प्लेसमेंट एजेंसी से भर्ती का विरोध शुरु, मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने सीएस को लिखा लेटर
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। द सूत्र की खबर के बाद मंत्रालय में प्रस्तावित संविदा और आउटसोर्स भर्ती को लेकर विवाद और गहरा गया है। छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संघ का आरोप है कि नियमित भर्ती की जगह प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति कर सरकार पारदर्शिता, गोपनीयता और युवाओं के अधिकारों से समझौता कर रही है।
द सूत्र की खबर के बाद बढ़ी हलचल
मंत्रालय में कनिष्ठ सचिवालय सहायकों के 245 रिक्त पदों को संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए भरने की तैयारी की खबर सामने आने के बाद कर्मचारी संगठनों में हलचल तेज हो गई है। अब छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने सीधे मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रस्ताव का विरोध किया है। संघ का कहना है कि मंत्रालय जैसे संवेदनशील संस्थान में प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति गंभीर प्रशासनिक जोखिम पैदा कर सकती है।
भर्ती प्रस्ताव पर उठाए सवाल
संघ ने अपने लेटर में GAD पर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश में भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल पहले से गठित है। 19 विभागों ने संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए प्रस्ताव भेज दिए हैं, लेकिन मंत्रालय में रिक्त पदों के लिए मांग पत्र नहीं भेजा गया। ऐसे में अचानक संविदा भर्ती का निर्णय कई सवाल खड़े करता है।
गोपनीयता से समझौते की आशंका
कर्मचारी संघ का सबसे बड़ा तर्क मंत्रालय की गोपनीयता से जुड़ा है। मंत्रालय राज्य शासन का सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र है, जहां कैबिनेट नोट, नीतिगत फैसले और संवेदनशील दस्तावेज तैयार होते हैं। संघ का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को ऐसे कार्यों में शामिल करना गोपनीयता के लिए खतरा बन सकता है। राज्य गठन के बाद से अब तक इन पदों पर संविदा नियुक्ति का कोई उदाहरण नहीं रहा है।
प्रशिक्षण पर खर्च होगा समय और धन
संघ का कहना है कि प्लेसमेंट एजेंसियों से आने वाले कर्मचारियों को सचिवालयीन कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं होगी। उन्हें प्रशिक्षित करने में सरकारी समय, संसाधन और धन खर्च होगा। वहीं मंत्रालय में पहले से कार्यरत पदोन्नत कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जा सकता है। कर्मचारियों ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया है जिसमें ई-ऑफिस संचालन में अनुभव की कमी बताई गई थी।
आरक्षण और युवाओं के अधिकार का मुद्दा
संघ ने पत्र में कहा है कि आउटसोर्सिंग भर्ती से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आरक्षण के संवैधानिक लाभ नहीं मिल पाएंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए यह निराशाजनक संदेश होगा। कर्मचारियों का आरोप है कि प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए भर्ती में भाई-भतीजावाद और मनमानी की आशंका भी बढ़ जाती है।
नियमित भर्ती की मांग पर अड़ा संघ
संघ अध्यक्ष चन्द्रकांत पाण्डेय ने मुख्य सचिव से मांग की है कि संविदा और आउटसोर्सिंग भर्ती पर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि रिक्त पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से भरा जाए और इसके लिए सीधे कर्मचारी चयन मंडल से समन्वय किया जाए।
द सूत्र की खबर के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनता नजर आ रहा है। सवाल यही है कि मंत्रालय में कर्मचारियों की कमी दूर करने के नाम पर अस्थायी व्यवस्था लाई जा रही है या फिर बैकडोर भर्ती का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।
IMP FACTS
मंत्रालय में 245 कनिष्ठ सचिवालय सहायक पदों पर भर्ती प्रस्ताव
भर्ती संविदा और आउटसोर्स (प्लेसमेंट एजेंसी) के जरिए प्रस्तावित
मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विरोध किया
संघ का आरोप-पारदर्शिता और गोपनीयता पर खतरा
मंत्रालय के संवेदनशील दस्तावेजों को लेकर सुरक्षा चिंता जताई गई
नियमित भर्ती की बजाय चयन मंडल से सीधी भर्ती की मांग
आरक्षण और युवाओं के अवसर प्रभावित होने की आशंका जताई गई
विवाद गहराया, इसे “बैकडोर भर्ती मॉडल” तक कहा जा रहा है
FAQ
- मंत्रालय में भर्ती किस तरीके से प्रस्तावित है?
245 पदों पर संविदा और आउटसोर्स यानी प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए भर्ती प्रस्तावित है। - कर्मचारी संघ इस भर्ती का विरोध क्यों कर रहा है?
संघ का कहना है कि इससे गोपनीयता, पारदर्शिता और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। - कर्मचारी संघ की मुख्य मांग क्या है?
संघ ने मांग की है कि सभी रिक्त पदों को नियमित भर्ती के माध्यम से छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल से भरा जाए।
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