खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की VC पर सोशल मीडिया पोस्ट से विवाद, यूनिवर्सिटी ने आरोपों को बताया भ्रामक

Umeshwari Baghel | Oct 05, 2026, 16:42 IST
खैरागढ़ संगीत यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक फैसलों पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के बाद विवाद ने तुल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर कुलपति के कार्यकाल, नियुक्तियों, शोध पंजीयन और वित्तीय मामलों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से इन आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को भ्रामक और बिना पर्याप्त प्रमाण के बताया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि किसी भी पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाने से पहले ठोस दस्तावेज और साक्ष्य होना जरूरी है। सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी के कामकाज पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है।



विश्वविद्यालय की ओर से यह भी कहा गया कि कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के कार्यकाल में शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर करने की दिशा में कई काम किए गए हैं। परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने, अकादमिक गतिविधियों को बढ़ाने और दीक्षांत समारोह आयोजित करने जैसे कार्यों को प्रशासन की उपलब्धियों के रूप में बताया गया है।



सोशल मीडिया पोस्ट में किन मामलों पर उठे सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सांस्कृतिक समाचार नाम के अकाउंट से विश्वविद्यालय से जुड़े कई मामलों पर पोस्ट किए गए थे। इनमें दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति, नई नियुक्तियां, शोध पंजीयन, निरीक्षण दलों के गठन, सीएएस प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे।




इन पोस्ट में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए। साथ ही कुछ मामलों में गंभीर शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। विश्वविद्यालय ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी मामले को भ्रष्टाचार या अनियमितता से जोड़ने से पहले प्रमाण प्रस्तुत करना जरूरी है।



दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों पर क्या कहा

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए विश्वविद्यालय ने कहा कि जरूरत के अनुसार इस तरह की व्यवस्था पहले भी की जाती रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक यह कोई नई व्यवस्था नहीं है।



प्रशासन ने दावा किया कि विश्वविद्यालय के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरत के आधार पर कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती रही हैं। इसलिए इसे किसी नई या असामान्य प्रक्रिया के तौर पर पेश करना सही नहीं है।




डीन की नियुक्ति पर भी दिया जवाब

डीन की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवालों पर भी विश्वविद्यालय ने अपना पक्ष रखा है। विश्वविद्यालय के अनुसार डीन की नियुक्ति शासन स्तर से की गई है। विश्वविद्यालय का कहना है कि जिस नियुक्ति का फैसला शासन स्तर पर हुआ हो उसका पूरा दायित्व कुलपति पर डालना सही नहीं है। प्रशासन ने इस मामले में भी सोशल मीडिया पर किए गए दावों को एकतरफा बताया है।



निरीक्षण दल में बाहरी सदस्यों का मामला

सोशल मीडिया पोस्ट में निरीक्षण दलों में बाहरी सदस्यों को शामिल करने पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके जवाब में विश्वविद्यालय ने कहा है कि ऐसी नियुक्तियों का प्रावधान विश्वविद्यालय के अध्यादेश में पहले से मौजूद है। प्रशासन का दावा है कि निरीक्षण दलों में बाहरी विशेषज्ञों या सदस्यों को शामिल करना नियमों के तहत ही किया गया है। इसलिए इसे नियमों के खिलाफ बताना सही नहीं है।




सम्मान राशि दान करने पर भी सफाई

रायगढ़ में एक प्रस्तुति के दौरान मिली सम्मान राशि को दान करने को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए थे। विश्वविद्यालय ने इस मामले में कहा कि सम्मान राशि का दान संबंधित कलाकार का व्यक्तिगत और स्वैच्छिक फैसला था।छत्वितीसगढ़



श्वविद्यालय का कहना है कि इस तरह के व्यक्तिगत फैसले को प्रशासनिक अनियमितता से जोड़ना उचित नहीं है।



दीक्षांत समारोह के खर्च पर उठे सवाल

दीक्षांत समारोह में हुए खर्च को लेकर भी सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल किए गए थे। विश्वविद्यालय ने इस मामले में दावा किया कि इस बार कार्यक्रम पहले के आयोजनों की तुलना में कम खर्च में कराया गया।



प्रशासन का कहना है कि दीक्षांत समारोह का आयोजन वित्तीय अनुशासन के साथ किया गया। विश्वविद्यालय ने खर्च को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत तरीके से पेश किया गया बताया है।




कथित पहचान पत्र को बताया फर्जी

विवाद के बीच एक पहचान पत्र भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। विश्वविद्यालय के ग्राफिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष की ओर से जारी प्रतिक्रिया में इस पहचान पत्र को फर्जी बताया गया है। विश्वविद्यालय परिवार ने कहा है कि फर्जी दस्तावेज या बिना पुष्टि की सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने से संस्थान और उससे जुड़े लोगों की छवि प्रभावित होती है।



विश्वविद्यालय ने कहा- शिकायत है तो दस्तावेज पेश करें

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले में कहा है कि किसी भी शिकायत की जांच विधिसम्मत तरीके से होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के पास नियुक्ति, वित्तीय प्रबंधन या अन्य प्रशासनिक फैसलों से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें संबंधित मंच पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।



विश्वविद्यालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना जांच के आरोप लगाना सही प्रक्रिया नहीं है। किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों, नियमों और जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।



फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट और विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला चर्चा में है। विश्वविद्यालय ने अपने ऊपर लगाए गए सभी प्रमुख आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संस्थान की छवि खराब करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों को लेकर अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आगे किसी स्तर पर आधिकारिक जांच या शिकायत दर्ज होती है या नहीं।

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