125 साल पुराने डेम पर सीमेंट प्लांट का साया, 1700 एकड़ जमीन पर बिड़ला की तैयारी, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

Arun Tiwari | Nov 05, 2026, 12:35 IST
125 साल पुराना पेंड्रावन डेम संकट में! अल्ट्राटेक सीमेंट को मिली एनओसी के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा
UltraTech Cement's proposed plant and limestone mining project near Pendrawan Dam in Chhattisgarh have sparked concerns among farmers over water resources and agricultural land.
छत्तीसगढ़ में अडानी समूह के बाद अब बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर जिले के करीब 125 साल पुराने पेंड्रावन डेम के कैचमेंट एरिया में कंपनी ने 689 हेक्टेयर यानी करीब 1700 एकड़ जमीन खरीदी है। इस जमीन पर सीमेंट प्लांट लगाने और लाइमस्टोन की माइनिंग की तैयारी है।

जल संसाधन विभाग से कंपनी को एनओसी भी मिल गई है। लेकिन इस अनुमति ने आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।



ग्रामीणों का आरोप है कि सीमेंट प्लांट और खनन की अनुमति से पेंड्रावन डेम का अस्तित्व और हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि यह डेम आसपास के किसानों की खेती के लिए जीवनरेखा है। यदि कैचमेंट एरिया में खनन शुरू हुआ, तो डेम में पानी की आवक और जलभराव पर असर पड़ सकता है। इससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों की आजीविका संकट में आ जाएगी। पेंड्रावन बचाओ समिति ने इस अनुमति के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। गांव-गांव में बैठकें हो रही हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इसके खिलाफ पहले से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।




डेम के कैचमेंट में 1700 एकड़ जमीन

रायपुर जिले का पेंड्रावन डेम करीब सवा सौ साल पुराना है। इसके कैचमेंट एरिया में अल्ट्राटेक सीमेंट ने किसानों से 689 हेक्टेयर यानी करीब 1700 एकड़ जमीन खरीदी है। इसी जमीन पर सीमेंट प्लांट और लाइमस्टोन खनन प्रस्तावित है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि खनन के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की खुदाई से डेम के जलग्रहण क्षेत्र पर असर पड़ेगा। इस डेम से हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। ऐसे में जलभराव प्रभावित होने की स्थिति में खेती पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।



स्थानीय निवासी घनश्याम वर्मा का कहना है कि जब भी प्रदेश में बीजेपी की सरकार आती है, इस इलाके के लोगों को सीमेंट प्लांट शुरू होने का डर सताने लगता है। अब एक बार फिर जल संसाधन विभाग से एनओसी जारी होने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। उनके मुताबिक, लोग अब आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।




16 साल से अटका है प्लांट का मामला

पेंड्रावन में सीमेंट प्लांट लगाने का मामला करीब 16 साल पुराना है। वर्ष 2008 में पहली बार इस क्षेत्र में प्लांट लगाने की चर्चा शुरू हुई थी। वर्ष 2015 में तत्कालीन रमन सरकार ने कंपनी को एनओसी जारी की थी। इसका ग्रामीणों ने विरोध किया, जिसके बाद अनुमति निरस्त कर दी गई।



इसके बाद 3 जनवरी 2017 को तत्कालीन बीजेपी सरकार के जल संसाधन विभाग ने एक बार फिर कंपनी को एनओसी जारी कर दी। इस बार भी किसानों ने बड़ा आंदोलन किया। स्थानीय विधायक ने भी इसका विरोध किया। विरोध के बाद 20 मार्च 2017 को तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ने एनओसी निरस्त कर दी।.



कंपनी ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। मामले में 25 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को निरस्त करते हुए जल संसाधन विभाग को कंपनी का पक्ष सुनने और नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश के बाद विभाग में दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई। कंपनी का पक्ष सुनने के बाद जल संसाधन विभाग ने फिर एनओसी जारी कर दी। इसी फैसले ने करीब 11 साल बाद एक बार फिर पेंड्रावन में सीमेंट प्लांट के विरोध की जमीन तैयार कर दी है।



मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री से गुहार

एनओसी जारी होने के बाद पेंड्रावन बचाओ समिति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप से हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का कहना है कि सरकार को किसानों के हित और डेम के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। समिति ने मांग की है कि कंपनी को जारी एनओसी रद्द की जाए। साथ ही, इस जमीन पर दी गई लीज भी निरस्त की जाए, ताकि प्रस्तावित प्लांट और खनन की प्रक्रिया आगे न बढ़ सके।



ग्रामीणों का कहना है कि पेंड्रावन डेम केवल जल संग्रहण का ढांचा नहीं, बल्कि आसपास के हजारों किसानों की खेती का आधार है। यदि इसके कैचमेंट एरिया में औद्योगिक गतिविधियों को अनुमति दी गई, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक पड़ सकता है।



फिलहाल दर्जनों गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे फिर सड़कों पर उतरेंगे। ऐसे में पेंड्रावन का पुराना विवाद एक बार फिर बड़े जनआंदोलन में बदलने की ओर बढ़ रहा है।




FAQs



  1. पेंड्रावन डेम कहां स्थित है?
    पेंड्रावन डेम छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में स्थित है। यह करीब 125 साल पुराना डेम है।
  2. पेंड्रावन बचाओ समिति का उद्देश्य क्या है?
    पेंड्रावन बचाओ समिति का उद्देश्य एनओसी जारी करने के खिलाफ किसानों और ग्रामीणों का विरोध करना है। उन्हें सरकार से अनुरोध है कि वह किसानों के हित और डेम के भविष्य को प्राथमिकता दे, और कंपनी को जारी एनओसी को रद्द करे।
  3. क्यों 16 वर्षों से पेंड्रावन में सीमेंट प्लांट का मामला विवाद में है?
    यह मामला 2008 से चल रहा है, जब पहली बार प्लांट लगाने का प्रस्ताव आया था। इसके बाद कई बार एनओसी जारी की गई और रद्द की गई, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में बेहद चिंता और आंदोलन की स्थिति बनी हुई है।
Tags:
  • पेंड्रावन डेम पर सीमेंट प्लांट
  • पेंड्रावन डेम
  • किसान आंदोलन
  • Farmers Protest
  • Cement Plant
  • Pendrawan Dam
  • पेंड्रावन बचाओ समिति
  • अल्ट्राटेक सीमेंट