CG PWD घोटाला : झूठा शपथपत्र देकर कंपनी ने बटोरे 13 करोड़
NEWS IN SHORT
- PWD ने ब्लैकलिस्टेड कंपनी को नियमों के खिलाफ ठेके दिए।
- मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा को 13 करोड़ के काम सौंपे।
- बिलासपुर स्मार्ट सिटी ने 2023 में कंपनी ब्लैकलिस्ट की थी।
- टेंडर के लिए कंपनी ने झूठा शपथपत्र जमा किया था।
- धोखाधड़ी के इस मामले में सात साल जेल का प्रावधान।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD) की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनी मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को करीब 13 करोड़ रुपए के ठेके बांट दिए। कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए विभाग को झूठा शपथपत्र सौंपा, जिसे विभागीय अधिकारियों ने आंखें मूंदकर स्वीकार भी कर लिया।
झूठे शपथपत्र से खेला बड़ा खेल
दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी के संचालक ने स्टांप पेपर पर लिखित दावा किया था कि उनकी फर्म किसी भी सरकारी विभाग में ब्लैकलिस्ट या प्रतिबंधित नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने साल 2023 में ही इस कंपनी की निविदा सुरक्षा राशि (EMD) जब्त कर इसे ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया था। टेंडर नियमों के तहत ब्लैकलिस्टेड या डिबार ठेकेदार को काम देना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन यहां नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं।
कहां-कहां बांटे गए 13 करोड़ के ठेके
अपात्र कंपनी को रायपुर और बिलासपुर समेत कई क्षेत्रों में करोड़ों के काम सौंपे गए:
- रायपुर, धमतरी एवं कुरूद: बिजली लाइन शिफ्टिंग और विद्युतीकरण (आईडी– CGeR07424) के लिए लगभग 6 करोड़ रुपए का ठेका।
- बिलासपुर : खेल परिसर और विद्युत नवीनीकरण कार्य के लिए करीब 4.87 करोड़ रुपए का आवंटन।
- नवा रायपुर एवं महासमुंद : सड़क चौड़ीकरण के दौरान बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 2.15 करोड़ रुपए का काम।
जालसाजी पर हो सकती है 7 साल की जेल
कानूनी जानकारों के मुताबिक, सरकारी टेंडर के लिए झूठा शपथपत्र देना जालसाजी, धोखाधड़ी और झूठी गवाही (Perjury) की श्रेणी में आता है। इस गंभीर अपराध के लिए दोषी को 3 से 7 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
सवालों के घेरे में अफसर
इस खुलासे के बाद PWD की दस्तावेज सत्यापन (Verification) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या इतने बड़े पैमाने पर बिना किसी मिलीभगत के एक प्रतिबंधित कंपनी को ठेके दिए जा सकते हैं?
अधिकारियों का गोलमोल जवाब
मामला गरमाने पर PWD विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सुरेश भूप्पल ने कहा, "दूसरे विभाग में ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी हमें कैसे होगी? कंपनी संचालक ने झूठा शपथपत्र दिया है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।" वहीं, विभाग के ईएनसी वीके भतपहरी ने मामले को संभालते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुसार ही होती है, फिर भी शिकायत को देखते हुए इस पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। अब देखना यह है कि जांच में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है या साठगांठ का बड़ा सच।
निष्कर्ष
इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि विभागीय दस्तावेज सत्यापन प्रणाली में गंभीर खामियाँ हैं। ब्लैकलिस्टेड कंपनी द्वारा झूठा शपथपत्र देकर करोड़ों का ठेका हासिल करना अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है। निष्पक्ष जांच से ही इस भ्रष्टाचार का सच सामने आ सकेगा।
FAQ
- झूठा शपथपत्र देने पर कानूनन कितने साल की जेल का प्रावधान है?
उत्तर: 3 से 7 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माना। - टेंडर प्रक्रिया में 'EMD' का पूरा नाम (Full Form) क्या होता है?
Earnest Money Deposit (निविदा सुरक्षा राशि या बयाना राशि)। - 'ENC' का प्रशासनिक पदनाम क्या है?
Engineer-in-Chief (मुख्य अभियंता या प्रमुख अभियंता), जो लोक निर्माण विभाग (PWD) के तकनीकी विंग के सर्वोच्च अधिकारी होते हैं। - लोक निर्माण विभाग (PWD) का मुख्य कार्य क्या होता है?
सरकारी भवनों, सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचों (Infrastructures) का निर्माण और रखरखाव करना।
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