छत्तीसगढ़ में अफसरों ने दबा दी नई सहकारिता नीति, 2047 का विजन अधर में...
समझें क्या है पूरा मामला
- राष्ट्रीय सहकारिता नीति पर छत्तीसगढ़ में अमल शुरू नहीं
- 2047 तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलने का है राष्ट्रीय लक्ष्य
- हर पंचायत में सहकारी संस्था बनाने का है प्रावधान
- कृषि के साथ पर्यटन, टैक्सी, स्वास्थ्य और ग्रीन एनर्जी भी जुड़ेंगे
- राज्य में नीति पर कार्रवाई नहीं होने से योजनाएं अटकीं
राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 फाइलों में कैद
अमित शाह की सबसे महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 छत्तीसगढ़ में फाइलों में कैद है। केंद्र ने गांवों की अर्थव्यवस्था बदलने का ब्लूप्रिंट तैयार कर दिया। लेकिन राज्य में नीति को जमीन पर उतारने की रफ्तार बेहद धीमी है। इसी कारण से पिछले साल से आई यह राष्ट्रीय नीति लागू होना तो दूर, अभी तक किसी ने इसे देखा तक नहीं। विधानसभा में इसे सदन के पटल पर रखने की चर्चा होती है लेकिन हकीकत तो यह है कि अधिकारी अब तक नीति का अध्ययन ही पूरा नहीं कर पाए हैं।
2047 का विजन, लेकिन शुरुआत ही नहीं
केंद्र सरकार ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर नई सहकारिता नीति बनाई है। दावा सहकार से समृद्धि का सपना पूरा करना है। लक्ष्य दिया गया है कि गांव का हर परिवार सहकारिता से जुड़े। किसान उद्यमी बने। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो। लेकिन छत्तीसगढ़ में इस दिशा में अपेक्षित पहल अब तक दिखाई नहीं दे रही।
गांव से ग्लोबल बाजार तक की तैयारी फेल
नई नीति केवल सहकारी समितियां बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें किसानों को बिचौलियों से मुक्त कराने की योजना है। सहकारी संस्थाएं सीधे खरीद करेंगी। उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि से आगे कैसे बढ़ेगी सहकारिता?
नई नीति में सहकारिता का दायरा काफी बड़ा किया गया है। अब केवल कृषि और डेयरी नहीं। टैक्सी सेवा, पर्यटन, बीमा, स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी गांवों में नए रोजगार और नए कारोबार की संभावनाएं तैयार होंगी।
पंचायत में समिति, मॉडल गांव कब बनेगा
राष्ट्रीय सहकारिता नीति के तहत हर पंचायत में कम से कम एक सहकारी इकाई बनाने का लक्ष्य रखा गया है। हर तहसील में पांच मॉडल सहकारी गांव विकसित किए जाएंगे। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। समितियों का डिजिटलीकरण होगा। प्रबंधन को पेशेवर बनाया जाएगा। लेकिन राज्य में इन लक्ष्यों की दिशा में ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही।
सहकारिता विश्वविद्यालय भी तैयार
केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना भी कर दी है। संसद से कानून पारित होने के बाद अप्रैल 2025 से विश्वविद्यालय ने काम शुरू कर दिया। नए एमबीए पाठ्यक्रम शुरू हुए। प्रशासनिक ढांचा तैयार हुआ। गुजरात में नए परिसर का निर्माण भी शुरू हो गया। यानी केंद्र प्रशिक्षण और मानव संसाधन तैयार कर रहा है, लेकिन राज्यों में क्रियान्वयन की रफ्तार समान नहीं दिख रही।
पैक्स कर्मियों को मिला प्रशिक्षण?
दावा है कि सहकारिता मंत्रालय ने एनसीसीटी और सीएससी के माध्यम से देशभर में 30 हजार से ज्यादा पैक्स सचिवों और ऑपरेटरों को प्रशिक्षण दिया। 25 राज्यों के 564 जिलों में 648 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उद्देश्य था कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां 300 से ज्यादा डिजिटल सेवाएं देकर अपनी आय बढ़ाएं। इससे स्पष्ट है कि केंद्र नीति को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी कर चुका है। लेकिन उसका लाभ नहीं मिल रहा। देरी होगी तो सारी ट्रेनिंग बेकार हो जाएगी।
अब सवाल अफसरों से
छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। यदि समय पर इसे लागू किया जाता है तो गांवों में रोजगार, उद्यमिता और आय बढ़ सकती है। लेकिन यदि नीति लंबे समय तक फाइलों में ही दबी रही तो 2047 के लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ में नई सहकारिता नीति लागू होने में देरी क्यों हो रही है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
FAQ
- राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर और ग्रामीण परिवारों को उद्यमी बनाना है। इसके जरिए सहकार से समृद्धि के विजन को पूरा किया जाएगा। - छत्तीसगढ़ में इस नीति के लागू होने में क्या दिक्कत आ रही है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारी पिछले एक साल से इस नीति का केवल अध्ययन ही कर रहे हैं। इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह नीति अभी तक फाइलों में ही कैद है। - नई सहकारिता नीति में खेती के अलावा कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
उत्तर: इसमें खेती के अलावा पर्यटन, टैक्सी सेवा, स्वास्थ्य, बीमा, ग्रीन एनर्जी और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
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