सरकारी योजना पर लापरवाही की मार, कृषक केंद्र में पड़ी-पड़ी सड़ गई लाखों की दवा और खाद
गरियाबंद। जिले केनागाबुड़ास्थित कृषक सूचना केंद्र में लाखों रुपये कीकीटनाशक,फफूंदनाशक, जैविक खाद औरकल्चरलंबे समय तक बंद कमरे में पड़ी-पड़ी सड़ गई।
पढ़ें: महादेव सट्टा केस: गोविंद केडिया की जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज,ED ने बताई प्रमोटर की भूमिका
गांव के बाहर फेंकी सामग्री
हालत यह हो गई कि सामग्री से बदबू फैलने लगी और भवन खुद जर्जर होने लगा। स्थिति बिगड़ने पर ग्राम पंचायत ने इसेट्रैक्टरमें लादकर गांव के बाहर फिंकवा दिया।
प्रदर्शनी योजना से हुई थी खरीदी
जानकारी के मुताबिक यह कृषि सामग्री किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी योजना के तहत खरीदी गई थी। लेकिन जिलामुख्यालयसेमहज6किमीदूर स्थित इस केंद्र में कई साल तक धूल खाती पड़ी रही और आखिरकार अनुपयोगी हो गई।
पढ़ें: कुशाभाऊ ठाकरे यूनिवर्सिटी में एडमिशन का अंतिम मौका, 14 अगस्त तक ले सकते हैं सीधा प्रवेश
बारिश में बर्बाद हुईं दवाएं
नागाबुड़ाकेउपसरपंचतोमससाहू ने बताया कि बारिश के चलते दवाओं में सड़न शुरू हो गई थी। कमरे का दरवाजा खराब हो चुका था और आसपास के क्षेत्र में बदबू फैलने लगी थी। पास ही स्थितउपस्वास्थ्यकेंद्र आने वाले लोग भी परेशान थे।
पढ़ें: सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, बीजापुर में 9 नक्सलियों का सरेंडर
पत्र लिखा लेकिन नतीजा सिफर
कई बार प्रशासन को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकारगांववालोंसे सहमति बनाकर इन दवाओं को गांव के बाहर फेंक दिया गया। ताकि बदबू और गंदगी से निजात मिले और भवन का सही उपयोग हो सके।
खबर को पांच प्वॉइंट में समझिए
|
पढ़ें: साइबर ठगों ने अपनाया ठगी का नया तरीका, फाइल डाउनलोड करते ही कारोबारी का अकाउंट खाली
किसानों को फ्री में बांटी जानी थी सामग्री
बताया जा रहा है कि फेंकी गई सामग्री तीनट्रैक्टरट्रॉलियोंमें भरकर लेजाईगई, जिसकी अनुमानित कीमत 7 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है। कृषि विभाग द्वारा पिछले 10 साल से किसानों को धान और दलहन उत्पादन में तकनीकी सहायता देने हेतु यह सामग्री मुफ्त में वितरित की जानी थी, लेकिन जमीन पर इसका उपयोग नहीं हो सका।
FAQ
- सवाल: कृषक सूचना केंद्र में खराब हुई जैविक खाद (Organic Fertilizer) की जिम्मेदारी किसकी है?
जवाब: जवाब: यह कृषि विभाग की लापरवाही का परिणाम है। सामग्री वितरण के बजाय वर्षों तक बंद कमरे में रखी रही, जिससे वह अनुपयोगी हो गई। - सवाल: क्या किसानों को यह जैविक खाद (Organic Fertilizer) मुफ्त में मिलनी थी?
जवाब: हां, यह सभी सामग्री किसानों को तकनीकी सहायता के तहत निःशुल्क दी जानी थी। - सवाल: क्या आगे से ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती हैं?
जवाब: हां, यदि प्रशासन समय पर निगरानी रखे और पंचायत को नियमित जानकारी दे तो ऐसी बर्बादी रोकी जा सकती है।
खाद की बर्बादी | प्रशासन की लापरवाही | सड़ गया खाद | गरियाबंद में सड़ गया खाद | किसानों के साथ धोखाधड़ी | छत्तीसगढ़ न्यूज | एक्सपायरी खाद | कीटनाशक दवा | "Manure rotted in Gariaband" | gariyaband | CG News | cg news in hindi | Chhattisgarh News