छत्तीसगढ़ में गहराया बिजली संकट ; मांग और उत्पादन के बीच कई मेगावाट का बड़ा अंतर

Aishwarya Dwivedi | Apr 21, 2026, 13:28 IST
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गर्मी बढ़ने के साथ छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत 6700 मेगावाट को पार कर गई है, जबकि उत्पादन कम हो रहा है। संयंत्रों के खराब होने से कटौती का खतरा है।

NEWS IN SHORT

  • प्रदेश में बिजली की खपत बढ़ी।
  • तापमान 43-44 डिग्री तक पहुंचा।
  • उत्पादन 2300 मेगावाट, मांग 6700 मेगावाट।
  • संयंत्रों की कमी से कटौती का खतरा।
  • केंद्र और निजी क्षेत्र से बिजली की सप्लाई बढ़ाई।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी लगातार बढ़ती जा रही है। अप्रैल महीने में ही तापमान 43 से 44 डिग्री तक पहुँच चुका है, जिससे एसी और कूलर की खपत दिन-रात बढ़ गई है। इसका असर बिजली की खपत पर साफ दिख रहा है, और इस समय राज्य की बिजली खपत 6700 मेगावाट के पार हो चुकी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार बिजली की खपत 7500 मेगावाट तक जा सकती है, जो पिछले साल की खपत 7000 मेगावाट से कहीं ज्यादा है।



बिजली उत्पादन में कमी, जरूरतें बढ़ीं

इस वक्त छत्तीसगढ़ राज्य कंपनी के उत्पादन संयंत्रों में महज 2300 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। वहीं, 4300 मेगावाट बिजली केंद्र सरकार से लानी पड़ रही है। साथ ही, निजी क्षेत्र से भी बिजली खरीदी जा रही है, ताकि बढ़ी हुई डिमांड पूरी की जा सके। राज्य के बिजली संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 2960 मेगावाट है, लेकिन उत्पादन आमतौर पर 2600-2700 मेगावाट के बीच ही हो पाता है।



पिछले दिनों कोरबा वेस्ट और श्यामा प्रसाद मुखर्जी संयंत्रों के कई यूनिट बंद थे, जिससे उत्पादन और भी घट गया था। हालांकि, श्यामा प्रसाद मुखर्जी संयंत्र का 250 मेगावाट का यूनिट चालू हो गया है, लेकिन कोरबा वेस्ट का 210 मेगावाट का संयंत्र अभी भी बंद है। ऐसे में बिजली की लगातार बढ़ती खपत और उत्पादन में कमी के कारण, बिजली की कटौती का खतरा भी मंडरा रहा है।



बिजली कटौती की संभावना

राज्य बिजली कंपनी का दावा है कि डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की गई है, लेकिन अगर कई संयंत्र और बंद हो जाते हैं, तो कटौती की स्थिति बन सकती है। पिछले साल भी कई संयंत्रों के खराब होने के कारण उद्योगों की बिजली सप्लाई में कटौती की गई थी। विशेषकर, बिजली की कमी होने पर पहले उद्योगों की सप्लाई पर असर पड़ता है।



क्या है समाधान

इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनी को संयंत्रों की मरम्मत और रख-रखाव को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही, निजी क्षेत्र से बिजली की सप्लाई बढ़ाकर मांग पूरी करने के उपायों पर काम करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान और खपत का यही रुझान रहा, तो राज्य में बिजली संकट गहरा सकता है।



इस समय, बिजली की बढ़ती खपत और संयंत्रों की उत्पादन क्षमता में कमी एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो प्रदेश में बिजली कटौती की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।



निष्कर्ष

चाहे राज्य सरकार का दावा हो या बिजली कंपनियों की योजना, अगर संयंत्रों की मरम्मत और उत्पादन क्षमता में सुधार नहीं किया गया, तो बिजली की कमी को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए, सरकार और संबंधित विभागों को इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।



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