बीजेपी नेता की कंपनी ने बनाया विधानसभा भवन, दो समितियों के बाद भी नहीं थमा रिसाव

The Sootr | Aug 06, 2026, 20:33 IST
विधानसभा भवन निर्माण विवाद
रायपुर में 324 करोड़ की लागत से बने नए छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मानसून की बारिश में छत से सीपेज, फॉल्स सीलिंग गिरने और तकनीकी खामियों ने निर्माण कार्य की पोल खोल दी।

Raipur. 324 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बना छत्तीसगढ़ का नया विधानसभा भवन अपनी भव्यता के स्थान पर घटिया निर्माण, सीपेज और बदहाली को लेकर विवादों के केंद्र में है।



करीब 52 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर का आधिकारिक उद्घाटन 9 महीने पहले हुआ था। बजट सत्र के दौरान ही इसकी पोल खुलनी शुरू हो गई थी। इतनी बड़ी लागत से किया गया यह घटिया निर्माण कोरबा के बीजेपी नेता की कंपनी ने किया है, जिसके बनाए गए कई भवन और स्टेडियम पहले ही सवालों के घेरे में आ चुके हैं।



सत्र के शुरुआती दिनों से ही सदन के भीतर गूंज, साउंड सिस्टम की तकनीकी खराबी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग डिस्प्ले में ग्लिच, दिशा-सूचक बोर्ड्स की कमी और फिनिशिंग के अधूरे काम सामने आए। इन कमियों को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावों और दो-दो उच्चस्तरीय कमेटियों के गठन के बावजूद मानसून की पहली ही बारिश ने निर्माण की पूरी हकीकत उजागर कर दी।



दो-दो कमेटियां फिर भी नहीं सुधरे हालात

बजट सत्र में सामने आई अव्यवस्थाओं के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दो अलग-अलग समीक्षा समितियों का गठन किया था। सात सदस्यीय सदस्यीय तकनीकी समिति पीडब्लूडी सचिव के नेतृत्व और विधानसभा के प्रमुख सचिव के समन्वय में बनाई गई। इस समिति में एनआरडीए, चिप्स और पीडब्लूडी और भवन निर्माण शाखा के चीफ इंजीनियर और इलेक्ट्रॉनिक्स व अन्य विशेषज्ञ शामिल किए गए थे।



समिति को साउंड, माइक, डिजिटल वोटिंग और फिनिशिंग का ऑडिट कर 15 दिनों में रिपोर्ट देनी थी। समिति ने निर्माण में उपयोग की गई सामग्री (जिप्सम बोर्ड, सीलिंग हैंगर्स) और वॉटरप्रूफिंग की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं।



वहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक की अध्यक्षता में 5 वरिष्ठ विधायकों की सर्वदलीय समिति बनाई गई थी। इसे 15 जुलाई तक (मानसून सत्र से 15 दिन पहले) विधायकों की बैठक व्यवस्था, साउंड पैनल्स, माइक सुगमता, भोजन, विश्राम कक्ष और गैलरी सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया था।



समिति की सिफारिशों पर मुख्य सदन में साउंड-ऐब्जॉर्बर पैनल्स लगाए गए और सॉफ्टवेयर दुरुस्त किए गए, लेकिन मानसून की पहली बारिश होते ही प्रशासनिक ब्लॉक और समिति कक्ष के पास छत से भारी सीपेज (पानी का रिसाव) हुआ और फॉल्स सीलिंग भरभरा कर नीचे गिर गई। इसने दोनों कमेटियों की रिपोर्ट और पीडब्लूडी के सुधार के दावों की हवा निकाल दी।



बीजेपी नेता की कंपनी पर लगे आरोप

324 करोड़ रुपए के इस नए विधानसभा भवन का आधा-अधूरा और गुणवत्ताहीन निर्माण कोरबा की ठेकेदार कंपनी द्वारा किया गया है। यह कंपनी कोरबा के बीजेपी नेता की बताई जा रही है, जो पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। राजनीतिक रसूख के दम पर कंपनी को इतना बड़ा ठेका सौंपने और घटिया निर्माण के बावजूद ढिलाई बरतने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।



हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब इस कंपनी के निर्माण कार्यों पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी कंपनी के कई प्रोजेक्ट्स हादसों और बदहाली का शिकार हो चुके हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट परिसर में इस कंपनी द्वारा निर्मित एक नई बिल्डिंग की छत पहले ही गिर चुकी है। यह एक बड़ा हादसा था। वहीं बिलासपुर के बहतराई में बना स्टेडियम उद्घाटन के पहले दिन से ही खिलाड़ियों के खेलने लायक नहीं रहा और अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।



जनता के पैसों की बर्बादी

324 करोड़ रुपए की लागत से बने राज्य के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंदिर में सीपेज, घटिया वॉटरप्रूफिंग और गिरती फॉल्स सीलिंग ने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। मानसून सत्र ख़त्म होने के दो दिन बाद ही लगातार फाल सीलिंग गिरने का मामला सामने आया था। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। विधानसभा की और से केवल पीडब्लूडी को लेटर लिखकर ठीक करने के लिए कह दिया गया था। इसके अलावा उस पूरे घटनाक्रम पर कोई एक्शन नहीं हुआ।



ये खबरें भी पढ़ें...

नए विधानसभा भवन की फॉल सीलिंग गिरी, उपयोगिता प्रमाण पत्र पर भी सवाल



घटिया निर्माण देख भड़के केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, बिना उद्घाटन लौटे



बिलासपुर फोरलेन सड़क का घटिया निर्माण, चार साल में आई दरारें



शाजापुर में एसडीएम कार्यालय का घटिया निर्माण, हाथ लगाते ही गिरने लगा प्लास्टर, टीम ने पकड़ी गड़बड़ी



Tags:
  • Raipur
  • घटिया निर्माण
  • छत्तीसगढ़ का नया विधानसभा भवन
  • विधानसभा भवन