छत्तीसगढ़ में माओवाद को एक और झटका: 65 लाख के इनामी 37 नक्सलियों ने किया सरेंडर

Sanjay Dhiman | Nov 30, 2025, 16:36 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में माओवाद को बड़ा झटका लगा है। यहां 37 नक्सलियों ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा को चुना। इनमें 65 लाख के इनामी 27 माओवादी भी शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास योजना 'पूना मारगेम' की सफलता से प्रेरित होकर इन्होंने हथियार डाले।

Dantewada.छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से आज माओवाद को एक और बड़ा झटका लगने की खबर सामने आई है। कुल 37 माओवादियों ने आज हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। इसमें खास बात यह है कि इन 37 में से 27 नक्सली ऐसे थे जिन पर 65 लाख का इनाम घोषित था।



ये सभी माओवादी भैरमगढ़ एरिया कमेटी, इन्द्रावती एरिया कमेटी और माड़ इलाके जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े हुए थे। इन सभी ने सुरक्षा बलों के दबाव और सरकार की 'पूना मारगेम' पहल से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। दंतेवाड़ा के डीआरजी कार्यालय में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में इन्होंने मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला लिया।



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आत्मसमर्पित नक्सलियों की पूरी जानकारी

आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नाम और इनामी सदस्य शामिल हैं। इन पर लाखों रुपये का इनाम था, जो इनकी नक्सली संगठन में अहमियत को दिखाता है।



  • ₹8 लाख इनामी (4 सदस्य): कुमली, गीता, रंजन और भीमा जैसे खूंखार नाम इसमें शामिल हैं। कुमली तो एसजेडसीएम कमलेश की गार्ड भी रह चुकी थी।
  • ₹5 लाख इनामी (1 सदस्य): क्रांति उर्फ पोदिये गावड़े, जो आमदई एरिया कमेटी का एसीएम था, उसने भी हथियार डाल दिए हैं।
  • ₹2 लाख इनामी (7 सदस्य): मुन्नी कर्मा, लक्ष्मी अटामी जैसे लोग जो प्लाटून या मिलिशिया के कमांडर/सदस्य थे, अब समाज का हिस्सा बनेंगे।
  • ₹1 लाख इनामी (13 सदस्य): हिड़मे कुहड़ाम, रोशनी सोड़ी, राजू लेकाम जैसे कई पार्टी सदस्य और जनताना सरकार के अध्यक्षों ने भी सरेंडर किया है।
  • अन्य (12 सदस्य): ₹50 हजार इनामी (2) और निरंक (10) माओवादी भी इसमें शामिल हैं। ये लोग मिलिशिया, सीएनएम, और विभिन्न नक्सली फ्रंट संगठनों का हिस्सा थे।

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छत्तीसगढ़ में 37 नक्सलियों का सरेंडर को ऐसे समझें

37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया – दंतेवाड़ा में 65 लाख रुपये के इनामी समेत कुल 37 माओवादियों ने सरेंडर किया।

'पूना मारगेम' योजना का लाभ – आत्मसमर्पण करने वालों को सरकारी मदद, कौशल विकास और कृषि भूमि जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।

नक्सलवाद पर बढ़ा दबाव – सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पुनर्वास योजनाओं से माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का आत्मसमर्पण – पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में 508 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें 165 इनामी शामिल हैं।

सुरक्षा बलों की भूमिका – डीआरजी, CRPF और अन्य बलों ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।

किन बड़ी घटनाओं में थे शामिल?

ये सभी आत्मसमर्पित नक्सली कई खतरनाक और हिंसक घटनाओं में शामिल रहे थे। इनमें 2024 की गोबेल और थुलथुली जंगलों की मुठभेड़, 2019 में भैरमगढ़-केशकुतुल के बीच पुलिस पर फायरिंग की घटना शामिल है। सबसे दर्दनाक घटना 2020 का मिनपा मुठभेड़ भी शामिल है। इसमें 26 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा ये लोग रोड काटना, तोड़फोड़ करना और प्रचार गतिविधियों में भी शामिल रहते थे।



अब तक 1160 माओवादियों ने डाले हथियार

'लोन वर्राटू' (घर लौट आइए) अभियान के तहत अब तक 1160 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं। आत्मसमर्पित माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत पूरा सहयोग मिलेगा। उन्हें तुरंत 50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी जाएगी।



इसके साथ ही, उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण, खेती के लिए जमीन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा। पिछले 20 महीनों में अकेले दंतेवाड़ा में 508 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जिनमें 165 इनामी थे।



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अधिकारियों ने किया स्वागत

इस आत्मसमर्पण पर डीआईजी कमलोचन कश्यप, डीआईजी (CRPF) राकेश चौधरी ने इन नक्सलियों का स्वागत किया। पुलिस और प्रशासन ने माओवादी नेताओं से फिर अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर शांति की राह अपनाएं।



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