मोदी मंत्र दरकिनार, छत्तीसगढ़ मंत्रालय चमकाने के लिए खोला खजाना, फेडरेशन का सवाल, डीए क्यों नहीं?

VINAY VERMA | Jun 05, 2026, 15:28 IST
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छत्तीसगढ़ में मंत्रालय भवनों में हो रहे करोड़ों रुपये के रिनोवेशन कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फॉल्स सीलिंग बदलने, नई LED और स्मार्ट लाइटिंग लगाने जैसे कार्यों पर भारी खर्च के आरोप लग रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में पीएम मोदी के मंत्र को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। पीएम के खर्च कम करने की अपील दरकिनार कर करोड़ों का रिनोवेशन काम हो रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा महानदी भवन रायपुर और इंद्रावती भवन में बदली जा रही फॉल्स सीलिंग को लेकर है। जिसमें करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं।



इधर कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि जहां कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सरकार खामोश है, वहीं मंत्रालय को चमकाने के लिए खजाना खोल दिया गया है। इधर एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार का कहना है कि 88 करोड़ रुपए तो हमारा पूरा बजट है फिलहाल हम 27 करोड़ रुपए ही खर्च कर रहे हैं।



फॉल्स सीलिंग पर बहस

बताया जा रहा है कि मंत्रालय की कई जगहों पर लगी पुरानी फॉल्स सीलिंग खराब हो गई थी। कुछ हिस्सों में बारिश के दौरान पानी टपकने की शिकायतें भी आती थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर नई फॉल्स सीलिंग लगाने का काम शुरू किया गया है। लेकिन चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि फिजूलखर्ची पर रोक लगाने वाले अधिकारी मेंटेनेंस करवा काम क्यों नहीं चला रहे? सारा खेल पुराने डिजाइन को हटाकर आधुनिक डिजाइन की सीलिंग के लिए है, जिससे फीलिंग आए। इसके साथ ही नई एलईडी और स्मार्ट लाइटिंग व्यवस्था भी लगवाई जा रही है।



88 करोड़ का आंकड़ा बना चर्चा का केंद्र

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इस पूरे काम पर करीब 8 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा का कहना है कि अकेले इंद्रावती भवन में फॉल्स सीलिंग बदलने पर करीब 44 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। उनका दावा है कि महानदी भवन में भी इसी तरह का बड़ा खर्च स्वीकृत किया गया है। हालांकि सरकार की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक खर्च का सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है।



डीए के पैसे से सीलिंग लगवा रहे-कर्मचारी

रिनोवेशन को लेकर कर्मचारी संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार के पास करोड़ों रुपए उपलब्ध हैं तो कर्मचारियों के लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते पर फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा। कर्मचारियों का तर्क है कि जिस राशि से मंत्रालय की छतें सजाई जा रही हैं, उससे हजारों कर्मचारियों को राहत दी जा सकती थी।



मोदी की फिजूलखर्ची वाली नसीहत

मामले में कर्मचारी संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का भी हवाला दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले सार्वजनिक मंच से फिजूलखर्ची रोकने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की बात कही थी। अब कर्मचारी संगठन सवाल उठा रहे हैं कि जब देश में मितव्ययिता की बात हो रही है तो मंत्रालय में करोड़ों का सौंदर्यीकरण किस जरूरत के तहत किया जा रहा है।



कई और काम भी जारी

मंत्रालय में सिर्फ फॉल्स सीलिंग का काम नहीं हो रहा है। टॉयलेट अपग्रेडेशन, टाइल्स बदलने, कूलिंग सिस्टम सुधारने और फायर सेफ्टी सिस्टम को आधुनिक बनाने के काम भी चल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े प्रशासनिक परिसर में समय-समय पर रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड करना जरूरी होता है। इधर एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार का कहना है कि 88 करोड़ रुपए तो हमारा पूरा बजट है फिलहाल हम 27 करोड़ रुपए ही खर्च कर रहे हैं।



असली जरूरत या सरकारी शौक?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्रालय में हो रहा यह खर्च जरूरी रखरखाव है या फिर सरकारी तंत्र को चमकाने की कवायद? कर्मचारी संगठन इसे फिजूलखर्ची बता रहे हैं, जबकि विभागीय स्तर पर इसे अधोसंरचना उन्नयन की जरूरत बताया जा रहा है। लेकिन 88 करोड़ रुपए का आंकड़ा सामने आने के बाद यह मामला केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सरकारी प्राथमिकताओं की बहस बन गया है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ मंत्रालय भवनों में रिनोवेशन क्यों किया जा रहा है?
    महानदी और इंद्रावती भवन में फॉल्स सीलिंग बदलने, नई LED और स्मार्ट लाइटिंग लगाने, टॉयलेट अपग्रेडेशन, टाइल्स बदलने और फायर सेफ्टी सुधारने जैसे कार्य चल रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि यह जरूरी रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड का हिस्सा है।
  2. छत्तीसगढ़ रिनोवेशन पर कितने पैसे खर्च हो रहे हैं?
    कर्मचारी संगठनों के अनुसार अकेले फॉल्स सीलिंग बदलाव पर करीब 8-44 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि कुल बजट 88 करोड़ रुपये का है और फिलहाल 27 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।
  3. कर्मचारी संगठनों ने मंत्रालय रिनोवेशन पर क्या आपत्ति जताई है?
    कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार कर्मचारियों की लंबित मांगों और महंगाई भत्ते पर फैसला नहीं कर रही, जबकि मंत्रालय की छतों और इमारतों के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे वे फिजूलखर्ची मान रहे हैं।

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