NEET-PG काउंसिलिंग में बड़ा दांव, दूसरे राउंड में सीट छोड़ी तो 2 लाख की सिक्योरिटी जब्त, 50 लाख तक का बॉन्ड भी भरना होगा
दूसरे राउंड या उसके बाद सीट मिलने पर प्रवेश नहीं लेने अथवा दाखिला लेकर सीट छोड़ने की स्थिति में पूरी सुरक्षा निधि जब्त हो सकती है। निजी कॉलेजों की सीटों के लिए उम्मीदवारों को 2 लाख रूपए तक की सिक्योरिटी जमा करनी होगी। वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वालों पर पढ़ाई पूरी करने के बाद दो साल तक सरकारी सेवा करने की शर्त भी लागू होगी।
22 अक्टूबर से आवेदन शुरू
संचालनालय चिकित्सा शिक्षा की अधिसूचना क्रमांक 1686/छात्र/काउंसिलिंग/संचिशि/2026 के मुताबिक, पहले चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 22 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से 27 अक्टूबर को रात 11:59 बजे तक किए जा सकेंगे। च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग की सुविधा 28 अक्टूबर को रात 11:59 बजे तक रहेगी। आवेदन पूरा करने और लॉक करने के बाद भी 27 अक्टूबर तक बिना अतिरिक्त शुल्क के संशोधन किया जा सकेगा। आवेदन शुल्क सभी सामान्य श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए 2,000 रूपए और NRI कोटे के लिए 10,000 रूपए तय किया गया है। यह शुल्क वापस नहीं होगा।
दो लाख रूपए तक जमा करना होगा
सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि उम्मीदवार किन कॉलेजों की सीटों के लिए विकल्प भर रहा है। केवल सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 25,000 रूपए और SC, ST तथा OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 12,500 रूपए जमा करने होंगे। सरकारी और निजी, दोनों तरह के कॉलेजों के विकल्प भरने पर इन सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए सुरक्षा निधि 2 लाख रूपए होगी। यह राशि निर्धारित नियमों के अधीन वापस की जा सकती है। भुगतान उम्मीदवार को अपने या माता-पिता अथवा अभिभावक के बैंक खाते से ही करना होगा। रिफंड के लिए एक सक्रिय वैकल्पिक बैंक खाता देना भी जरूरी है।
दूसरे राउंड में जोखिम ज्यादा
पहले चरण में सीट मिलने के बाद उम्मीदवार को प्रवेश लेने या नियमानुसार फ्री एग्जिट का विकल्प मिलेगा। लेकिन दूसरे चरण या उसके बाद किसी सरकारी अथवा निजी कॉलेज में सीट आवंटित होने के बाद प्रवेश नहीं लेने या प्रवेश लेकर सीट छोड़ने पर पूरी सुरक्षा निधि जब्त हो सकती है। यानी, केवल विकल्प भरने या सीट मिलने के फैसले को हल्के में लेना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
सरकारी नौकरी का बॉन्ड भी
सरकारी मेडिकल कॉलेज से पीजी करने वाले अभ्यर्थियों को पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन दो साल तक अनिवार्य सरकारी सेवा करनी होगी। इसके लिए अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का बॉन्ड 50 लाख रूपए और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का 40 लाख रूपए का है। निर्धारित अंतिम प्रवेश तिथि के बाद सीट छोड़ने पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 25 लाख रूपए और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 20 लाख रूपए देने होंगे। पहले दाखिला लेकर सीट छोड़ने या निष्कासित होने वाले अभ्यर्थियों पर आगामी तीन साल तक राज्य में पीजी प्रवेश के लिए अपात्रता का नियम भी लागू होगा।
सीटों का गणित समझना जरूरी
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटे की 50 प्रतिशत सीटें अलग होने के बाद शेष राज्य कोटे की सीटें छत्तीसगढ़ से MBBS पास उम्मीदवारों और पात्र सेवारत डॉक्टरों के लिए हैं। निजी कॉलेजों में 15 प्रतिशत सीटें NRI कोटे के लिए रखी गई हैं। बाकी सीटों में 50 प्रतिशत संस्थागत कोटे और 50 प्रतिशत ओपन कोटे के लिए होंगी। संस्थागत कोटे में राज्य के MBBS उत्तीर्ण उम्मीदवारों और पात्र सेवारत डॉक्टरों को अवसर मिलेगा, जबकि ओपन कोटे में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे। ओपन सीटों पर भी राज्य में लागू श्रेणीवार आरक्षण प्रभावी रहेगा।
सेवारत डॉक्टरों को बोनस अंक
दुर्गम अनुसूचित क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को प्रति वर्ष 10 प्रतिशत और सामान्य अनुसूचित क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को प्रति वर्ष 3 प्रतिशत बोनस अंक मिलेंगे। इसकी अधिकतम सीमा प्रवेश परीक्षा के कुल प्राप्तांकों का 30 प्रतिशत है। इसके लिए DME या DHS के सक्षम प्राधिकारी का सेवा प्रमाण-पत्र अपलोड करना होगा। EWS का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा, जिन्होंने NEET PG-2026 के परीक्षा फॉर्म में EWS श्रेणी चुनी थी। काउंसलिंग के दौरान श्रेणी बदलने की अनुमति नहीं होगी। आवेदन और काउंसलिंग संबंधी जानकारी के लिए उम्मीदवार http://www.cgdme.in और cgdme.admissions.nic.in पर जा सकते हैं।