कमजोर जनजाति विकास अभिकरणों में अध्यक्षों की नियुक्ति, 16 जिलों में जिम्मेदारी

VINAY VERMA | Aug 14, 2026, 19:43 IST
जनजाति विकास अभिकरण में अध्यक्ष नियुक्त
छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए 16 विकास अभिकरणों और प्रकोष्ठों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इनका काम जनजातीय परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनकी समस्याएं सरकार तक पहुंचाना होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों यानी PVTG के विकास को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आदिम जाति विकास विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संचालित विकास अभिकरणों और प्रकोष्ठों के लिए अध्यक्ष और सदस्यों का मनोनयन किया है। कुल 16 अभिकरणों और प्रकोष्ठों में अध्यक्षों के साथ पांच-पांच सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि इन संस्थाओं की कमान संबंधित जनजातीय समुदायों के लोगों को ही सौंपी गई है।



कमार समाज को कई जिलों में जिम्मेदारी

गरियाबंद के कमार विकास अभिकरण की कमान मैतुराम कमार को दी गई है। उनके साथ सरजू राम कमार, जय सिंह कमार, फूलचंद नेताम, ललित कुमार कमार और सुंदर सिंह कमार सदस्य बनाए गए हैं। धमतरी के नगरी में कमार विकास प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनाराम कमार होंगे, जबकि महासमुंद में गणेश राम और कांकेर में बुद्धेश्वर नाग को अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है।



बैगा क्षेत्रों में भी नए चेहरे

कबीरधाम के बैगा विकास अभिकरण की अध्यक्षता अमरसिंह बैगा करेंगे। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में संतराम बैगा, MCB जिले में लालदास बैगा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में जीवन और मुंगेली में डोमार सिंह बैगा को अध्यक्ष बनाया गया है। इनके साथ संबंधित क्षेत्रों से पांच-पांच सदस्यों का मनोनयन किया गया है।



पहाड़ी कोरवा-बिरहोर को प्रतिनिधित्व

जशपुर के पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर अभिकरण की जिम्मेदारी जगमेल राम को मिली है। सरगुजा में पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण के अध्यक्ष नईहारो कोरवा होंगे। वहीं कोरबा में पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्रकोष्ठ की कमान बालक राम कोरवा और बलरामपुर-रामानुजगंज में पहाड़ी कोरवा विकास प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी जर्मन राम को दी गई है।



बिरहोर समाज को भी नेतृत्व

बिलासपुर के बिरहोर विकास अभिकरण के अध्यक्ष रामगोपाल बनाए गए हैं। रायगढ़ के धरमजयगढ़ में बिरहोर विकास प्रकोष्ठ की कमान केन्दाराम बिरहोर को दी गई है। इन दोनों क्षेत्रों में भी अध्यक्षों के साथ पांच सदस्यों का मनोनयन किया गया है।



अब योजनाओं की जमीन पर परीक्षा

PVTG समुदायों के लिए सरकार की योजनाएं पहले से संचालित हैं, लेकिन असली चुनौती उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने की है। विकास अभिकरणों और प्रकोष्ठों को इसी काम में अहम भूमिका निभानी होगी। अब इन मनोनीत अध्यक्षों और सदस्यों के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, सड़क, पेयजल और आजीविका से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी।



नामों के साथ बड़ी जिम्मेदारी

सरकार ने जिन लोगों को जिम्मेदारी दी है, वे उन्हीं समुदायों और क्षेत्रों से आते हैं। इसलिए उनसे स्थानीय समस्याओं की सीधी समझ और सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने की उम्मीद है। लेकिन सवाल यह भी रहेगा कि ये समितियां केवल नाम और पद तक सीमित रहती हैं या वास्तव में PVTG परिवारों की जिंदगी बदलने का काम करती हैं।



अब इन विकास अभिकरणों की सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि जंगल और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ कितनी तेजी से पहुंचे। नियुक्तियां हो गई हैं, अब काम का हिसाब देना होगा।



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