल रही है। पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट, मौके से मिले पर्चों और स्थानीय स्तर पर जुटाई जा रही जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।



अभी यह साफ नहीं है कि मामला वास्तव में नक्सली वारदात है या किसी ने नक्सली अंदाज का इस्तेमाल कर मशीनों को निशाना बनाया है। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी असली वजह और घटना के पीछे शामिल लोगों की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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