छत्तीसगढ़ में आवासीय, कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि जमीन के इस्तेमाल पर नई बंदिशें, जोन के हिसाब से गतिविधियां तय
यानी जिस काम को संबंधित जोन में प्रतिबंधित किया गया है, वहां वह गतिविधि नहीं की जा सकेगी।
आवासीय इलाके में सबसे बड़ी रोक
रिहायशी इलाकों को कारोबार और भारी गतिविधियों से दूर रखने की कोशिश की गई है। यहां हरे, नारंगी, लाल और नीले वर्ग के उद्योग नहीं लगाए जा सकेंगे। गोदाम, वेयरहाउस, बूचड़खाने और कबाड़खाने पर भी रोक रहेगी। बड़े ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और थोक कारोबार भी आवासीय क्षेत्र में नहीं होंगे।
तेल-गैस भी नहीं
रिहायशी जमीन पर तेल डिपो, पेट्रोलियम और ज्वलनशील सामान का भंडारण तथा गैस गोदाम भी प्रतिबंधित रहेगा। पशुपालन, मछली पालन, डेयरी और पोल्ट्री जैसी गतिविधियों को भी इस जोन से बाहर रखा गया है। खनन और दाह संस्कार या कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियां भी यहां नहीं की जा सकेंगी।
अस्पताल और जेल पर भी सीमा
संक्रामक रोगों के अस्पताल और जेल जैसी गतिविधियां भी आवासीय भूमि उपयोग में प्रतिबंधित सूची में हैं। इसका मतलब साफ है कि रिहायशी जोन को सिर्फ मकान बनाने की जगह मानकर नहीं, बल्कि आसपास की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाएगा।
कॉमर्शियल जमीन भी खुली छूट नहीं
वाणिज्यिक इलाके में भी हर तरह का कारोबार नहीं किया जा सकेगा। अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग और खतरनाक पदार्थों का भंडारण या प्रसंस्करण प्रतिबंधित रहेगा। बड़े बूचड़खाने, कबाड़खाने और खनन गतिविधियों पर भी रोक होगी। यानी कॉमर्शियल जमीन का मतलब यह नहीं कि वहां कोई भी गतिविधि शुरू की जा सकती है।
इंडस्ट्रियल जोन में भी पाबंदी
औद्योगिक इलाके में सामान्य आवासीय कॉलोनियां नहीं बसाई जा सकेंगी। हालांकि श्रमिकों और कर्मचारियों के आवास को इससे अलग रखा गया है। बड़े कॉमर्शियल परिसर और पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।
पब्लिक जमीन पर भी नियम
सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक जमीन पर पूरी तरह आवासीय टाउनशिप, भारी कॉमर्शियल गतिविधियां और हरे, नारंगी व लाल वर्ग के उद्योग नहीं लगाए जा सकेंगे। थोक बाजार, बूचड़खाने, कबाड़खाने, खनन, तेल डिपो और गैस गोदाम भी प्रतिबंधित रहेंगे। पशुपालन और पोल्ट्री जैसी गतिविधियां भी इस सूची में हैं।
पार्क में कारोबार का रास्ता बंद
मनोरंजन, पार्क और खुले स्थानों में आवासीय बस्तियां, उद्योग और कॉमर्शियल परिसर नहीं बनाए जा सकेंगे। खनन और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के साथ खतरनाक सामान का भंडारण, तेल डिपो और गैस गोदाम भी प्रतिबंधित होंगे। पशु और मुर्गी पालन भी यहां नहीं किया जा सकेगा।
खेती की जमीन पर भी रोक
कृषि भूमि पर सामान्य आवासीय बस्तियां नहीं बसाई जा सकेंगी। हालांकि किफायती/जन आवास और स्वीकृत उपनगरों को अलग रखा गया है। बड़े कॉमर्शियल प्रोजेक्ट, खतरनाक व्यावसायिक गतिविधियां, नारंगी और लाल वर्ग के उद्योग, ज्यादा घनत्व वाली आवासीय योजनाएं और बड़े मॉल भी कृषि क्षेत्र में प्रतिबंधित होंगे।
अब असली सवाल लागू करने का
सरकार ने प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तो साफ कर दी है, लेकिन अब बड़ा सवाल इसके अमल का है। नगर एवं ग्राम निवेश से लेकर स्थानीय निकायों तक यह देखना होगा कि जमीन के तय उपयोग के खिलाफ गतिविधियां शुरू न हों। खास बात यह है कि अधिसूचना में प्रतिबंधित गतिविधियों को छोड़कर बाकी गतिविधियों को संबंधित जोन में अनुमेय माना गया है।
राज्यपाल के नाम से अधिसूचना
यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के तहत किया गया है। छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना राज्यपाल के नाम से आवास एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र सिंह भारद्वाज ने जारी की है। अब अलग-अलग जोन में जमीन के इस्तेमाल को लेकर नियम पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट रूप में सामने हैं।