महादेव सट्टा किंग सौरभ चंद्राकर को 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड, 4 नवंबर तक रायपुर की CBI कोर्ट में करना होगा पेश
कि सौरभ चंद्राकर को 4 नवंबर 2026 तक या उससे पहले छत्तीसगढ़ की रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाए। दिल्ली के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज निखिल चोपड़ा की अदालत ने यह आदेश दिया है।
इसके साथ ही ट्रांजिट रिमांड से जुड़ी अर्जी का अंतिम निराकरण करते हुए उसे रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अब सीबीआई को तय समय के भीतर आरोपी को रायपुर पहुंचाकर विशेष अदालत के सामने पेश करना होगा। इस पेशी के बाद रायपुर में मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
समझें क्या है पूरा मामला
- महादेव ऐप के आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में लिया गया।
- इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर यह कार्रवाई हुई थी।
- सीबीआई और ईडी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चला रही हैं।
- ईडी के अनुसार ऐप से 6,000 करोड़ रुपए से अधिक कमाई हुई।
- सीबीआई ने 72 आरोपियों के खिलाफ छह चार्जशीट दाखिल की हैं।
बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
दिल्ली कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने सीबीआई की ट्रांजिट रिमांड अर्जी का विरोध किया। बचाव पक्ष का कहना था कि सौरभ को ओमान से मनी लॉन्ड्रिंग यानी पीएमएलए मामले में प्रत्यर्पित किया गया है, न कि सीबीआई के मामले में। वहीं ईडी ने अदालत को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग केस में सौरभ के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है और एजेंसी उसे गिरफ्तार करना चाहती है। अदालत ने सीबीआई की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर रायपुर की विशेष अदालत में पेशी का रास्ता तय कर दिया।
ओमान से भारत लेकर आई सीबीआई
सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान सरकार के सामने प्रत्यर्पण का प्रस्ताव रखा। मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई। सौरभ दो सीबीआई मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है।
पुलिस और रसूखदारों से सांठगांठ के आरोप
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट में शामिल था। यह नेटवर्क विदेश से संचालित होता था। क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और दूसरे आयोजनों पर ऑनलाइन दांव लगवाए जाते थे। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और ब्रांच बनाए गए थे। इनके जरिए लोगों को सट्टे से जोड़ा जाता था और रकम वसूली जाती थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टे से कमाई गई रकम को कई फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए घुमाया जाता था। कई स्तरों पर लेन-देन के बाद रकम हवाला के रास्ते विदेश भेजी जाती थी। सीबीआई का आरोप है कि इस कारोबार को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी अधिकारियों को प्रोटेक्शन मनी भी दी जाती थी। जांच में पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और दूसरे प्रभावशाली लोगों से कथित सांठगांठ के पहलुओं की भी पड़ताल की गई है। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
दो सीबीआई केस और ईडी की जांच
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सीबीआई के दो मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इन मामलों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, भ्रष्टाचार और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) कानून के तहत आरोप शामिल हैं। ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े पैसों और देश-विदेश में बनाई गई संपत्तियों की जांच कर रही है। मार्च 2026 में ईडी ने इस मामले में करीब 1700 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच करने की कार्रवाई भी की थी।
सौरभ की भारत वापसी के बाद अब रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में होने वाली पेशी पर नजर रहेगी। दिल्ली कोर्ट ने उसे पेश करने के लिए 4 नवंबर की समयसीमा तय की है। इसके बाद जांच एजेंसियां उससे सट्टा कारोबार के नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और कथित संरक्षण देने वाले लोगों के बारे में पूछताछ कर सकती हैं। महादेव सट्टा मामले में अब तक जिन नामों और कड़ियों की चर्चा होती रही है, उनमें से कितने लोगों तक जांच की आंच पहुंचती है, यह आगे की कार्रवाई से साफ होगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
महादेव सट्टा मामला देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़ा बताया गया है। सीबीआई के मुताबिक इसमें क्रिकेट और दूसरे आयोजनों पर दांव लगवाए जाते थे। फर्जी बैंक खातों से होकर रकम हवाला के रास्ते विदेश भेजी जाती थी। जांच में पुलिस अधिकारियों और रसूखदारों से कथित सांठगांठ के पहलू भी देखे जा रहे हैं। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होगा, इसलिए जांच की अगली कड़ी पर नजर रहेगी।
FAQ
सवाल 1: महादेव सट्टा केस में सौरभ चंद्राकर कौन है?
जवाब: सौरभ चंद्राकर को महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का मुख्य प्रमोटर बताया गया है। सीबीआई और ईडी दोनों उसके खिलाफ जांच कर रही हैं। उसे जुलाई 2026 में ओमान में इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था।
सवाल 2: महादेव ऐप मामले में सीबीआई ने कितने आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की है?
जवाब: सीबीआई ने महादेव ऐप से जुड़े मामलों में 72 आरोपियों के खिलाफ छह चार्जशीट दाखिल की हैं। इन मामलों में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को मुख्य आरोपी बताया गया है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
सवाल 3: ओमान से सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की कोशिश कहां तक पहुंची है?
जवाब: भारत की जांच एजेंसियां ओमान से सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की कोशिश में हैं। अगस्त 2026 की रिपोर्टों में उसके
जांच एजेंसियों से सहयोग की पेशकश का जिक्र है। ओमान के कानून के मुताबिक वहां के मामले में सुनवाई पूरी हुए बिना प्रत्यर्पण मुश्किल है।