कोरबा कुसमुंडा कोल स्टॉक में आग : करोड़ों के नुकसान की आशंका

Umeshwari Baghel | Jun 04, 2026, 21:37 IST
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कोरबा SECL कुसमुंडा 29 नंबर स्टॉक यार्ड में आग लग गई। लाखों टन कोयला जलने का डर है, करोड़ों रुपए का नुकसान हो सकता है। आग मीथेन गैस और गर्मी की वजह से लगी मानी जा रही है। दमकल और टीम आग बुझाने में लगे हैं। इससे उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

NEWS IN SHORT

  • कोरबा SECL कुसमुंडा में भीषण आग, करोड़ों का नुकसान की आशंका
  • 29 नंबर स्टॉक यार्ड में आग से उत्पादन और आपूर्ति पर असर
  • मीथेन गैस और गर्मी को माना जा रहा आग का कारण
  • SECL सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
  • भविष्य में हादसे रोकने के लिए विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

NEWS IN DETAIL

Korba। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के SECL कुसमुंडा क्षेत्र की 29 नंबर कोल स्टॉक यार्ड में गुरुवार को भीषण आग लगने से खदान क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आग इतनी प्रचंड थी कि कोयले के विशाल ढेर से उठती लपटें और काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया।



आग की शुरुआत और घटना का विवरण

जानकारी के मुताबिक, SECL प्रबंधन मानसून से पहले बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण कर रहा था। कुसमुंडा क्षेत्र के 29 नंबर स्टॉक यार्ड में लाखों टन कोयला जमा किया गया था ताकि बारिश के दौरान उत्पादन और सप्लाई प्रभावित न हो।



बुधवार दोपहर को अचानक कोयले के ढेर से धुआं निकलना शुरू हुआ। शुरुआत में इसे सामान्य माना गया, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई। आग तेजी से फैल गई और कोयले का बड़ा हिस्सा धधकने लगा।



संभावित कारण: मीथेन गैस और भीषण गर्मी

विशेषज्ञों का कहना है कि आग के संभावित कारणों में कोयले में मौजूद मीथेन गैस और उच्च तापमान शामिल हैं। अत्यधिक गर्मी और कोयले के ढेर में गैस संचयन से स्वतः दहन (Spontaneous Combustion) की संभावना बढ़ जाती है।



कुसमुंडा क्षेत्र के खदान कर्मचारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कोल स्टॉक में धुआं निकलने या आग लगने जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।



आग बुझाने के प्रयास

घटना की सूचना मिलते ही SECL के दमकल वाहन, पानी के टैंकर और राहत टीम मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों और अधिकारियों ने कई घंटों तक आग बुझाने का प्रयास किया।



कोयले के विशाल ढेर में लगी आग पर काबू पाना आसान नहीं था। पानी का छिड़काव और मिट्टी डालने की प्रक्रिया लगातार जारी रही। आग को दूसरे स्टॉक क्षेत्रों तक फैलने से रोकने के लिए आसपास के हिस्सों में भी एहतियाती कदम उठाए गए।



उत्पादन और आपूर्ति पर प्रभाव

स्टॉक यार्ड में आग लगने से लाखों टन कोयला प्रभावित हो सकता है। यह कोयला मानसून से पहले भंडारित किया गया था और उत्पादन व डिस्पैच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।



यदि नुकसान बड़ा हुआ, तो बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों को होने वाली सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। भविष्य में उत्पादन और वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।



सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लगातार आग लगने की घटनाओं ने SECL प्रबंधन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि गर्मी के मौसम में कोल स्टॉक की नियमित मॉनिटरिंग, तापमान नियंत्रण और पानी के छिड़काव जैसे सुरक्षा उपाय पर्याप्त रूप से नहीं किए जा रहे।



कर्मचारी संगठनों ने भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।



आर्थिक नुकसान का अनुमान

SECL प्रबंधन फिलहाल आग बुझाने और नुकसान का आकलन करने में जुटा है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस घटना से करोड़ों रुपये का नुकसान होने की संभावना है।



स्थानीय लोग और कर्मचारी इस घटना को लेकर चिंतित हैं। सभी की नजर अब इस पर है कि SECL प्रबंधन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।



IMP FACTS

स्थान: कोरबा, SECL कुसमुंडा 29 नंबर कोल स्टॉक यार्ड।



आग का असर: लाखों टन कोयला प्रभावित होने की संभावना।



सम्भावित कारण: कोयले में मीथेन गैस और अत्यधिक गर्मी।



आग बुझाने के प्रयास: एसईसीएल की फायर ब्रिगेड, पानी के टैंकर और टेक्निकल टीम आग बुझाने के काम में जुटी है।



आर्थिक प्रभाव: करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका।उत्पादन/सप्लाई पर असर: बिजली संयंत्र और औद्योगिक इकाइयों की कोयला आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।



सुरक्षा सवाल: लगातार आग की घटनाओं ने SECL निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।



नियंत्रण का प्रयास: आग को आस-पास के दूसरे कोयला भंडारों तक फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानी बरती जा रही है।



विशेषज्ञों की सलाह और भविष्य की तैयारियां

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोल स्टॉक यार्ड में लगातार तापमान मापने और मीथेन गैस की जांच करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही खदान में आग की समय पर जानकारी देने वाला 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' लगाया जाना चाहिए, ताकि खतरे का तुरंत पता चल सके।



मानसून से पहले कोयले का सुरक्षित रखरखाव भी आवश्यक है, जिससे सप्लाई न रुके। इन उपायों से न केवल करोड़ों का नुकसान बचेगा, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी तय हो सकेगी।



FAQ

  1. कोरबा SECL कुसमुंडा 29 नंबर स्टॉक यार्ड में आग कैसे लगी?
    आग के संभावित कारण कोयले में मौजूद मीथेन गैस और भीषण गर्मी मानी जा रही है, जिससे स्वतः दहन (Spontaneous Combustion) हुआ।
  2. आग का उत्पादन और कोयला आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?
    आग में लाखों टन कोयला प्रभावित हो सकता है, जिससे बिजली संयंत्र और औद्योगिक इकाइयों को सप्लाई प्रभावित होने की संभावना है।
  3. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
    नियमित तापमान और गैस मॉनिटरिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, और मानसून से पहले सुरक्षित भंडारण जैसे उपाय आग लगने की घटनाओं को कम कर सकते हैं।

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