33 दिन की तनख्वाह पर सरकार खामोश, NHM कर्मियों ने 1076 पर खोला मोर्चा
प्रदेश स्तरीय मंच से सरकारी घोषणा होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग फाइल दबाकर बैठा रहता है। इस वजह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 18 हजार कर्मचारी 33 दिन के वेतन का इंतजार कर रहे हैं। घोषणा को एक माह से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन आदेश जारी नहीं हुआ। नतीजा यह है कि प्रदेशभर के कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। अब यह नाराजगी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तक पहुंच गई है। कर्मचारियों ने वादा दिलाते हुए जल्द वेतन मांगा है।
मंच से वादा, जमीन पर इंतजार
रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में CM, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हजारों NHM कर्मचारियों के सामने 33 दिन की हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा की गई थी। कर्मचारियों ने इसे सरकार का भरोसा माना था। उम्मीद थी कि कुछ दिनों में आदेश निकल जाएगा। लेकिन एक महीने बाद भी हालात जस के तस हैं।
EC बैठक भी नहीं दे सकी राहत
कर्मचारियों की उम्मीद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्थायी निकाय समिति (EC) की बैठक से भी थी। लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी। बैठक में 33 दिन के वेतन, नई HR पॉलिसी, चिकित्सा परिचर्या नियम, मेडिकल अवकाश के जिला स्तर पर अनुमोदन और वेतन वृद्धि जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन आदेश कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
1076 पर शिकायतों की बाढ़
सरकारी दफ्तरों से जवाब नहीं मिला तो कर्मचारियों ने दूसरा रास्ता चुना। प्रदेशभर के NHM कर्मियों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब सरकार खुद घोषणा कर चुकी है तो फिर आदेश जारी करने में देरी क्यों हो रही है? उनका आरोप है कि फैसलों को जानबूझकर टाला जा रहा है। अब हर जिले से शिकायतें दर्ज होने लगी हैं और हेल्पलाइन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है असर
NHM कर्मचारी सिर्फ वेतन की बात नहीं कर रहे। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही। नई HR पॉलिसी, सेवा नियम, मेडिकल लीव और वेतन वृद्धि जैसे मुद्दे वर्षों से लंबित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। फिलहाल कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन धैर्य की भी एक सीमा होती है।
सरकार की साख पर सवाल
सरकार ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की। कर्मचारियों ने उस पर भरोसा किया। लेकिन जब घोषणा के बाद आदेश ही नहीं निकला तो सवाल सरकार की कार्यशैली पर उठने लगे हैं। कर्मचारी पूछ रहे हैं कि यदि घोषणा लागू नहीं करनी थी तो फिर मंच से वादा क्यों किया गया? प्रशासनिक देरी अब सरकार की साख पर भी असर डाल रही है। विपक्ष को भी सरकार को घेरने का नया मुद्दा मिल सकता है।
अब फैसले की घड़ी
NHM कर्मचारी (nhm employees) साफ कह रहे हैं कि उनकी मांग नई नहीं है। सरकार खुद इसे स्वीकार कर चुकी है। अब सिर्फ आदेश और भुगतान बाकी है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही 33 दिन की हड़ताल अवधि का वेतन जारी नहीं किया गया और लंबित मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अगली रणनीति तय करेंगे। सरकार के सामने अब चुनौती सिर्फ वेतन देने की नहीं, बल्कि अपने वादे पर भरोसा कायम रखने की भी है।
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