सट्टे का साम्राज्य, संरक्षण का नेटवर्क, सौरभ की पूछताछ से किसकी बढ़ेगी मुश्किल, महादेव के खेल में कौन-कौन था हिस्सेदार

Arun Tiwari | Nov 02, 2026, 14:56 IST
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी, रायपुर CBI कोर्ट में पेशी, अब खुलेगा प्रोटेक्शन मनी का राज
Saurabh Chandrakar’s return to India puts the alleged protection money network, hawala transactions, and political-administrative links in the Mahadev betting case under renewed CBI scrutiny
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों की निगाहें अब प्रोटेक्शन मनी नेटवर्क पर टिक गई हैं। ओमान की राजधानी मस्कट से भारत पहुंचे सौरभ को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेशी है। इसके बाद उससे रिमांड पर पूछताछ की संभावना है।

माना जा रहा है कि इस पूछताछ में ऑनलाइन सट्टे से होने वाली कमाई, हवाला के जरिए रकम के लेनदेन और सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाए गए पैसों से जुड़े सवाल अहम होंगे। महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच लंबे समय से चल रही है। इस दौरान कई आरोपियों, बिचौलियों और संपर्क सूत्रों के नाम सामने आए हैं। अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के जरिए जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर सकती हैं।



सट्टे की कमाई से हवाला तक फैला नेटवर्क

जांच के अनुसार महादेव ऑनलाइन ऐप के जरिए क्रिकेट और फुटबॉल सहित विभिन्न खेलों पर सट्टा खिलाया जाता था। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में पैनल, फ्रेंचाइजी और एजेंटों का नेटवर्क तैयार किए जाने के आरोप हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से दांव की रकम एकत्र की जाती थी। आरोप है कि सट्टे से अर्जित धन को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर घुमाने के बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। इसी कारोबार से होने वाली कमाई का एक हिस्सा अधिकारियों और कर्मचारियों तक भी पहुंचाया जाता था। जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संरक्षण राशि किसके निर्देश पर जुटाई जाती थी, रकम पहुंचाने की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और इस पूरे नेटवर्क का हिसाब कौन रखता था।



पुलिस अधिकारियों के नाम भी आए सामने

महादेव सट्टा मामले से जुड़े बयानों और दस्तावेजों के आरोप में छत्तीसगढ़ पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नामों के साथ मासिक भुगतान का जिक्र किया गया है। इन दावों में तत्कालीन ASP अभिषेक माहेश्वरी को 35 लाख रूपए प्रतिमाह, तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और आरिफ शेख को 20-20 लाख रूपए और तत्कालीन SSP प्रशांत अग्रवाल को भी 20 लाख रूपए प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई है। ASP संजय ध्रुव को 25 लाख रूपए प्रतिमाह भुगतान किए जाने का दावा भी सामने आया है। सीबीआई पुलिस अधिकारियों के यहां छापा भी मार चुकी है। इन कथित भुगतानों ने पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए।



तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के आरोप

इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के नाम भी जांच संबंधी दावों में सामने आए हैं। तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया और पूर्व OSD डॉ. सूरज कुमार कश्यप के नाम पर कथित रकम का उल्लेख किया गया है। तत्कालीन मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा को भी महादेव ऐप के प्रमोटरों से रकम मिलने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के चलते मामला केवल अवैध ऑनलाइन सट्टे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी पहुंच राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था तक होने के दावों ने इसे प्रदेश का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया।



508 करोड़ रूपए के आरोप से मचा था सियासी घमासान

नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान महादेव ऐप का मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने असीम दास को 5.39 करोड़ रूपए नकद के साथ पकड़ा था। इसके बाद ऐप से जुड़े शुभम सोनी के ईमेल और बयान के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को 508 करोड़ रूपए दिए जाने का आरोप सामने आया। हालांकि, असीम दास बाद में अपने बयान से पलट गया था। इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका जांच का विषय है। इस मामले में भूपेश बघेल का कहना है कि उन्होंने महादेव सट्टा के खिलाफ कार्रवाई कराई थी। जिन पुलिस अफसरों ने कार्रवाई की उनके यहां सीबीआई ने छापा मारा। उनका आरोप है कि महादेव सट्टा एप अभी भी चल रहा है और उस पर केंद्र सरकार का संरक्षण है।



CBI की कार्रवाई से बढ़ी जांच की अहमियत

26 मार्च 2025 को CBI ने महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में छापेमारी की थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली गई थी। CBI की जानकारी के मुताबिक सौरभ चंद्राकर दो मामलों में आरोपपत्र का सामना कर रहा है। उसके खिलाफ ED के एक मामले में भी अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।



अब पूछताछ से क्या निकलेगा?

सौरभ चंद्राकर से पूछताछ में कथित प्रोटेक्शन मनी के हिसाब, हवाला नेटवर्क, बिचौलियों की भूमिका और रकम के अंतिम लाभार्थियों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि सट्टे से अर्जित धन कहां-कहां पहुंचा और इस व्यवस्था को संचालित करने में किन लोगों की भूमिका थी। सौरभ की भारत वापसी से महादेव मामले की जांच को नया मोड़ मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि पूछताछ में अवैध सट्टे के कारोबार से जुड़े तथ्यों के साथ कथित संरक्षण तंत्र की कितनी परतें खुलती हैं। बहरहाल इस मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

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