छत्तीसगढ़ में जमीन रिकॉर्ड ऑनलाइन, रजिस्ट्री होते ही खुद-ब-खुद होगा नामांतरण

Aishwarya Dwivedi | May 08, 2026, 12:45 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 हजार से अधिक गांवों के जमीन रिकॉर्ड डिजिटल कर दिए हैं। अब रजिस्ट्री होते ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः शुरू होगी और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ पर मालिक को तत्काल अलर्ट मिलेगा।

NEWS IN SHORT

  • प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांवों के रिकॉर्ड अब ऑनलाइन।
  • रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया अब अपने आप शुरू होगी।
  • रिकॉर्ड में छेड़छाड़ होने पर मालिक को तत्काल एसएमएस अलर्ट मिलेगा।
  • जियोरेफरेंसिंग तकनीक से अब जमीन का सटीक डिजिटल सीमांकन संभव है।
  • घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा और बी-1 निशुल्क डाउनलोड करें।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की राजस्व व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए जमीन के लगभग सभी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब इतनी व्यापक स्तर पर भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया है। 5 मई तक के आंकड़ों के अनुसार, रायपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों के 20 हजार से अधिक गांवों के 5 करोड़ 87 हजार से ज्यादा खसरा रिकॉर्ड अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।



भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता का नया युग

राजस्व विभाग का दावा है कि इस पहल से न केवल काम में तेजी आएगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनेगी। सबसे बड़ा बदलाव नामांतरण की प्रक्रिया में किया गया है। अब जमीन की रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की शुरू हो जाएगी। इसके लिए अब आम जनता को तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने या बाबू-पटवारियों के आगे-पीछे घूमने की जरूरत नहीं होगी।



रियल टाइम एसएमएस अलर्ट

सुरक्षा के लिहाज से सरकार ने एक बेहद 'हाईटेक' फीचर जोड़ा है। अब खसरा या बी-1 रिकॉर्ड में यदि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के छेड़छाड़ या संशोधन की कोशिश करता है, तो जमीन मालिक और संबंधित अधिकारियों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर रियल टाइम एसएमएस (SMS) अलर्ट जाएगा। इससे जमीन के फर्जीवाड़े, अवैध कब्जों और रिकॉर्ड में हेरफेर की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।



जियोरेफरेंसिंग से हाईटेक हुए नक्शे

प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग का काम पूरा कर लिया गया है। इस तकनीक के माध्यम से जमीन की सटीक लोकेशन, उसका सही सीमांकन और डिजिटल रिकॉर्ड को आसानी से देखा जा सकता है। वर्तमान में राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जोड़ दिया गया है।



आम जनता को मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं

निशुल्क डाउनलोड: लोग अब घर बैठे डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा और बी-1 की कॉपी बिना किसी शुल्क के डाउनलोड कर सकते हैं।



मोबाइल एप: गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विभागीय ऐप के माध्यम से स्मार्टफोन पर ही रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं।



बैंक लोन की जानकारी: यदि कोई जमीन बैंक में गिरवी रखी है, तो उसकी जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी, जिससे धोखाधड़ी की संभावना खत्म होगी।



फर्जी रजिस्ट्री पर रोक: एक ही जमीन को बार-बार अलग-अलग लोगों को बेचने के फर्जीवाड़े पर अब पूरी तरह अंकुश लगेगा।



मॉडर्न रिकॉर्ड रूम: प्रदेश की 252 तहसीलों में से 172 में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 155 का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।



राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के जरिए विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया गया है।



अब छत्तीसगढ़ का कोई भी किसान या नागरिक अपनी जमीन के कागजात के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटेगा। इस डिजिटल कदम से न केवल आम आदमी को मानसिक और आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि अदालतों में चलने वाले जमीन संबंधी विवादों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण राजस्व प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है। ऑटो-नामांतरण और रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट जैसी सुविधाओं से न केवल भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता के समय और धन की भी बचत होगी। यह तकनीक पारदर्शी शासन की दिशा में बड़ा कदम है।



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