मीसाबंदियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा दांव, हर महीने 25 हजार तक सम्मान राशि
RAIPUR : छत्तीसगढ़ सरकार ने मीसाबंदियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सम्मान अधिनियम में संशोधन कर पात्र लोगों का दायरा बढ़ा दिया है। अब केवल जेल में बंद रहे लोग ही नहीं, बल्कि आपातकाल के दौरान थानों में निरुद्ध किए गए लोगों को भी योजना का लाभ मिलेगा। सरकार ने इन्हें लोकतंत्र सेनानी मानते हुए सम्मान राशि और अन्य सुविधाएं देने का रास्ता साफ कर दिया है।
अब थाने में बंद रहे लोग भी होंगे पात्र
अब तक योजना का लाभ मुख्य रूप से उन लोगों को मिलता था जो आपातकाल के दौरान जेल भेजे गए थे। नए नियमों के बाद थानों में निरुद्ध रहे लोगों को भी पात्र माना जाएगा। इससे ऐसे कई लोग लाभ की सूची में शामिल हो जाएंगे जो वर्षों से खुद को उपेक्षित मान रहे थे। सरकार का मानना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई में जेल और थाने दोनों ही दमन के प्रतीक थे।
आपातकाल की याद फिर चर्चा में
देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किया गया था। यह अवधि 1977 तक चली थी। इस दौरान विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। कई लोगों को जेल भेजा गया। कई लोगों को थानों में भी निरुद्ध रखा गया। लोकतंत्र की बहाली के बाद ऐसे लोगों को लोकतंत्र सेनानी और मीसाबंदी के रूप में पहचान मिली।
अवधि के हिसाब से मिलेगा सम्मान
सरकार ने सम्मान राशि को निरुद्ध रहने की अवधि से जोड़ा है। कम अवधि और लंबी अवधि के लिए अलग-अलग राशि तय की गई है। इससे पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
एक माह तक बंद रहे तो 8 हजार रुपए
संशोधित नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक माह तक जेल या थाने में निरुद्ध रहा है तो उसे 8 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि मिलेगी। यह राशि नियमित रूप से प्रदान की जाएगी। इससे ऐसे लोगों को भी लाभ मिलेगा जिनकी निरुद्ध अवधि कम रही थी।
पांच माह तक रहे तो 15 हजार रुपए
यदि कोई व्यक्ति एक माह से अधिक और पांच माह तक निरुद्ध रहा है तो उसे 15 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। सरकार का कहना है कि संघर्ष की अवधि को ध्यान में रखकर यह वर्गीकरण किया गया है। इससे अलग-अलग मामलों में समानता लाने का प्रयास किया गया है।
लंबी कैद वालों को 25 हजार रुपए
सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने लंबी अवधि तक कारावास झेला था। ऐसे पात्र लोकतंत्र सेनानियों को हर महीने 25 हजार रुपए तक सम्मान राशि दी जाएगी। यह राशि पहले की तुलना में अधिक मानी जा रही है। इससे लंबे समय से मांग कर रहे संगठनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ पैसा नहीं, इलाज भी मिलेगा
सरकार ने योजना को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा है। पात्र लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों की तरह चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। बुजुर्ग हो चुके कई मीसाबंदियों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उनके लिए बड़ी चिंता बना हुआ था।
आवेदन के लिए सिर्फ 90 दिन
योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने समय सीमा भी तय कर दी है। अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन संबंधित जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा किए जाएंगे। तय समय के बाद आवेदन प्रक्रिया कठिन हो सकती है।
पुलिस का प्रमाण पत्र होगा जरूरी
आवेदन के साथ जिला पुलिस अधीक्षक का प्रमाण पत्र लगाना होगा। इस दस्तावेज से यह प्रमाणित होगा कि संबंधित व्यक्ति आपातकाल के दौरान निरुद्ध या कारावास में रहा था। बिना प्रमाण के दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद दस्तावेजों की जांच होगी।
प्रभारी मंत्री की समिति करेगी फैसला
सरकार ने प्रत्येक जिले में एक समिति बनाने का निर्णय लिया है। समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे। समिति आवेदनों की जांच करेगी। पात्र लोगों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद सम्मान राशि और सुविधाएं मंजूर की जाएंगी।
वर्षों पुरानी मांग पर लगी मुहर
लोकतंत्र सेनानी संगठन लंबे समय से सम्मान राशि बढ़ाने और चिकित्सा सुविधा देने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को सम्मान मिलना चाहिए। सरकार के नए फैसले को उसी मांग की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ी नजर आवेदन प्रक्रिया और पात्र लोगों की अंतिम सूची पर रहेगी।
TIMELINE
- 25 जून 1975 से 1977 तक: देश में आपातकाल की अवधि (जिस दौरान लोग जेल या थानों में निरुद्ध रहे)।
- अधिसूचना जारी होने से 90 दिनों के भीतर: जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन जमा करने की अंतिम समयावधि।
- आवेदन के तुरंत बाद (जांच प्रक्रिया): जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के प्रमाण पत्र का सत्यापन और प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता वाली जिला समिति द्वारा अंतिम सूची की मंजूरी।
- मंजूरी के बाद (हर महीने): अवधि के अनुसार मासिक सम्मान राशि (8 हजार, 15 हजार या 25 हजार) और चिकित्सा सुविधाओं का नियमित लाभ।
FAQ
- मीसाबंदी का क्या अर्थ है और यह शब्द कहाँ से आया?
A. आपातकाल के दौरान सरकार ने MISA (Maintenance of Internal Security Act - आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) कानून बनाया था। इस कड़े कानून के तहत बिना वारंट जेल में बंद किए गए लोगों को 'मीसाबंदी' कहा गया। - देश में आपातकाल (Emergency) कब से कब तक लागू था?
A. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, जो 21 मार्च 1977 तक (21 महीने) लागू रहा। - आपातकाल के समय भारत के राष्ट्रपति कौन थे?
A. फ़ख़रुद्दीन अली अहमद। उन्होंने ही प्रधानमंत्री के परामर्श पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। - लोकतंत्र सेनानी किन्हें कहा जाता है?
A. आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष करने वाले और जेल/थानों में प्रताड़ना झेलने वाले राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं को 'लोकतंत्र सेनानी' का दर्जा दिया गया है।
यह खबरें भी पढ़ें...
प्रशासनिक दौरों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार किराए पर लेगी अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर
छत्तीसगढ़ सरकार ने JSW इस्पात के लिए आसान किया रास्ता, 1.40 हेक्टेयर जमीन को बनाया संरक्षित वन
घर बैठे दूर होगी हर परेशानी : सीएम हेल्पलाइन 1076 शुरू करने की तैयारी में छत्तीसगढ़ सरकार