कोरबा राइस स्कैम : आरटीआई से खुलासा, अफसरों ने बदली जांच रिपोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
राज्य नागरिक आपूर्ति निगम कोरबा में करोड़ों का चावल घोटाला हुआ। घोटाला उजागर होने पर खाद्य विभाग ने स्पेशल टीम बनाई थी। जांच टीम ने कुल 12 लोगों को दोषी पाया था। मुख्यालय स्तर पर रिपोर्ट में कथित तौर पर बदलाव किया गया। अंतिम रिपोर्ट से 4 जिला प्रबंधकों के नाम हटा दिए गए।
चावल घोटाले की रिपोर्ट बदली
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक बड़ा प्रशासनिक खेल सामने आया है। यहां करोड़ों रुपये के चावल घोटाले की जांच रिपोर्ट ही बदल दी गई। विभागीय अफसरों पर अपने चहेते अधिकारियों को बचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले का खुलासा सूचना के अधिकार से हुआ है।
आरटीआई (RTI – Right to Information) कार्यकर्ता नरेश गढ़पाल ने इस गड़बड़ी को उजागर किया है। उन्हें मिले सरकारी दस्तावेजों से यह सनसनीखेज सच सामने आया है। घोटाला सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने एक स्पेशल टीम बनाई थी। इस विशेष जांच टीम ने अपनी जांच में 12 लोगों को दोषी पाया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने अंतिम रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन मुख्यालय के कई स्तरों से गुजरते हुए रिपोर्ट की सूरत ही बदल गई। सचिव की टेबल तक जो रिपोर्ट पहुंची, उसमें केवल 8 नाम थे। जांच टीम द्वारा दोषी पाए गए 4 जिला प्रबंधकों के नाम गायब थे।
ऐसे खेला गया आईडी का गलत खेल
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार यह पूरा खेल साल 2025 में खेला गया। 10 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 तक कोरबा में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ। वहां पदस्थ गुणवत्ता निरीक्षक प्रकाश बरेठ, महेंद्र शर्मा और सुभाष राठौर ने मिलकर काम किया। इन लोगों ने अन्य जिलों के गुणवत्ता निरीक्षकों की लॉगिन आईडी (ID – Identification) का दुरुपयोग किया।
इन अफसरों ने बालोद, बेमेतरा, जशपुर और सक्ती के निरीक्षकों की आईडी का इस्तेमाल किया। कोरबा से इन जिलों की दूरी बहुत अधिक है। इसके बावजूद वहां के निरीक्षकों की आईडी से चावल की जांच दिखाई गई। बिना किसी वास्तविक जांच के चावल की गुणवत्ता का फर्जी विश्लेषण किया गया। यह पूरी प्रक्रिया अवैध रूप से चावल उपार्जन के लिए अपनाई गई थी।
इन कर्मचारियों पर गिरी गाज
इस बड़े घोटाले में कुछ छोटे और मध्यम स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। बेमेतरा, बालोद, जशपुर और सक्ती में कार्यरत गुणवत्ता निरीक्षकों के नाम इसमें शामिल हैं। गुणवत्ता निरीक्षक लक्ष्मी देवी बघेल और हर्षल मेश्राम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय हुई है।
इसके साथ ही महेश्वर लाल सोनवानी, रविन्द्र मिंज, प्रणव महेश कुर्रे और मणीशंकर लहरे भी लपेटे में आए हैं। इन सभी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं तत्कालीन जिला प्रबंधक (कोरबा) प्रमोद जांगड़े को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्लेसमेंट कर्मी प्रकाश बरेठ को पूरी तरह से ब्लैक लिस्टेड किया गया है।
खराब चावल को पास करने का नेक्सस
जांच रिपोर्ट के अनुसार सक्ती के प्रणव महेश कुर्रे और कोरबा के प्रकाश बरेठ ने मिलकर मुख्य भूमिका निभाई। इन दोनों ने अमानक यानी बेहद खराब स्तर के चावल को भी मानक स्तर का बता दिया। फर्जी रिपोर्ट लगाकर खराब चावल को सरकारी गोदामों में जमा करा लिया गया।
इस पूरे नेक्सस (Nexus – सांठगांठ) में बेमेतरा, बालोद, जशपुर और सक्ती के जिला प्रबंधकों की भूमिका भी संदिग्ध थी। सरकारी नोटशीट पर इन चारों जिला प्रबंधकों के नाम सह-आरोपी के रूप में दर्ज किए गए थे। लेकिन जब मुख्यालय से अंतिम रिपोर्ट तैयार हुई, तो ये चारों नाम गायब कर दिए गए। विभागीय अधिकारियों की इस कूटनीति और हेरफेर से अब पूरी जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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