इंस्टाग्राम पर दोस्ती, नौकरी का झांसा और फिर युवतियों से ऑनलाइन सट्टे का कारोबार
पहले दोस्ती और बातचीत से विश्वास जीतने, फिर आकर्षक वेतन वाली नौकरी का प्रस्ताव देने और इसके बाद दूसरे शहरों में बुलाकर काम कराने की बात सामने आई है। आशंका है कि इनमें से कुछ युवतियों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी के संचालन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कामों में किया जा रहा है। रायपुर और दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की करीब 300 युवतियों के हैदराबाद, पुणे, मुंबई, बेंगलुरु और पश्चिम बंगाल जाने की सूचना ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। ऐसे में जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि दूसरे शहरों में गई युवतियां किन परिस्थितियों में वहां पहुंचीं और क्या उनका संबंध वास्तव में सट्टेबाजी के अवैध कारोबार से है।
पुराने एजेंटों पर शिकंजा, भर्ती के तरीके में बदलाव
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों में पुलिस और ईडी की कार्रवाई के बाद नेटवर्क के पुराने एजेंटों और ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में नए लोगों के जरिए काम कराने और अलग-अलग शहरों में बैठकर नेटवर्क संचालित करने की बात सामने आ रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करने वाले लोग किसके निर्देश पर काम कर रहे हैं और नौकरी के नाम पर युवतियों को किस तरह के काम सौंपे जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में एक युवती के साथ फिरोज और अतुल नाम के लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि अतुल पहले महादेव सट्टा ऐप में मैनेजर के रूप में काम कर चुका है।
हैदराबाद से मुंबई तक फैले कनेक्शन की पड़ताल
महादेव सट्टा नेटवर्क का संचालन छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा है। देश के अलग-अलग शहरों में ऑनलाइन पैनल चलाने और स्थानीय स्तर पर ऑपरेटरों के जरिए सट्टेबाजी कराने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में दुर्ग पुलिस ने हैदराबाद में कार्रवाई कर सट्टा पैनल चलाने के आरोप में भिलाई और रायपुर के लोगों को गिरफ्तार किया था।
अब जांच के दायरे में हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में सक्रिय संदिग्ध ऑपरेटरों के साथ छत्तीसगढ़ से वहां पहुंचे लोगों के संपर्कों को भी शामिल किए जाने की जानकारी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि युवतियों को किस तरह की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया, उन्हें किसने बुलाया और क्या उनके काम का संबंध सट्टेबाजी के ऑनलाइन बैकएंड पैनल से था।
विदेशी नंबरों और सोशल मीडिया का सहारा
ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस नेटवर्क की जांच में विदेशी मोबाइल नंबरों और इंटरनेट आधारित संचार माध्यमों के इस्तेमाल का पहलू भी अहम है। आरोप है कि संदिग्ध ऑपरेटर विदेशी नंबरों के जरिए सट्टे की आईडी उपलब्ध कराने और संपर्क बनाए रखने जैसे काम करते रहे हैं। सोशल मीडिया और कॉलिंग ऐप्स के इस्तेमाल से वास्तविक संचालकों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है। जांच में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों, चैट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही उनकी भूमिका स्पष्ट होगी।
4,336 करोड़ की संपत्तियों पर ईडी की कार्रवाई
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के खिलाफ ईडी की कार्रवाई इस मामले की गंभीरता को बताती है। एजेंसी के मुताबिक, यह नेटवर्क फ्रेंचाइजी आधारित पैनलों के जरिए संचालित होने वाला अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट था। करीब 4,336 करोड़ रूपए की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। देशभर में 175 से अधिक ठिकानों पर तलाशी और 13 गिरफ्तारियों की जानकारी भी दी गई है।
मार्च 2026 में ईडी ने मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और उससे जुड़े लोगों की करीब 1,700 करोड़ रूपए की 20 अचल संपत्तियां अटैच करने की कार्रवाई की थी। एजेंसी की कार्रवाई में मुंबई, दिल्ली और दुबई स्थित संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं।
भर्ती के पीछे कौन?
महादेव नेटवर्क की जांच में अब केवल सट्टा पैनल, बैंक खातों और संपत्तियों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। सोशल मीडिया के जरिए भर्ती, युवतियों को दूसरे शहरों में बुलाने और वहां उनसे कराए जाने वाले काम की कड़ियां जोड़ने पर भी एजेंसियों का फोकस है।
यदि इन सूचनाओं की पुष्टि होती है, तो यह नेटवर्क की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है। फिलहाल, करीब 300 युवतियों के दूसरे शहरों में जाने और उनके महादेव नेटवर्क से संबंध का इनपुट है। असली खुलासा तभी होगा, जब एजेंसियां यह स्पष्ट कर सकेंगी कि नौकरी के नाम पर संपर्क करने वाले लोग कौन हैं, पैसा कहां से आता है और इस पूरे तंत्र का संचालन आखिर किसके इशारे पर हो रहा है।