रायपुर में 750 किलो खराब पनीर नष्ट, जांच रिपोर्ट आने के 44 दिन बाद कार्रवाई, दो कंपनियों के मालिकों पर केस की तैयारी
ओडिशा जा रहा था 750 किलो पनीर
रायपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सितंबर में पनीर की बड़ी खेप पकड़ी थी। यह पनीर एक मालवाहक वाहन से ओडिशा भेजा जा रहा था। विभाग को इसकी गुणवत्ता पर संदेह हुआ था।
8 सितंबर को टीम ने जोरा इलाके के पास वाहन रोका। जांच के दौरान मिल्की मलाई और मलाई मैजिक ब्रांड का पनीर मिला। विभाग ने पनीर जब्त कर उसके सैंपल जांच के लिए भेजे।
सैंपल रायपुर की सरकारी खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजे गए। अधिकारियों को रिपोर्ट मिलने के बाद पनीर की गुणवत्ता पर स्थिति साफ हुई।
लैब रिपोर्ट में पनीर खाने योग्य नहीं मिला
12 सितंबर को खाद्य विभाग को लैब की जांच रिपोर्ट मिली। इसमें दोनों ब्रांड का पनीर खाने योग्य नहीं पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने संबंधित निर्माता का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
इसके बाद भी जब्त पनीर को तुरंत नष्ट नहीं किया गया। यह मामला करीब डेढ़ महीने तक अटका रहा। विभाग की कार्रवाई में हुई देरी अब चर्चा का विषय है। सवाल उठ रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद इतनी देरी क्यों हुई।
कंपनी ने जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल
खाद्य विभाग की रिपोर्ट को पनीर निर्माता कंपनी ने चुनौती दी। कंपनी ने सरकारी लैब की जांच पर आपत्ति जताई।
इसके बाद कंपनी ने दोबारा सैंपल की जांच कराने की मांग की। मामले में पनीर का नमूना नेशनल फूड लैब भेजा गया।
इसी प्रक्रिया के बीच जब्त पनीर को नष्ट करने की कार्रवाई रुकी रही। कंपनी की ओर से पनीर नष्ट करने का आवेदन भी दिया गया था।
आखिरकार खाद्य विभाग ने उरला स्थित फैक्ट्री में पनीर नष्ट कराया। अधिकारियों ने 750 किलो पनीर को नष्ट करने की कार्रवाई पूरी की।
इसका उद्देश्य खराब पनीर को दोबारा बाजार में पहुंचने से रोकना था।
दोनों ब्रांड के मालिकों पर होगी कार्रवाई
खाद्य विभाग अब संबंधित ब्रांड मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
मिल्की मलाई और मलाई मैजिक ब्रांड के संचालकों से जुड़ा मामला अदालत पहुंचेगा। विभाग इसके लिए कानूनी प्रकरण तैयार कर रहा है।
यह प्रकरण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी CJM कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई होगी।
फिलहाल विभाग ने पनीर नष्ट करने की कार्रवाई पूरी कर ली है। आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
भिलाई में भी मिला एक्सपायरी दूध
रायपुर से पहले भिलाई में भी खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई हुई थी। यहां मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठानों में कई गड़बड़ियां सामने आई थीं।
शुक्रवार को विभाग की टीम ने कई दुकानों की जांच की। इस दौरान एक्सपायरी दूध से पनीर बनाने का मामला सामने आया।
कुछ प्रतिष्ठानों में गंदगी के बीच मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। टीम को इन जगहों पर खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिला।
विभाग ने करीब 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध नष्ट कराया। इसके साथ ही तीन प्रतिष्ठानों में काम भी बंद करा दिया गया।
बिस्किट की पैकिंग में भी मिली गड़बड़ी
भिलाई के वैशाली नगर में भी जांच के दौरान एक मामला सामने आया। यहां एक दुकान में बिस्किट की पैकिंग पर गलत तारीख मिली।
बिस्किट के पैकेट पर वास्तविक तारीख से नौ दिन आगे की तारीख डाली गई थी। विभाग ने इसे गंभीर मामला माना है।
दुकान संचालक के खिलाफ कानूनी प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
रायपुर और भिलाई की इन कार्रवाइयों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल बढ़ाए हैं। खासकर दूध से बनने वाले उत्पादों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
खाद्य विभाग की कार्रवाई से साफ है कि खराब खाद्य सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।
FAQ
- खाद्य सुरक्षा विभाग ने ओडिशा भेजे जा रहे पनीर के बारे में क्या जानकारी दी?
खाद्य सुरक्षा विभाग ने 750 किलो पनीर की खेप को पकड़ा, जिसमें मिल्की मलाई और मलाई मैजिक ब्रांड के पनीर शामिल थे, जो खाने योग्य नहीं पाए गए। - खराब पनीर को नष्ट करने में देरी क्यों हुई?
पनीर के लैब रिपोर्ट आने के बाद भी खाद्य विभाग ने नष्ट करने की कार्रवाई में डेढ़ महीने की देरी की, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है। - खाद्य विभाग द्वारा भिलाई में की गई कार्रवाई के क्या परिणाम निकले?
खाद्य विभाग ने भिलाई में एक्सपाइरी दूध से बने पनीर की जांच की, जहां उन्होंने 2500 किलो मिठाई और 1000 लीटर दूध को नष्ट किया और कई प्रतिष्ठानों को बंद करा दिया।