भगवान के नाम पर दर्ज ज़मीन, अब मुआवजा किसे दे सरकार, जानिए इस अनोखे मामले की पूरी सच्चाई
इन मंदिरों के लिए कुल करीब 2.87 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित होने की बात सामने आई है। राशि स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक पेचीदगियों में उलझी हुई है।
क्या है उलझन
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी समस्या राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। संबंधित जमीनों के रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति के बजायभगवान या देवता का नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज है। ऐसे में प्रशासन के सामने सवाल है कि मुआवजे की राशि आखिर किसे सौंपी जाए। मंदिरों की देखरेख करने वाले लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह राशि मिल जाए, तो मंदिरों की मरम्मत, धार्मिक गतिविधियों और अन्य जरूरी कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
विकास परियोजनाओं में गई मंदिरों की जमीन
रायगढ़ जिले में एनटीपीसी की रेल लाइन, सड़क चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसी प्रक्रिया में तारपाली, भिखारीमाल, कोटमार, देवगांव समेत विभिन्न गांवों में स्थित 10 मंदिरों की जमीन भी अधिग्रहित हुई। जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे की गणना कर राशि निर्धारित की गई, लेकिन भुगतान के समय मालिकाना हक और अधिकृत प्रतिनिधि की पहचान से जुड़ी समस्या सामने आ गई।
सामान्य तौर पर जमीन के मालिक की मृत्यु होने पर उसके कानूनी वारिसों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर मुआवजे का भुगतान किया जा सकता है। मगर मंदिरों की जमीन के मामले में प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है। यहां देवता को जमीन का स्वामी माना गया है। इसलिए किसी पुजारी, सेवादार, मंदिर समिति या अन्य व्यक्ति को भुगतान करने के लिए उसके अधिकार और वैधानिक स्थिति का निर्धारण जरूरी है।
श्रीराम-जानकी मंदिर की तीन एकड़ जमीन गई
तारपाली स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर की करीब तीन एकड़ जमीन एनटीपीसी की रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले लगभग 85 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। मंदिर समिति के सदस्य के मुताबिक, जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2017 में हुआ था। हालांकि, इतने साल बीत जाने के बाद भी मंदिर को मुआवजे की राशि नहीं मिल सकी है।
बताया जाता है कि पुराने सदस्यों के नहीं रहने और वैधानिक प्रतिनिधि या वारिस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण भुगतान अटका हुआ है। मंदिर से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले का समाधान निकालकर राशि जारी करने का रास्ता साफ करेगा।
भिखारीमाल में जर्जर मंदिर, 46.65 लाख रुपये का मुआवजा अटका
भिखारीमाल गांव में स्थित प्राचीन महादेव बाबा शंकर मंदिर की हालत भी चिंता का विषय है। देखरेख के अभाव में मंदिर जर्जर होता जा रहा है। मंदिर की अधिग्रहित जमीन के बदले 46 लाख 65 हजार 898 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर में पूजा-पाठ और रखरखाव का काम सामूहिक रूप से किया जाता है। यदि मुआवजे की राशि उपलब्ध हो जाए, तो मंदिर की मरम्मत और जीर्णोद्धार कराया जा सकता है। लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में देवता का नाम दर्ज होने के कारण राशि जारी करने में अड़चन बनी हुई है।
इन 10 मंदिरों की मुआवजा राशि अटकी
तारपाली, श्रीराम-जानकी मंदिर: 85 लाख रुपये
भिखारीमाल, महादेव बाबा शंकरजी मंदिर:46.65 लाख रुपये
कोटमार, छबिलेश्वर महादेव बाबा मंदिर:1.56 लाख रुपये
देवगांव का मंदिर: 1.96 लाख रुपये
झलमला, श्री जगन्नाथ मंदिर: 79 हजार रुपये
धनगांव, जगन्नाथ स्वामी मंदिर:63 हजार रुपये
केनसरा, श्री जगन्नाथ महाप्रभु मंदिर: 2 हजार रुपये
कुरमापाली, श्री जगन्नाथ मंदिर: 24 हजार रुपये
सूपा, शंकर मंदिर:42 हजार रुपये
बरपाली, शंकर मंदिर: 63 हजार रुपये
समाधान के लिए प्रशासनिक पहल जरूरी:
मंदिरों की जमीन के मुआवजे का मामला अब केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। इससे मंदिरों की देखरेख और धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि संबंधित मंदिरों की ओर से मुआवजा प्राप्त करने के लिए कौन अधिकृत होगा और राशि का इस्तेमाल किस व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
इसके लिए मंदिरों की वास्तविक प्रबंधन व्यवस्था, उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों और प्रशासन के समन्वय से प्रत्येक मंदिर का मामला अलग-अलग आधार पर सुलझाया जा सकता है।
ग्रामीणों और मंदिर समितियों की मांग है कि शासनइस समस्या के समाधान के लिए विशेष पहल करे। इससे वर्षों से अटकी मुआवजा राशि मंदिरों तक पहुंच सकेगी और जर्जर धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार भी संभव हो पाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस कानूनी पेचीदगी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।
FAQ
1. रायगढ़ में कितने मंदिरों का मुआवजा अटका है?
रायगढ़ जिले में 10 मंदिरों की जमीन का करीब 2.87 करोड़ रुपए मुआवजा अटका होने की जानकारी सामने आई है।
2. भगवान के नाम दर्ज जमीन का मुआवजा क्यों नहीं मिल रहा?
राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के मालिक के रूप में देवता का नाम दर्ज है। मुआवजा लेने के लिए अधिकृत प्रतिनिधि की पहचान स्पष्ट नहीं होने से भुगतान अटका है।
3. रायगढ़ के किस मंदिर का सबसे ज्यादा मुआवजा अटका है?
तारपाली के श्रीराम-जानकी मंदिर का करीब 85 लाख रुपए मुआवजा अटका है। इसकी लगभग तीन एकड़ जमीन एनटीपीसी की रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी।