पर्सनल लोन के नाम पर बड़ा फ्रॉड,दो कर्मचारियों के खातों से निकाल लिए 1.41 करोड़

Umeshwari Baghel | Aug 17, 2026, 21:29 IST
पर्सनल लोन के नाम पर बड़ा फ्रॉड
बिलासपुर हाईकोर्ट में दो सरकारी कर्मचारियों ने पर्सनल लोन फ्रॉड की शिकायत की है। आरोप है कि एजेंटों ने दस्तावेज और OTP का दुरुपयोग कर छह कंपनियों से उनके नाम पर 1.41 करोड़ रुपए से ज्यादा के लोन निकाल दिए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • दो सरकारी कर्मचारियों के नाम पर 1.41 करोड़ का लोन
  • OTP और दस्तावेज के दुरुपयोग से हुआ कथित फ्रॉड
  • छह फाइनेंस कंपनियों से निकाले गए कई पर्सनल लोन
  • रिकवरी एजेंट पहुंचे तो कर्मचारियों को मिली जानकारी
  • हाईकोर्ट ने बैंक मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से किया तलब

Bilaspur : बिलासपुर में पर्सनल लोन के नाम पर कथित धोखाधड़ी के दो मामले हाईकोर्ट पहुंचे हैं। आरोप है कि लोन दिलाने वाले एजेंटों ने दो सरकारी कर्मचारियों के दस्तावेज और OTP का इस्तेमाल किया। इसके बाद उनकी सहमति के बिना कई बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से भारी रकम के लोन निकाल दिए गए।



दोनों कर्मचारियों का दावा है कि उन्होंने सिर्फ छोटे पर्सनल लोन के लिए दस्तावेज दिए थे। बाद में उनके नाम पर कुल 1 करोड़ 41 लाख 51 हजार 680 रुपए के लोन सामने आए। मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। फिलहाल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।



स्टाफ नर्स ने मांगा था 5.40 लाख का लोन

पहला मामला बिलासपुर के CIMS में पदस्थ स्टाफ नर्स वर्षा बेक से जुड़ा है। उन्होंने अधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।



याचिका के अनुसार अप्रैल 2023 में एक डायरेक्ट सेलिंग एजेंट ने उनसे संपर्क किया था। एजेंट ने पर्सनल लोन दिलाने की बात कही। वर्षा ने आदित्य बिड़ला कैपिटल से 5.40 लाख रुपए का लोन लेने पर सहमति दी थी।



पर्सनल लोन के नाम पर बड़ा फ्रॉड


लोन प्रक्रिया के लिए उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगा गया। सैलरी स्लिप सहित दूसरे जरूरी दस्तावेज भी लिए गए। दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से साझा किए गए थे। प्रक्रिया के दौरान OTP भी एजेंट को बताया गया।



आरोप है कि इसके बाद अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से उनके नाम पर कई लोन स्वीकृत हुए। इनकी कुल रकम करीब 46.20 लाख रुपए बताई गई है।



EMI भरने का भरोसा देकर रकम ट्रांसफर कराने का आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि जब वर्षा ने अतिरिक्त लोन पर आपत्ति जताई तो एजेंट ने समझौते का रास्ता बताया। आरोप है कि उनसे लोन की करीब आधी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कराई गई।



एजेंट ने कथित तौर पर भरोसा दिया कि आगे की EMI वह खुद जमा करेगा। कुछ समय तक किश्तें जमा भी हुईं। बाद में EMI का भुगतान बंद हो गया।



इसके बाद लोन की वसूली शुरू हुई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि रिकवरी एजेंटों ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया। इसी विवाद के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।



बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर को कोर्ट ने बुलाया

मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अंबिकापुर शाखा के मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।



मैनेजर को 1 सितंबर 2026 को कोर्ट में उपस्थित होना है। उनसे पूछा जाएगा कि लोन मंजूर करने से पहले जरूरी जांच कैसे की गई। कोर्ट खास तौर पर CIBIL स्कोर और लोन चुकाने की क्षमता की जांच से जुड़ी जानकारी चाहता है। मामले की अगली सुनवाई करीब दो सप्ताह बाद रखी गई है।



कॉलेज कर्मचारी के नाम 95.31 लाख के लोन का आरोप

दूसरा मामला बिलासपुर के आयुर्वेदिक कॉलेज में पदस्थ हरि लाल पोया का है। उन्होंने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि सितंबर 2023 में एक डायरेक्ट सेलिंग एजेंट ने फोन किया था। एजेंट ने उन्हें पांच लाख रुपए का पर्सनल लोन दिलाने की पेशकश की थी।



पोया ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से पांच लाख रुपए का लोन लेने की सहमति दी थी। इसके लिए उन्होंने जरूरी दस्तावेज और OTP साझा किया।



आरोप है कि बाद में उनकी अनुमति के बिना छह अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से लोन मंजूर करा दिए गए। कुल लोन राशि 95 लाख 31 हजार 680 रुपए बताई गई है। इन कंपनियों में चोलामंडलम, आदित्य बिड़ला कैपिटल, एक्सिस बैंक, ICICI बैंक, यस बैंक और फिनबल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं।



दोनों मामलों में कुल 1.41 करोड़ का दावा

दोनों याचिकाओं को मिलाकर 1 करोड़ 41 लाख 51 हजार 680 रुपए के कथित अनधिकृत लोन का मामला बनता है।दोनों कर्मचारियों का आरोप है कि लोन प्रक्रिया के लिए दिए दस्तावेज और OTP का गलत इस्तेमाल किया गया। बाद में EMI रुकने पर वसूली का दबाव उन पर आने लगा।



अब हाईकोर्ट यह जांच रहा है कि इतनी बड़ी रकम के कई लोन किस आधार पर मंजूर हुए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि बैंक और फाइनेंस कंपनियों ने ग्राहकों की सहमति और ऋण पात्रता की जांच किस तरह की थी।



FAQ

  1. पर्सनल लोन फ्रॉड में कुल कितनी रकम का मामला है?
    दोनों सरकारी कर्मचारियों के नाम पर कुल 1 करोड़ 41 लाख 51 हजार 680 रुपए के कथित अनधिकृत लोन का आरोप है।
  2. लोन फ्रॉड में OTP का कैसे दुरुपयोग हुआ?
    याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि छोटे लोन के लिए दिए दस्तावेज और OTP का इस्तेमाल अतिरिक्त लोन मंजूर कराने में किया गया।
  3. हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
    हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है। बैंक ऑफ बड़ौदा के अंबिकापुर शाखा मैनेजर को भी कोर्ट में तलब किया गया है।

ये खबरें भी पढ़े...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : महिला अगर अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर है तो वह अपराधी नहीं



कैग का बड़ा खुलासा : बिलासपुर रेल जोन में गंदा पानी, रेल मंत्रालय में हड़कंप



रिटायर्ड IAS के पति की बढ़ी मुश्किलें, करोड़ों की प्रॉपर्टी धोखाधड़ी में FIR दर्ज करने के आदेश



आरटीआई छत्तीसगढ़: सरकारी कर्मचारियों के निजी दस्तावेज नहीं होंगे सार्वजनिक



Tags:
  • हाईकोर्ट
  • पर्सनल लोन
  • बिलासपुर
  • धोखाधड़ी
  • सरकारी कर्मचारियों