मिशन कर्मयोगी को रफ्तार देने बनी कमेटी, CS अध्यक्ष, GAD सचिव की मार्गदर्शक भूमिका
RAIPUR. छत्तीसगढ़ में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच मिशन कर्मयोगी को लेकर उत्साह कम दिख रहा है। प्रिशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने के बावजूद कई अधिकारी इन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
शासन चिंतित है कि अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो मिशन का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। यही वजह है कि अब मिशन को रफ्तार देने के लिए नई रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत राज्य स्तर पर एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो मिशन के क्रियान्वयन पर नजर रखेगी और विभागों के बीच समन्वय भी बनाएगी।
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क्या है मिशन कर्मयोगी
दरअसल छत्तीसगढ़ शासन प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों अपग्रेड करना चाह रही है। इसके लिए ऑफिस में कामकाज का तरीका सिखाया जा रहा है। ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर में फाइलों को बढ़ाने का तरीका बताया जा रहा। ई फाइल में टीप लिखना और विधानसभा के लिए सवाल जवाब बनाना शामिल है।
काम में तेजी लाने के लिए एआई के उपयोग भी सिखाया जा रहा है। इसके लिए देश के नामी संस्थानों से कोर्स तैयार करवाए गए हैं। जिसे ऑनलाइन पूरा किया जाना है। लेकिन अधिकारी-कर्मचारी इसमे रुचि नहीं ले रहे। इसके पीछे का कारण काम की अधिकता और अंग्रेजी मे कोर्स होना है। इसके लिए वीडियो कोर्स का ड्यूरेशन भी अधिकारी कर्मचारियेां को परेशान कर रहा।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी रणनीति
जीएडी ने छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता निर्माण क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। समिति में कई विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव सदस्य बनाए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मिशन में मार्गदर्शन देंगे।
17 मार्च को पहली बैठक
समिति के गठन के साथ ही इसकी पहली बैठक की तारीख भी तय कर दी गई है। यह बैठक 17 मार्च को शाम 4 बजे मंत्रालय में होगी। बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी। इसे हाइब्रिड मोड में रखा गया है। यानी कुछ अधिकारी मंत्रालय में मौजूद रहेंगे और कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। इस बैठक में मिशन कर्मयोगी में अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा होगी।
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डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म की होगी समीक्षा
बैठक का प्रमुख एजेंडा कोर्स की समीक्षा करना है। राज्य के कितने सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में समन्वय की कमी भी सामने आई है। बैठक में इस कमी को दूर करने के उपायों पर भी चर्चा होगी। सरकार चाहती है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रभाव सीधे प्रशासनिक कामकाज में दिखाई दे।