महासमुंद में 1 करोड़ का गैस घोटाला: GPS ने खोला 90 टन गैस की कालाबाजारी का राज!

Harrison Masih | May 02, 2026, 20:05 IST
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महासमुंद में एलपीजी गैस की कालाबाजारी का बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें 6 कैप्सूल वाहनों से 90 मीट्रिक टन गैस की हेराफेरी की गई। GPS ट्रैकिंग और रिकॉर्ड जांच में गड़बड़ी उजागर हुई। मामले में प्लांट संचालकों की मिलीभगत सामने आई है।

News In Short

  • महासमुंद में 90 मीट्रिक टन LPG गैस की कालाबाजारी का खुलासा
  • 6 कैप्सूल वाहनों से करीब 1 करोड़ 5 लाख की गैस हेराफेरी
  • GPS ट्रैकिंग से घोटाले की पूरी साजिश सामने आई
  • रिकॉर्ड में खरीद कम, बिक्री ज्यादा दिखाकर फर्जीवाड़ा
  • एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश और जांच जारी

News In Details

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक बड़ा एलपीजी गैस कालाबाजारी घोटाला सामने आया है, जिससे प्रशासन और पुलिस दोनों चौकस हो गए हैं। जांच में यह खुलासा हुआ है कि 6 गैस कैप्सूल वाहनों से लगभग 90 मीट्रिक टन गैस की हेराफेरी की गई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 5 लाख रूपए है। इस घोटाले में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक और अन्य अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिन पर मिलीभगत का आरोप है।



GPS ट्रैकिंग से खुलासा

पुलिस के मुताबिक, यह सारा खेल मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर 6 अप्रैल 2026 के बीच हुआ। जांच में पाया गया कि इन गैस कैप्सूल वाहनों में लगे GPS ट्रैकिंग सिस्टम से मिली जानकारी के बाद ही घोटाले का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने जब ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण किया, तो पाया कि 31 मार्च से 5 अप्रैल के बीच कुल 6 कैप्सूल से गैस की अवैध निकासी की गई थी।



रिकॉर्ड में भारी अनियमितताएं

जब्त दस्तावेजों की जांच में रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी सामने आई। अप्रैल महीने में केवल 47 टन गैस खरीदी गई थी, जबकि 107 टन गैस की बिक्री दर्ज की गई। यह अंतर साफ तौर पर चोरी और कालाबाज़ारी का संकेत देता है।



कर्मचारियों के बयान ने खोली सच्चाई

प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि यह कार्य उच्च अधिकारियों के निर्देश पर किया गया था। गैस को पहले प्लांट के बुलेट टैंक में खाली किया जाता था, फिर उसे निजी टैंकरों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर और आसपास के इलाकों में 4 से 6 टन तक गैस बिना पक्के बिल के सप्लाई की गई थी, जो पूरी तरह से सरकारी नियमों की अवहेलना थी। यह गैस संकट के समय पर सप्लाई की जा रही थी, जब देशभर में गैस की भारी कमी थी।



कैप्सूल वाहनों का दुरुपयोग

जो 6 गैस कैप्सूल वाहनों से गैस की हेराफेरी की गई, उन्हें पहले प्रशासन ने सुरक्षा के तहत सुपुर्द किया था। लेकिन बाद में इन वाहनों का दुरुपयोग करते हुए गैस की चोरी की गई।



अब तक एक आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी, निखिल वैष्णव, को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस इस पूरे गैंग के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच को और गहरा कर रही है।



सिस्टम की कमजोरियों से उठाया फायदा

यह घोटाला सिस्टम की कमजोरियों का एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें प्रशासन की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रूपए का गबन किया गया। इस घोटाले ने यह साबित कर दिया कि किस तरह कमजोर निगरानी और कार्यप्रणाली का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में और कौन-कौन से नामों का खुलासा करते हैं और यह पूरी गैस कालाबाज़ारी की साजिश कितनी गहरी है।



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