छत्तीसगढ़ शराब घोटाला ; 13 ठिकानों पर रेड से हिला छत्तीसगढ़, निकला करोड़ों का सोना, कैश और दस्तावेज

Aishwarya Dwivedi | May 03, 2026, 18:13 IST
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने 13 ठिकानों पर छापेमारी कर 5.39 करोड़ रुपये का कैश और सोना जब्त किया है। सिंडिकेट के मनी ट्रेल को लेकर जांच और गिरफ्तारियां जारी हैं।

छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। 30 अप्रैल को प्रदेश के रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर सहित 13 महत्वपूर्ण ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस ताजा कार्रवाई में जांच एजेंसी ने 53 लाख रुपए नकद, 3.234 किलो सोना और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद किए गए कैश और ज्वेलरी की कुल कीमत लगभग 5 करोड़ 39 करोड़ रुपए आंकी गई है।



यह पूरी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। हालांकि, ईडी ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि किस विशेष व्यापारी या व्यक्ति के घर से कितनी राशि या सोना मिला है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह छापेमारी सिंडिकेट से जुड़े मनी ट्रेल को खंगालने के लिए की गई थी।



बीजेपी नेता और बड़े कारोबारियों पर कसा शिकंजा

इस रेड के दौरान दुर्ग में अमर इंफ्रा के संचालक और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के निवास और कार्यालय पर दबिश दी गई। इसके साथ ही भिलाई में गोविंद मंडल की फैक्ट्री और घर पर भी गहन जांच की गई।



बिलासपुर में कार्रवाई का केंद्र सराफा बाजार रहा। यहां के बड़े कारोबारी विवेक अग्रवाल और सदर बाजार स्थित श्री राम ज्वेलर्स पर ईडी के 10 से ज्यादा अधिकारियों ने घंटों जांच की। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इन कारोबारियों ने शराब घोटाले से अर्जित अवैध धन को सफेद करने या उसे अलग-अलग निवेशों में ठिकाने लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।



क्या है 2,174 करोड़ का यह शराब घोटाला

ईडी की जांच के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में शराब के लाइसेंस, सप्लाई और बिक्री में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया। आरोप है कि तत्कालीन सरकार के संरक्षण में एक शक्तिशाली सिंडिकेट काम कर रहा था।



फरवरी 2019 में रायपुर के होटल वेनिंगटन में कारोबारी अनवर ढेबर ने डिस्टलरी मालिकों के साथ बैठक की। इसमें तय हुआ कि शराब की हर पेटी पर कमीशन वसूला जाएगा। EOW और ACB की चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे खेल में लगभग 2,883 करोड़ रुपए की अवैध कमाई हुई। ईडी ने अपनी FIR में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के पूर्व एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है।



अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस मामले में अब तक 9 प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अनवर ढेबर और अरविंद सिंह जैसे रसूखदार नाम शामिल हैं।



मुख्य आंकड़े:



कुल आरोपी: 81 लोगों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई जारी है।



अटैच संपत्ति: ईडी अब तक करीब 380 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति कुर्क कर चुकी है।



ताजा बरामदगी: 5 करोड़ 39 लाख रुपए मूल्य का कैश और सोना।



आगे क्या

हालिया छापेमारी में ईडी को भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों का मिलान बैंक खातों और निवेश के विवरणों से कर रही है। माना जा रहा है कि इन सबूतों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल, छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।



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