रायपुर में कारोबारी महेंद्र गोयनका के घर पहुंची कोलकाता पुलिस, शेयरों की हेराफेरी और जालसाजी के मामले में पूरे परिवार पर FIR
इस नए मामले में महेंद्र गोयनका के साथ उनका पूरा परिवार भी आरोपी बनाया गया है। इसमें उनकी पत्नी और बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस यहां पूछताछ और आगे की जांच के सिलसिले में पहुंची है।
कोलकाता के बहूबाजार थाने में दर्ज है FIR
इस मामले में कोलकाता के बहूबाजार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। धाराओं में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े आरोप शामिल हैं।
मामले की शिकायत एडमिट विंट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक गोपाल कुमार यादव ने की है। जांच की जिम्मेदारी उप निरीक्षक प्रांतार बनर्जी को सौंपी गई है। मामला कलकत्ता के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय की अदालत में भी भेजा जा चुका है।
गलत तरीके से ट्रांसफर करने का आरोप
शिकायत का सबसे अहम हिस्सा व्यूटेक मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के 5 हजार इक्विटी शेयरों के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता गोपाल कुमार यादव का दावा है कि उनकी कंपनी ने ये शेयर फ्यूचर डीलट्रेड प्राइवेट लिमिटेड से खरीदे थे। 14 फरवरी 2018 को कंपनी के रिकॉर्ड में इन शेयरों का मालिकाना हक एडमिट विंट्रेड के नाम दर्ज भी किया गया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन शेयरों के मूल प्रमाणपत्र आज भी उनके पास हैं। उन्होंने न तो किसी शेयर ट्रांसफर डीड पर हस्ताक्षर किए और न ही शेयर बेचने की सहमति दी। इसके बावजूद इन शेयरों को महेंद्र गोयनका एंड संस के नाम ट्रांसफर दिखा दिया गया।
पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कर बनाई गई नई कहानी?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शेयरों के हस्तांतरण को सही साबित करने के लिए कंपनी के दस्तावेजों में भी हेरफेर की गई। व्यूटेक मार्केटिंग ने वित्त वर्ष 2016-17 की अपनी मूल वार्षिक रिटर्न 22 दिसंबर 2017 को दाखिल की थी। इसमें किसी शेयर ट्रांसफर का उल्लेख नहीं था।
लेकिन बाद में कथित बोर्ड प्रस्ताव के आधार पर संशोधित रिटर्न दाखिल की गई। इसमें 5 हजार शेयरों को ही महेंद्र गोयनका एंड संस के नाम ट्रांसफर होना दिखाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैकडेटिंग कर दस्तावेज तैयार किए गए। जाली मुहर और सील का इस्तेमाल करके शेयरों पर कब्जा करने की कोशिश की गई। आरोप यह भी है कि इस पूरी कवायद का मकसद यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर नियंत्रण हासिल करना था।
पुलिस ने मूल शेयर प्रमाणपत्र भी जब्त किए
मामले की जांच के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से कई अहम दस्तावेज बहूबाजार थाने में जमा कराए गए। इनमें व्यूटेक मार्केटिंग के मूल शेयर ट्रांसफर एडवाइस, बोर्ड प्रस्ताव और MCA/ROC में दाखिल मूल व संशोधित वार्षिक रिटर्न की प्रतियां शामिल हैं।
इन दस्तावेजों को अधिवक्ता अमन बांका और सुनील कुमार ठाकुर की मौजूदगी में जब्त किया गया। पुलिस ने जब्ती की पूरी प्रक्रिया ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ eSakshya एप के जरिए पूरी की। जब्त दस्तावेज मालखाना नंबर 140/2026 में सुरक्षित रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा जा सकता है।
पत्नी और बच्चे भी आरोपी, अब रायपुर तक पहुंची जांच
इस मामले में महेंद्र गोयनका के अलावा अभिषेक अग्रवाल, अशोक रैकवार, मनीष गोयनका, सुरेंद्र सिंह सलूजा, धनेश शिवहरे और सुशील गोयनका एंड संस के नाम भी आरोपियों में शामिल हैं। FIR में महेंद्र गोयनका एंड संस का नाम भी दर्ज है। पुलिस की कार्रवाई अब रायपुर तक पहुंच गई है।
हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत में होनी बाकी है। फिलहाल यह जांच का विषय है कि शेयरों के कथित हस्तांतरण में किसकी क्या भूमिका रही और दस्तावेजों में बदलाव किसके कहने पर किया गया।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह मामला सिर्फ एक कारोबारी परिवार से जुड़ा नहीं है। शेयरों का मालिकाना हक बदलने और कंपनी के रिकॉर्ड में बदलाव करने के आरोप सीधे तौर पर निवेशकों और कंपनियों के भरोसे से जुड़े हैं। अगर दस्तावेजों में हेरफेर होता है, तो छोटे निवेशक और कंपनी के वास्तविक मालिक दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
इस कहानी में कोलकाता पुलिस का रायपुर तक पहुंचना भी बताता है कि ऐसे मामलों में राज्य की सीमाएं जांच में बाधा नहीं बनतीं। इससे यह भी साफ होता है कि कंपनी कानून, शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया और कॉर्पोरेट रिकॉर्ड की जांच कितनी जरूरी है।
FAQ
सवाल 1: इस मामले में किन पर FIR दर्ज हुई है?
जवाब: खबर के अनुसार कोलकाता के बहूबाजार थाने में दर्ज FIR में महेंद्र गोयनका, उनके परिवार के सदस्यों और कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम बताए गए हैं। आरोपियों की पूरी सूची FIR की प्रति से मिलाएं।
सवाल 2: आरोप क्या हैं?
जवाब: आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी कंपनी के 5 हजार शेयर उनकी जानकारी और सहमति के बिना ट्रांसफर दिखाए गए।
सवाल 3: क्या ये आरोप साबित हो चुके हैं?
जवाब: नहीं। ये आरोप जांच के विषय हैं। अदालत में सबूतों की जांच के बाद ही इन पर फैसला होगा।