चीन में दवा, भारत में तांत्रिक खेल: पैंगोलिन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का पर्दाफाश
समझें क्या है पूरा मामला
वन विभाग और खुफिया टीम ने 22 दिनों तक बड़ा अभियान चलाया। टीम ने छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक 200 किमी तस्करों का पीछा किया। इस कार्रवाई में 7 किलो वजनी जीवित पैंगोलिन सुरक्षित बचाया गया। मामले में छत्तीसगढ़ और ओडिशा से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब इसके अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच की जा रही है।
22 दिन का गुप्त ऑपरेशन
गरियाबंद इलाके में पैंगोलिन बेचने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद जांच टीम सतर्क हो गई। एक बिचौलिए के जरिए तस्करों से संपर्क साधा गया। तस्करों ने पैंगोलिन की तस्वीरें भी भेजीं। इसके बाद सौदे की बात आगे बढ़ाई गई।
20 अगस्त को टीम ने तस्करों का पीछा शुरू किया। गरियाबंद से देवभोग और कालाहांडी होते हुए टीम ओडिशा पहुंची। नुआपाड़ा जिले के पालमा तक 200 किमी पीछा किया गया। रात 9 बजे सरकारी इंटेकवेल इमारत पर छापा मारा गया।
इंटेकवेल में छिपा था पैंगोलिन
छापेमारी के दौरान पैंगोलिन एक इमारत में छिपाया गया था। खतरे की आहट से वह गेंद की तरह सिमट गया था। वन विभाग ने 7 किलो का पैंगोलिन सुरक्षित बरामद किया। रातभर चले इस ऑपरेशन में 5 आरोपी पकड़े गए।
पकड़े गए आरोपियों में पालमा के बालकृष्णा हाटी और सोनू हाटी शामिल हैं। गरियाबंद का रोशन ठाकुर भी पकड़ा गया है। यह गिरोह 9 अगस्त से खरीदार की तलाश में था। अब पुलिस इनके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
अंधविश्वास और अंतरराष्ट्रीय मांग
पैंगोलिन की तस्करी के दो बड़े कारण सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए इसकी मांग है। लोग अंधविश्वास के कारण इसे ऊंची कीमत पर खरीदते हैं। जीवित पैंगोलिन लाखों रुपये में बेचने का दावा किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके शल्क (Scales) की भारी मांग है। चीन और वियतनाम की पारंपरिक दवाओं में इसका इस्तेमाल होता है। पैंगोलिन के शल्क केराटिन (Keratin) से बने होते हैं। इनसे खून साफ करने और ताकत बढ़ाने के झूठे दावे किए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी के दो मुख्य रूट
जांच एजेंसियों के मुताबिक पैंगोलिन के शल्क दो रास्तों से भेजे जाते हैं। पहला रास्ता नेपाल और उत्तर बंगाल से होकर जाता है। दूसरा रास्ता मणिपुर और म्यांमार से होकर चीन तक पहुंचता है। म्यांमार और भारत के कई बिचौलिए पहले भी पकड़े जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश एसटीएफ (STF – Special Task Force) ने 2014 में बड़ी जांच शुरू की थी। इस दौरान 189 से अधिक तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR – Udanti Sitanadi Tiger Reserve) का गलियारा महाराष्ट्र से ओडिशा तक फैला है। इसलिए यह क्षेत्र तस्करों के निशाने पर रहता है।
पैंगोलिन बचाव के आंकड़े
हाल के वर्षों में कई जगह पैंगोलिन शल्क जब्त किए गए हैं। जगदलपुर से 13 किलो शल्क के साथ 4 लोग पकड़े गए। बलरामपुर में 14.9 किलो शल्क और 13 आरोपी पकड़े गए। बारपेटा में 17 किलो शल्क बरामद हुआ।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ सीमा से सात किलो शल्क के साथ जीवित पैंगोलिन बचाया गया। मिजोरम सीमा पर म्यांमार ले जाते समय 64 किलो शल्क पकड़ा गया। ट्रेन के जरिए तस्करी करते हुए 220 किलो शल्क भी मिला।
FAQ
- पैंगोलिन की तस्करी क्यों की जाती है?
उत्तर: पैंगोलिन की तस्करी अंधविश्वास के कारण तांत्रिक पूजा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारंपरिक दवाओं के लिए की जाती है। इसके शल्क चीन और वियतनाम में महंगे दामों पर बिकते हैं। - पैंगोलिन बचाव ऑपरेशन में कितने आरोपी पकड़े गए?
उत्तर: 22 दिनों तक चले इस संयुक्त ऑपरेशन में कुल 5 आरोपियों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के निवासी शामिल हैं। - पैंगोलिन खुद का बचाव कैसे करता है?
उत्तर: पैंगोलिन किसी पर हमला नहीं करता। खतरा महसूस होते ही वह खुद को समेटकर फुटबॉल या गेंद की तरह गोल बना लेता है।
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