नियद नेल्ला नार योजना 2.0: बस्तर के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से मिल रही आत्मनिर्भरता की नई राह

The Sootr | Oct 29, 2026, 18:23 IST
Impact Feature
Raipur. छत्तीसगढ़ के बस्तर में युवाओं को हुनर सिखाकर रोजगार से जोड़ने की कोशिशें तेज हुई हैं। नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे इलाकों में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और बेहतर जीवन जी सकें।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार युवाओं को रोजगार और अपना काम शुरू करने के अवसर देने पर जोर दे रही है।



बस्तर संभाग में अब तक आत्मसमर्पण करने वाले कुल 7 हजार 567 माओवादियों में से 2 हजार 323 को अलग-अलग कामों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह प्रशिक्षण बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में दिया गया है।



युवाओं को बिजली का काम, राजमिस्त्री, सोलर पैनल लगाने, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की मरम्मत व सिलाई मशीन चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इन कामों को सीखकर युवा नौकरी पाने के साथ अपना काम भी शुरू कर सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि सरेंडर करने वाले युवाओं को कमाई के साधन मिलें और वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें।



1.11 लाख युवाओं को ट्रेनिंग, 50 हजार को रोजगार

बस्तर के दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रही नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के तहत 10 जिलों में अब तक 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है, इनमें से 50 हजार 53 युवाओं को रोजगार मिला है। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में से 1 हजार 267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 461 युवा अभी प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहीं, नक्सल हिंसा से प्रभावित 779 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 191 लोग फिलहाल प्रशिक्षण ले रहे हैं। योजना का उद्देश्य प्रभावित परिवारों के युवाओं को काम सीखने, कमाई करने और विकास के नए अवसरों से जोड़ना है।



नियद नेल्ला नार योजना 2.0

कहीं सिलाई का काम तो कहीं सुरक्षा में रोजगार

प्रशिक्षण के बाद युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। बीजापुर जिले में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को हितग्राही गारमेंट Factory (फैक्ट्री), राजमिस्त्री और सिलाई के काम में अवसर मिले हैं। कुछ युवा अपना सिलाई का काम भी कर रहे हैं। बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, खेती और मजदूरी के कामों से जोड़ा गया है। इन प्रयासों का मकसद युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के योग्य बनाना है।



नियद नेल्ला नार योजना 2.0

6 पुनर्वास केंद्रों में मिलेगा व्यावसायिक प्रशिक्षण

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने वाले केंद्र के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले के केंद्र शामिल हैं। इससे इन केंद्रों में रहने वाले युवाओं को व्यवस्थित तरीके से काम सीखने और रोजगार के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी।



नियद नेल्ला नार योजना 2.0

आधार कार्ड के नियम में भी दी गई है छूट

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में छूट दी गई है। अब प्रशिक्षण के लिए शुरुआती पंजीयन के समय आधार कार्ड देना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, मूल्यांकन से पहले आधार कार्ड देना अनिवार्य रहेगा। इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि दस्तावेजों की कमी के कारण कोई पात्र युवा प्रशिक्षण से वंचित न रह जाए।



नियद नेल्ला नार योजना 2.0

हर विकासखंड में खुलेगा प्रशिक्षण केंद्र

बस्तर के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही प्रशिक्षण मिल सके, इसके लिए हर विकासखंड में एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र (स्किल डेवलपमेंट सेंटर) स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बीजापुर जिले में ऐसे ही एक केंद्र के तहत राजमिस्त्री के सहायक का काम सीखने के लिए 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है।



नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से 780 लाख रुपए यानी 7 करोड़ 80 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण लेने में सुविधा होगी।



नियद नेल्ला नार योजना 2.0

हुनर और रोजगार से मजबूत होगा बस्तर का भविष्य

बस्तर में कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास के ये प्रयास युवाओं को कमाई के अवसर देने के साथ उन्हें समाज से जुड़ने का रास्ता भी दे रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के युवाओं को काम सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।



हुनर सीखने और रोजगार मिलने से युवा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं और सम्मान के साथ जीवन जी सकते हैं। इस पहल के जरिए बस्तर में शांति, भरोसे और विकास का माहौल मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।



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