सीएम साय की पत्नी के मन में उठे सवाल, पति पत्नी अच्छा काम कर रहे तो आलोचना क्यों

Arun Tiwari | Mar 26, 2026, 22:39 IST
Photograph: (the sootr)
RAIPUR. सीएम विष्णुदेंव साय की पत्नी कौशल्या से ने जैन मुनि प्रमाण सागर से सवाल पूछा, अच्छे काम के बाद भी आलोचना क्यों?”CM साय की पत्नी के सवाल पर जैन मुनि का सधा जवाब, ‘कर्तव्य भाव’ में छिपा है सुकून का मंत्र।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या साय के मन में शंका ने घर कर लिया है। उनके मन में भ्रम है जिससे सवाल उठ रहे है। सवाल आलोचना से जुड़े हुए हैं। इस सवालों का जवाब उन्होंने एक मुनि से मांगा। क्या है सवाल और उसका जवाब, आपको बताते हैं।



शंका और समाधान:

सीएम विष्णुदेव से की पत्नी कौशिल्या साय इन दिनों चर्चा में है। कौशल्या साय ने एक जैन मुनि से ऐसा सवाल पूछा, जो न सिर्फ राजनीति बल्कि आम जीवन से भी जुड़ा है। जैन मुनि प्रमाण सागर के शंका और समाधान सत्र में कौशिल्या साय ने भी सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि जब हम पति पत्नी अच्छा काम करते हैं, लोगों की सेवा करते हैं, फिर भी आलोचना क्यों होती है। इससे मन भ्रमित होता है।



सोशल मीडिया पर आया सवाल:

यह सवाल उन्होंने एक Instagram रील के जरिए साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने मन की उलझन खुलकर रखी। उन्होंने बताया कि उनके पति मुख्यमंत्री के रूप में लगातार जनसेवा में जुटे रहते हैं और हर व्यक्ति को परिवार की तरह मानते हैं। इसके बावजूद आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, जो स्वाभाविक रूप से मन को विचलित करता है।



राजनीति से जीवन तक जुड़ा सवाल:

कौशल्या देवी का मानना है कि यह सवाल सिर्फ एक राजनेता के परिवार का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो अपने काम में ईमानदारी और समर्पण से लगा रहता है, लेकिन फिर भी आलोचना झेलता है। उन्होंने जैन मुनि से जानना चाहा कि आखिर ऐसी स्थिति में मन को कैसे शांत रखा जाए और नकारात्मकता से कैसे बचा जाए।



जैन मुनि का जवाब:

इस पर जैन मुनि ने बेहद सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की। उन्होंने समझाया कि इंसान को अपने कर्म को ही पूजा मानना चाहिए। जब हम किसी काम को पूरी निष्ठा से करते हैं, तो उसका फल क्या होगा, इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।



मैं कर रहा हूं से अहंकार आता है:

मुनि ने कहा—“यदि हम ‘मैं कर रहा हूं’ यानी कर्ता भाव में फंस जाते हैं, तो अपेक्षाएं बढ़ती हैं और आलोचना हमें आहत करती है। लेकिन अगर हम ‘यह मेरा कर्तव्य है’ इस भावना से काम करें, तो मन स्वतः शांत रहता है।”



फल की इच्छा क्यों:

उन्होंने आगे कहा कि फल की इच्छा छोड़कर सिर्फ कर्तव्य निभाने से व्यक्ति हर परिणाम को सहजता से स्वीकार कर पाता है। यही मानसिक संतुलन जीवन में सुकून लाता है।



सोशल मीडिया पर चर्चा:

यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे जीवन के लिए उपयोगी सीख बताया, तो कुछ ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना स्वाभाविक है और इसे सकारात्मक रूप में लेना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।



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