मस्तूरी में PWD का कारनामा, करोड़ों की सड़क हाथ से उखड़ी
NEWS IN SHORT
- बिलासपुर के मस्तूरी में सड़क निर्माण में भारी लापरवाही उजागर।
- 1 करोड़ 40 लाख की लागत के बावजूद सड़क की गुणवत्ता अत्यंत खराब।
- डामर की परत हाथ से ही उखड़ने का वीडियो वायरल।
- मुरूम की जगह मिट्टी इस्तेमाल कर तकनीकी मानकों की अनदेखी।
- जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से इंजीनियरिंग का एक ऐसा नमूना सामने आया है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। जिले के मस्तूरी ब्लॉक में लोक निर्माण विभाग (PWD) की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है, जहां करोड़ों की लागत से बनी डामर की सड़क हाथ लगाते ही पापड़ की तरह उखड़ रही है। इस घटिया निर्माण का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं।
करोड़ों का बजट, मिट्टी का खेल
पूरा मामला मस्तूरी ब्लॉक के आमगांव से लगे आमाकोने मार्ग का है। जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण लगभग 1 करोड़ 40 लाख की भारी-भरकम लागत से किया जा रहा है। जनवरी माह से शुरू हुए इस निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनकी राह आसान होगी, लेकिन अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में तय मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। डामरीकरण से पहले जहां मजबूत बेस और मुरूम का इस्तेमाल होना चाहिए था, वहां सिर्फ मिट्टी बिछाकर खानापूर्ति कर दी गई।
वीडियो ने उजागर की कड़वी हकीकत
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सड़क की गुणवत्ता दिखाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि सड़क की ऊपरी डामर वाली परत इतनी कमजोर है कि उसे हाथ से उखाड़ने पर वह आसानी से बाहर निकल रही है। बिना किसी मशीन या औजार के सड़क का इस तरह बिखर जाना यह साबित करने के लिए काफी है कि निर्माण सामग्री में भारी कटौती की गई है।
अफसरों की बखौफ लापरवाही
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन PWD के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि अफसरों ने अपनी जेब भरने के चक्कर में ठेकेदार को खुली छूट दे दी। स्थिति यह है कि अभी पहली बारिश भी नहीं हुई है और सड़क जवाब देने लगी है। अगर जल्द ही मानसून की बौछारें पड़ती हैं, तो यह करोड़ों की सड़क पूरी तरह बह जाएगी।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
इस मामले को लेकर क्षेत्र में भारी जनाक्रोश है। जनप्रतिनिधियों ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल से मामले की लिखित शिकायत की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- सड़क निर्माण की तकनीकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
- संबंधित ठेकेदार का भुगतान रोका जाए और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- दोषी PWD अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो ताकि भविष्य में सरकारी धन का ऐसा दुरुपयोग न हो।
निष्कर्ष
मस्तूरी का यह मामला केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की बानगी है जहां विकास के नाम पर जनता के टैक्स का पैसा भ्रष्टाचार की गटर में बहा दिया जाता है। देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कड़ा एक्शन लेता है या फिर जांच के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी।
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