DMF जांच में सरकारी खेल,15 दिन की जांच 6 महीने चली, रिपोर्ट आई तो दबा दी
समझें क्या है पूरा मामला
Korba। कोरबा के डीएमएफ (DMF) फंड के आवंटन और प्रबंधन में कथित गड़बड़ी की शिकायत पर सरकारी कार्रवाई का ऐसा खेल सामने आया है, जिसमें एक साल गुजर गया, लेकिन न शिकायत का निपटारा हुआ और न ही जांच का सच जनता के सामने आया। पहले शिकायत केंद्रीय खान मंत्रालय तक पहुंची। दिल्ली से छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र आया। मुख्य सचिव ने मामला कमिश्नर को भेजा। फिर तीन सदस्यीय जांच समिति बनी और उसे 15 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया, लेकिन 15 दिन की जांच को पूरा करने में समिति को करीब छह महीने लग गए। अब 15 दिन पहले जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बावजूद उसे सार्वजनिक नहीं किया है। कार्रवाई की तो बात दूर, अफसर उसे दबाकर बैठ गए हैं।
मामला कोरबा के जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ से जुड़ा है। खनन प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के विकास के लिए बनाए गए इस फंड के आवंटन और प्रबंधन को लेकर एक्टिविस्ट लक्ष्मी चौहान ने शिकायत की थी। यह शिकायत 22 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय खान मंत्रालय तक पहुंची। इसके बाद भारत सरकार के खान मंत्रालय ने नवंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजा। पत्र में शिकायत को राज्य सरकार के पास भेजते हुए कहा गया कि मामले में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना की गाइडलाइन के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। केंद्र का पत्र मिलने के बाद मामला राज्य सरकार के स्तर पर पहुंचा और मुख्य सचिव ने इसे संबंधित कमिश्नर को भेज दिया।
15 दिन की जांच बनी छह महीने की कहानी
बिलासपुर कमिश्नर ने पत्र मिलते ही आननफानन में जनवरी 2026 में शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। समिति को साफ तौर पर 15 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंपने का समय दिया गया, लेकिन सरकारी जांच की रफ्तार ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए। 15 दिन में पूरी होने वाली जांच करीब छह महीने तक चलती रही। आखिरकार समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। यानी जिस जांच के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की गई थी, उसमें करीब छह महीने लग गए। इस देरी की वजह क्या रही, समिति को किस तरह की अड़चन आई और जांच में इतना समय क्यों लगा? इसका कोई स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
रिपोर्ट आई, लेकिन सरकार ने चुप्पी साध ली
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच रिपोर्ट को लेकर है। जानकारी के मुताबिक, समिति ने करीब 15 दिन पहले अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, लेकिन रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला, शिकायत सही पाई गई या नहीं, डीएमएफ के इस्तेमाल में कोई अनियमितता मिली या नहीं? इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सरकार ने रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साध रखी है। न तो रिपोर्ट के निष्कर्ष सामने आए हैं और न ही उसके आधार पर किसी कार्रवाई की जानकारी दी गई है।
एक साल में शिकायत से रिपोर्ट तक
पूरे घटनाक्रम को देखें तो 22 अक्टूबर 2024 की शिकायत से लेकर केंद्र के पत्र, राज्य सरकार की कार्रवाई, कमिश्नर को पत्र भेजने, तीन सदस्यीय समिति बनाने और फिर जांच रिपोर्ट आने तक करीब एक साल का समय बीत गया। इस दौरान शिकायत आगे बढ़ती रही, फाइलें चलती रहीं, समिति बनी और रिपोर्ट भी आ गई, लेकिन पूरी कवायद का नतीजा क्या निकला? इसे लेकर अफसर चुप बैठे हैं। डीएमएफ का पैसा खनन प्रभावित लोगों के विकास और कल्याण के लिए है। इसलिए इसके आवंटन और इस्तेमाल पर सवाल उठें तो जांच का नतीजा सार्वजनिक होना जरूरी है। अब सरकार को बताना चाहिए कि जांच समिति ने क्या पाया और रिपोर्ट पर आगे क्या कार्रवाई की जा रही है।
FAQ
- कोरबा DMF जांच किस मामले से जुड़ी है?
यह मामला कोरबा जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के आवंटन और प्रबंधन में कथित गड़बड़ी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। - DMF जांच को पूरा होने में कितना समय लगा?
जांच समिति को रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन जांच पूरी होने में करीब छह महीने लग गए। - जांच रिपोर्ट आने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद भी उसके निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अभी तक किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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