महासमुंद गैस घोटाले में छोटे अफसर गिरफ्तार, बड़े खिलाड़ी अब भी बाहर

Rajesh Lahoti | May 22, 2026, 17:17 IST
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महासमुंद के बहुचर्चित गैस घोटाले में कार्रवाई हुई, लेकिन आरोप है कि केवल निचले स्तर के लोग ही गिरफ्तार किए गए। आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर सीबीआई जांच की मांग की है।

Raipur. महासमुंद के बहुचर्चित गैस घोटाले में कार्रवाई तो हुई, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ मोहरों को पकड़ा गया और असली खिलाड़ियों को बचा लिया गया? यही आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र में पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि जिले के उच्च अधिकारियों की कथित सांठगांठ से इंडियन ऑयल कंपनी के 6 टैंकरों से गैस की कालाबाजारी की गई और करोड़ों रुपए का खेल हुआ।



इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। लेकिन आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे का दावा है कि जिन लोगों पर कार्रवाई हुई, वे सिर्फ निचले स्तर के लोग हैं, जबकि पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने वाले बड़े अधिकारी अब भी जांच से बाहर हैं।



6 टैंकर, 170 सिलेंडर और करोड़ों का खेल

23 दिसंबर 2025 को थाना सिंगोड़ा क्षेत्र में खाद्य विभाग ने छापा मारकर इंडियन ऑयल के 6 गैस टैंकर पकड़े थे। आरोप था कि टैंकरों से गैस निकालकर करीब 170 घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों में भरी जा रही थी। ये टैंकर पारादीप रिफाइनरी से इंडियन ऑयल के सिलतरा रायपुर बॉटलिंग प्लांट के लिए भेजे गए थे।टेंकर एवरग्रीन ट्रेलर सर्विस के बताए गए, जिनके मालिक के. सुब्रह्मण्यम बताए जाते हैं। मामले में थाना सिंगोड़ा में एफआईआर दर्ज हुई थी। अब शिकायत में दावा किया गया है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया।



Mahasamund gas scam




जांच पर सबसे बड़े सवाल

शिकायत में कहा गया है कि पुलिस और प्रशासन ने यह पता लगाने की कोशिश ही नहीं की कि...



- टैंकरों में कुल कितनी गैस थी?


- 170 सिलेंडरों में कितनी गैस भरी गई?


- टैंकरों में कितना स्टॉक बचा था?


- ड्राइवर मौके से कैसे भाग गए?


-टेंकर मालिकों और ट्रांसपोर्ट कंपनी से पूछताछ क्यों नहीं हुई?


* इंडियन ऑयल कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल क्यों नहीं किए गए?



इतना ही नहीं, शिकायत के मुताबिक सभी 6 टेंकरों के वाल्व खुले पाए गए थे, जिससे लगातार गैस रिसाव की आशंका बनी हुई थी। इसके बावजूद तीन महीने तक टैंकर और सिलेंडर थाना सिंगोड़ा परिसर में ही खड़े रहे।



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सबूत कमजोर करने के आरोप

मामले में एक बड़ा आरोप यह भी लगाया गया है कि बिना वजन कराए ही टेंकरों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स उरला रायपुर की सुपुर्दगी में दे दिया गया। बाद में जब टेंकर मालिक पक्ष हाईकोर्ट के आदेश लेकर वाहन लेने पहुंचा, तब तक टेंकर वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद 92 टन गैस चोरी की शिकायत दर्ज कराई गई। आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे का कहना है कि अगर शुरुआत में सही तरीके से वजन और तकनीकी जांच होती, तो पूरा घोटाला उसी समय सामने आ जाता।





कार्रवाई हुई… लेकिन सच्चाई सामने नहीं आई

पुलिस अधीक्षक महासमुंद ने मामले की जांच के लिए करीब 40 अधिकारियों की टीम लगाई थी। जांच के बाद खाद्य अधिकारी अजय यादव सहित चार लोगों की गिरफ्तारी हुई। दो आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। लेकिन अब पूरे मामले में यह नैरेटिव तेजी से उभर रहा है कि कार्रवाई केवल उन्हीं लोगों पर हुई, जिन्हें बलि का बकरा बनाया जा सकता था। शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि जिले के कुछ उच्च अधिकारी कथित तौर पर इस गैस नेटवर्क से जुड़े थे और करोड़ों रुपए के लेन-देन की खबरें मीडिया में भी सामने आई थीं।



सीबीआई जांच की मांग

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि एक तरफ देश को गैस बचाने का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ महासमुंद में कथित तौर पर सरकारी गैस की कालाबाजारी कर करोड़ों रुपए कमाए जा रहे थे। अब मांग यह उठ रही है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए ताकि यह साफ हो सके कि इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन था और क्या इसमें बड़े प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे? सवाल इंडियन ऑयल और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की संदिग्ध भूमिका पर भी उठ रहे हैं।



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