छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना की नई पहल ; नो लोकल स्टोरेज मॉडल से डेटा सुरक्षा पर जोर
NEWS IN SHORT
- नो लोकल स्टोरेज से डेटा मोबाइल में सेव नहीं रहेगा।
- डेटा सीधे सुपरवाइजर और फिर सुरक्षित सर्वर पर जाएगा।
- 6-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम से साइबर खतरे कम होंगे।
- इंटरनेट ऑन होते ही डेटा स्वतः ट्रांसफर हो जाएगा।
- हर कर्मी को 200 परिवारों की गणना का लक्ष्य।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना को लेकर राज्य प्रशासन ने डिजिटल तकनीक के उपयोग में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल मोड में हो रही जनगणना के तहत छत्तीसगढ़ में ‘नो लोकल स्टोरेज’ मॉडल लागू किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखना और किसी भी प्रकार के साइबर खतरे या डेटा लीक की संभावना को खत्म करना है।
6-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम
राज्य के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था को 6-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम के तहत तैयार किया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी स्तर पर—चाहे वह फील्ड कर्मी हो या सुपरवाइजर—किसी के मोबाइल या डिवाइस में नागरिकों का डेटा स्थायी रूप से स्टोर नहीं रहेगा।
पहला चरण 1 मई से
छत्तीसगढ़ में जनगणना का पहला चरण 1 मई से शुरू होगा, जिसमें मकानों की सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए फील्ड में तैनात जनगणना कर्मियों को विशेष मोबाइल एप दिया गया है, जिसमें वे घर-घर जाकर 33 बिंदुओं पर जानकारी दर्ज करेंगे। डेटा एंट्री प्रक्रिया के दौरान इंटरनेट बंद रखना अनिवार्य होगा, ताकि जानकारी सुरक्षित तरीके से दर्ज की जा सके।
इस प्रणाली के अनुसार, जैसे ही जनगणना कर्मी कुछ घरों का डेटा पूरा कर इंटरनेट ऑन करेंगे, वह जानकारी स्वतः सुपरवाइजर के मोबाइल में ट्रांसफर हो जाएगी और साथ ही कर्मी के मोबाइल से तुरंत डिलीट हो जाएगी। इसी तरह जब सुपरवाइजर उस डेटा को राज्य या केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करेगा, तो वह उनके डिवाइस से भी पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
डेटा सरकारी क्लाउड सर्वर पर ही संरक्षित
इस व्यवस्था के चलते छत्तीसगढ़ में जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी मोबाइल या डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच हो भी जाती है, तब भी उसमें किसी नागरिक की निजी जानकारी उपलब्ध नहीं होगी। पूरा डेटा केवल सुरक्षित सरकारी क्लाउड सर्वर पर ही संरक्षित रहेगा।
200 परिवारों का सर्वे करने का लक्ष्य
प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का सर्वे करने का लक्ष्य दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन कम से कम 20 परिवारों की जानकारी दर्ज करें। इसके लिए सभी कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया है ताकि डिजिटल प्रणाली का सही और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
दूसरा चरण में प्रक्रिया डिजिटल
छत्तीसगढ़ में जनगणना का दूसरा चरण फरवरी में प्रस्तावित है, जिसमें प्रत्येक परिवार के सदस्यों की विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में भी पूरी प्रक्रिया डिजिटल और सुरक्षित प्रणाली के तहत ही संचालित होगी।
राज्य प्रशासन का मानना है कि यह ‘नो लोकल स्टोरेज’ मॉडल छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक नई पहचान देगा। इससे न केवल डेटा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जनगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली राज्य में डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक बड़ा सुधार है, जो भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं और डाटा प्रबंधन प्रणाली के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में शुरू हो रही डिजिटल जनगणना में ‘नो लोकल स्टोरेज’ मॉडल और 6-लेयर सुरक्षा व्यवस्था से डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यह प्रणाली साइबर खतरे और डेटा लीक की आशंका को लगभग समाप्त करती है, जिससे जनगणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनती है।
यह खबरें भी पढ़ें...
स्व-जनगणना में फर्जीवाड़े से बचने का अलर्ट, सरकार ने जारी की चेतावनी
भोपाल-इंदौर मेट्रो रीजन का ब्लूप्रिंट रुका: अब जनगणना तय करेगी विकास की दिशा
जनगणना में तैनात 1.60 लाख कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगाने की तैयारी, सरकार को लिखा पत्र
जनगणना 2027 के दौरान गलत जानकारी देने पर लगेगा जुर्माना, ये है गाइडलाइन