छत्तीसगढ़ में गहराया पलायन का संकट, सात महीनों में 58 हजार प्रवासी पंजीकृत

Aishwarya Dwivedi | Aug 10, 2026, 13:38 IST
माइग्रेशन संकट गहराया - डेटा
छत्तीसगढ़ में नई उद्योग नीति के बावजूद मजदूरों का पलायन जारी है। सात महीनों में 58 हजार से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण और कुलगाम में हुई दो मजदूरों की हत्या ने रोजगार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में नई उद्योग नीति के तहत स्थानीय अकुशल श्रमिकों को शत-प्रतिशत प्राथमिकता देने का नियम है। इसके बावजूद राज्य में रोजगार की जमीनी स्थिति बहुत अलग दिखाई दे रही है। हर साल हजारों मजदूर बेहतर मजदूरी और काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जा रहे हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में दो मजदूरों की हत्या के बाद पलायन पर सवाल उठ गए हैं। अकेले वर्ष 2026 में सात महीनों के भीतर 58 हजार से अधिक श्रमिकों ने प्रवासी श्रेणी में पंजीकरण कराया है।



नई रोजगार नीति और जमीनी हकीकत

छत्तीसगढ़ में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। इसके बावजूद राज्य से श्रमिकों का पलायन लगातार जारी है। राज्य के अकुशल मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। वे बेहतर मजदूरी और नियमित काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर काम न मिलने से उनके सामने बड़ी आर्थिक चुनौती पैदा हो गई है।



छत्तीसगढ़ में गहराया पलायन का संकट


कुलगाम की घटना से बढ़ी चिंता

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हाल ही में एक दुखद घटना घटी। वहां आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकियों ने पहले दोनों का नाम और पहचान पूछी। इसके बाद उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं।



यह हमला कुलगाम के केलाम इलाके में हुआ था। इस घटना में सक्ती जिले के 24 वर्षीय दीपक रात्रे की मौत हो गई। वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना की भी जान चली गई। इस घटना ने बाहरी राज्यों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



श्रम विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े

श्रम विभाग (Labor Department) की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच 58 हजार से अधिक पंजीकरण हुए हैं। ये मजदूर महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, असम और पश्चिम बंगाल जा रहे हैं। इसके अलावा वे जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड भी काम की तलाश में पहुंचे हैं। इन राज्यों में मजदूर मुख्य रूप से निर्माण, फैक्ट्री और ईंट-भट्ठों में काम करते हैं। इसके साथ ही वे कृषि और अन्य असंगठित क्षेत्रों में भी मजदूरी करते हैं।



ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन के मुख्य कारण

ग्रामीण अंचलों में गैर-कृषि रोजगार की भारी कमी देखने को मिलती है। कृषि कार्य भी मुख्य रूप से मौसमी होता है। खरीफ की कटाई के बाद गांवों में काम मिलना लगभग बंद हो जाता है। इस वजह से मजदूर परिवार समेत दूसरे राज्यों का रुख करते हैं।



महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे औद्योगिक राज्यों में उन्हें अधिक मजदूरी मिलती है। वहां निर्माण और उद्योग क्षेत्रों में मजदूरों की मांग लगातार बनी रहती है। गांवों में सक्रिय ठेकेदारों का नेटवर्क भी पलायन को बढ़ावा देता है। रिश्तेदारी और बिचौलियों के माध्यम से हर साल यह सिलसिला दोहराया जाता है।



छत्तीसगढ़ में गहराया पलायन का संकट


संसद के आंकड़ों में स्थिति का खुलासा

संसद में दिए गए पुराने आंकड़ों में भी चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। राज्य गठन से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ से 10 लाख से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। यह आंकड़ा बिहार जैसे पारंपरिक पलायन वाले राज्यों से भी अधिक दर्ज किया गया था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में पलायन की समस्या कितनी पुरानी और गहरी है।



प्रमुख जिलों में स्थिति अत्यधिक गंभीर

राज्य के 33 जिलों में से कई प्रमुख जिलों में स्थिति बहुत चिंताजनक है। बिलासपुर और मुंगेली जिले से सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। बिलासपुर में 11 हजार से अधिक मजदूरों ने आवेदन दिया था। मुंगेली में भी 11 हजार से अधिक आवेदन दर्ज किए गए थे।



कागजातों की कमी के कारण कई आवेदन खारिज भी कर दिए जाते हैं। दस्तावेजों के अभाव में हजारों मजदूर पंजीकृत होने से वंचित रह जाते हैं। इससे उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने में परेशानी उठानी पड़ती है।



पंजीकरण प्रक्रिया और सरकारी दावे

श्रम विभाग में पंजीकरण कराने का एक विशेष उद्देश्य होता है। इसका मकसद विषम परिस्थितियों में श्रमिकों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है। कोविड-19 (COVID-19 – Coronavirus Disease 2019) के बाद पंजीकरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया गया है। पंजीकृत मजदूरों को दुर्घटना सहायता और बीमा का लाभ मिलता है।



उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने राज्य की स्थिति पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 3000 से अधिक नए उद्योग स्थापित किए गए हैं। इनसे 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। सरकार का दावा है कि बाहरी राज्यों में जाने वाले मजदूरों की संख्या में कमी आई है। नई उद्योग नीति के तहत स्थानीय मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जा रही है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ से मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन क्यों कर रहे हैं?
    उत्तर: स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार की कमी और कृषि कार्य का मौसमी होना मुख्य कारण है। इसके अलावा अन्य राज्यों में अधिक मजदूरी दर और निर्माण क्षेत्रों में निरंतर मांग के कारण मजदूर बाहर जाते हैं।
  2. कुलगाम में मारे गए छत्तीसगढ़ के मजदूर किन जिलों के निवासी थे?
    उत्तर: मृतकों में 24 वर्षीय दीपक रात्रे सक्ती जिले के बुंदेली गांव के निवासी थे। वहीं 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव के रहने वाले थे।
  3. श्रम विभाग में प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण क्यों कराया जाता है?
    उत्तर: पंजीकरण कराने का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में मजदूरों को सहायता प्रदान करना है। इससे उन्हें दुर्घटना सहायता, बीमा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल पाता है।

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