छत्तीसगढ़ के 7 फार्मेसी कॉलेज की सीटें शून्य, हाईकोर्ट पहुंचे संचालक
नए शैक्षणिक सत्र की काउंसलिंग शुरू होने से पहले फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की सख्ती ने छत्तीसगढ़ के कई फार्मेसी कॉलेजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के 7 कॉलेजों का सीट इनटेक शून्य कर दिया गया है, जबकि 10 कॉलेजों की कुल 521 सीटों में कटौती की गई है। पीसीआई की कार्रवाई के पीछे निरीक्षण में मिली गंभीर खामियां बताई जा रही हैं। सीटें घटने के बाद कई कॉलेजों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटा दिया है।
निरीक्षण में खुली पोल
पीसीआई और छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) की संयुक्त जांच में कई संस्थानों की व्यवस्थाएं नियमों से काफी दूर मिलीं। कहीं नियमित प्राचार्य नहीं मिले तो कहीं निर्धारित योग्यता वाले शिक्षक ही नहीं थे। कई कॉलेजों की प्रयोगशालाएं अधूरी मिलीं, जबकि छात्रों के लिए जरूरी शैक्षणिक सुविधाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं। पहले भी सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकांश संस्थानों ने व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं कीं।
7 कॉलेजों पर सबसे बड़ी कार्रवाई
पीसीआई ने कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड कॉलेज रायपुर, केसरी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, त्रिवेणी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, आर.एन. दुबे कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कृष्णा विकास इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी समेत कुल सात संस्थानों का सीट इनटेक शून्य कर दिया है। इनमें से दो संस्थान अब निजी विश्वविद्यालय बन चुके हैं और उन्होंने सीएसवीटीयू से प्रोग्रेसिव क्लोजर का आवेदन भी कर दिया है।
किसी की 10 तो किसी की 70 सीटें घटीं
PCI ने कई कॉलेजों में सीमित कटौती की, जबकि कुछ संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई हुई। जहां 60 सीट वाले कॉलेजों को 50 या 45 सीटों तक सीमित कर दिया गया, वहीं 100 और 175 सीट वाले संस्थानों का प्रवेश भी बड़े स्तर पर घटा दिया गया। योगांतर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की 60 सीटें घटाकर सिर्फ 30 कर दी गईं। कुल मिलाकर 10 कॉलेजों की 1030 सीटों में से 521 सीटें कम कर दी गईं।
आधे कॉलेजों को ही मिली मंजूरी
प्रदेश में इस वर्ष 107 फार्मेसी कॉलेजों ने पीसीआई से मान्यता मांगी थी। अब तक सिर्फ 52 कॉलेजों को ही मंजूरी मिली है। इनमें भी केवल 39 कॉलेज ऐसे हैं, जिन्हें पूरी स्वीकृत सीटों के साथ अनुमति मिली है। बाकी संस्थानों को या तो सीट कटौती का सामना करना पड़ा या उनका मामला लंबित है।
काउंसलिंग पर भी असर
तकनीकी शिक्षा संचालनालय की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पीसीआई और सीएसवीटीयू की मंजूरी पर निर्भर है। जिन कॉलेजों को पीसीआई की अनुमति मिल चुकी है, वे संबद्धता की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। ऐसे में सीटों में कटौती और अदालतों में चल रहे मामलों का असर इस बार की फार्मेसी प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। छात्रों और अभिभावकों की नजर अब इस बात पर है कि अंतिम स्वीकृत सीटों की सूची कब जारी होगी और काउंसलिंग की तारीखें कब घोषित होंगी।
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