अब गिरफ्तारी से गवाही तक होगी वीडियो रिकॉर्डिंग, छत्तीसगढ़ में लागू हुए नए डिजिटल नियम
गृह (पुलिस) विभाग ने नए नियम अधिसूचित किए हैं। इनका नाम 'छत्तीसगढ़ श्रव्य-दृश्य रिकॉर्डिंग साधन नियम, 2026' है। ये नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत बनाए गए हैं। इनका मकसद जांच के सबूत सुरक्षित रखना है। साथ ही पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी है।
गिरफ्तारी से गवाह के बयान तक डिजिटल रिकॉर्ड
नए नियमों में कई ऐसी प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है, जिनमें अब इलेक्ट्रॉनिक और श्रव्य-दृश्य साधनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इनमें गिरफ्तारी की सूचना देना, अपराध से जुड़ी जानकारी भेजना और मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज कराने और उनसे संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी इन साधनों का इस्तेमाल होगा। अपराध की पहली सूचना देने वाले व्यक्ति को की गई कार्रवाई की जानकारी देने और संपत्ति से जुड़े विवरण के लिए फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी इन नियमों के दायरे में रखी गई है।
यौन अपराधों में भी होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
महिलाओं से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में भी डिजिटल रिकॉर्डिंग को महत्व दिया गया है। किसी महिला की ओर से यौन अपराध के संबंध में दी गई सूचना के अभिलेखन की वीडियो रिकॉर्डिंग का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, साक्षी संरक्षण से जुड़े आवेदनों पर होने वाली सुनवाई में भी श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों का उपयोग किया जा सकेगा।
इससे ऐसी कानूनी प्रक्रियाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का रास्ता खुलेगा। हालांकि, रिकॉर्डिंग और उसके इस्तेमाल की वास्तविक प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगी।
मोबाइल, CCTV और AI भी नियमों में शामिल
सरकार ने डिजिटल साधनों की परिभाषा केवल वीडियो कैमरे या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक सीमित नहीं रखी है। इसमें मोबाइल फोन, टेलीफोन, ई-मेल, इंटरनेट, फैक्स, डेस्कटॉप, लैपटॉप, प्रिंटर, कैमरे, माइक्रोफोन, स्पीकर और डिस्प्ले यूनिट जैसे उपकरण शामिल हैं।
इसके साथ ही CCTV, सुरक्षित डिजिटल इंटरफेस, AI आधारित सिस्टम और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों को भी जगह दी गई है। यानी आपराधिक न्याय प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक संचार और रिकॉर्डिंग के साधनों का दायरा काफी व्यापक रखा गया है।
अब कार्रवाई का रिकॉर्ड भी होगा अहम
इन नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आपराधिक मामलों में केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ा रिकॉर्ड तैयार करना भी अहम होगा। डिजिटल माध्यमों के व्यवस्थित इस्तेमाल से जांच और कानूनी प्रक्रियाओं का दस्तावेजीकरण बेहतर हो सकता है। इससे बाद में किसी कार्रवाई, सूचना या बयान को लेकर उठने वाले सवालों की जांच में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, नियम लागू होने के साथ यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और जांच एजेंसियां रिकॉर्डिंग की गुणवत्ता, डिजिटल डेटा की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए किस तरह की व्यवस्था बनाती हैं।
गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना
यह अधिसूचना गृह (पुलिस) विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर की ओर से जारी की गई है। राज्यपाल के नाम से और उनके आदेशानुसार विभाग की उप सचिव अंकिता गर्ग ने इसे जारी किया है।
अधिसूचना में BNSS, 2023 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (क) के तहत मिली शक्तियों का उल्लेख किया गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही छत्तीसगढ़ श्रव्य-दृश्य रिकॉर्डिंग साधन नियम, 2026 प्रभावी हो गए हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
पुलिस कार्रवाई और गवाहों के बयान का वीडियो रिकॉर्ड होने से जांच में पारदर्शिता बढ़ सकती है। इससे गिरफ्तारी, तलाशी और बयान पर उठने वाले सवालों की जांच आसान हो सकती है। आम नागरिकों के लिए यह न्याय प्रक्रिया में भरोसे और जवाबदेही से जुड़ा बदलाव है।