रायपुर में 1100 पेड़ों की कटाई पर बवाल: जंगल बचाने पेड़ों से लिपटे ग्रामीण, पुलिस से झड़प, फिल्म सिटी के लिए दूसरी जगह चुनने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
- नवा रायपुर के माना-तूता क्षेत्र में फिल्म सिटी के लिए करीब 1100 पेड़ काटे जाने हैं।
- 27 अक्टूबर को कटाई की मशीनें पहुंचते ही ग्रामीण पेड़ों से लिपट गए।
- पुलिस ने 10 ग्रामीणों को हिरासत में लिया, जो करीब एक घंटे बाद छोड़ दिए गए।
- पर्यटन विभाग ने 11 हजार नए पौधे लगाने का दावा किया है।
- ग्रामीण और समिति फिल्म सिटी के लिए दूसरी जगह की मांग कर रहे हैं।
27 अक्टूबर को माना-तूता में क्या हुआ?
माना-तूता क्षेत्र में 27 अक्टूबर को तनाव की स्थिति बनी। प्रस्तावित फिल्म सिटी के लिए पेड़ काटने की मशीनें मौके पर पहुंची थीं। पास के गांवों के लोग जंगल में जुट गए। ग्रामीण पेड़ों से लिपट गए। मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की। इससे दोनों पक्षों में झूमाझटकी हुई। पुलिस ने 10 ग्रामीणों को हिरासत में लिया।
थाने में क्या हुआ?
हिरासत की खबर पर कांग्रेस के शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ता थाने पहुंचे और घेराव किया। करीब एक घंटे बाद सभी हिरासत में लिए गए ग्रामीण छोड़ दिए गए। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं।
ग्रामीण क्या कह रहे हैं?
ग्रामीणों के मुताबिक कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं। वे इस हरित क्षेत्र को रायपुर के पर्यावरण के लिए अहम मानते हैं। उनका कहना है कि उन्हें फिल्म सिटी से आपत्ति नहीं है।
विरोध इस बात का है कि पुराने पेड़ों की बलि क्यों दी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने नवा रायपुर में कोई दूसरी जगह चुनने की मांग की है, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ न काटने पड़ें।
संघर्ष समिति क्या कर रही है?
माना-तूता जंगल को बचाने के लिए स्थानीय निगरानी समिति सक्रिय है। समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक वे करीब नौ महीने से इलाके की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। समिति सदस्य कृणाल सिन्हा ने मुद्दे को जनआंदोलन बनाने की बात कही है।
स्मृति ईरानी को पत्र में क्या लिखा गया?
माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने 28 अक्टूबर को भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखा। इसमें पेड़ों की कटाई रोकने की मांग की गई। पत्र के मुताबिक रायपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर यह हरित क्षेत्र बंजर और पथरीली जमीन पर कई दशकों में बना है।
समिति ने कहा कि नवा रायपुर में दूसरी जगह बड़े भूखंड उपलब्ध हैं, इसलिए फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए। उसने प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का भी जिक्र किया।
11 हजार पौधे लगाने के दावे पर क्या सवाल?
पर्यटन विभाग के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे के मुताबिक करीब 1100 पेड़ काटे जाने हैं। उनकी भरपाई के लिए 11 हजार नए पौधे लगाने की योजना है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 1000 पौधे लग चुके हैं। विभाग के मुताबिक पौधे सूखने पर दोबारा पौधे लगाए जाएंगे।
समिति का दावा है कि मौके पर जांच में सिर्फ 530 पौधे मिले और कई सूखे थे। इसलिए 11 हजार पौधे लगाने का दावा सवालों में है। पर्यावरण से जुड़े लोगों का सवाल है कि नए पौधे दशकों पुराने पेड़ों की जगह तुरंत कैसे ले पाएंगे।
गांधी जयंती पर क्या हुआ था?
2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिसर में करीब एक हजार पौधे लगाए थे। अब उन पौधों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञ ने क्या चिंता जताई?
रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और पर्यावरण विशेषज्ञ शम्स परवेज ने चिंता जताई है। उनके अनुसार 1100 पेड़ कटने से रोज करीब 10 हजार लोगों की ऑक्सीजन जरूरत पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पुराने पेड़ तापमान नियंत्रित करने, कार्बन जमा करने, धूल रोकने, मिट्टी बचाने और पक्षियों को आश्रय देने में भी काम आते हैं।
चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना क्या है?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 24 जनवरी 2026 को फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन किया था। फिल्म सिटी के लिए 95.79 करोड़ और कन्वेंशन सेंटर के लिए 52.03 करोड़ रुपए स्वीकृत हैं। दोनों की कुल स्वीकृत राशि 147.82 करोड़ रुपए है।
योजना पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर है। निजी क्षेत्र से करीब 300 करोड़ रुपए निवेश की संभावना जताई गई है। फिल्म सिटी में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सड़क जैसे स्थायी शूटिंग सेट बनाने की भी योजना है। सरकार का मकसद फिल्म निर्माण, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया है।
अब आगे क्या?
फिलहाल विरोध जारी है। आंदोलनकारी परियोजना बंद करने की जगह जंगल से हटकर दूसरी जगह की मांग कर रहे हैं। पर्यटन विभाग ने बड़े पैमाने पर पौधरोपण का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन दूसरे स्थान पर विचार करता है या निर्माण वहीं आगे बढ़ता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह मामला विकास के साथ पेड़ों को बचाने का भी है। सरकार फिल्म सिटी बनाकर रोजगार, निवेश और पर्यटन बढ़ाना चाहती है। वहीं ग्रामीण और पर्यावरण कार्यकर्ता पुराने पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि रायपुर में पहले से ही पेड़ों की कमी है। ऐसे में 1100 पेड़ काटना ठीक नहीं है। सरकार का दावा है कि 11 हजार पौधे लगाए जाएंगे, जबकि समिति का कहना है कि मौके पर सिर्फ 530 पौधे मिले हैं। दोनों के दावों में कितना सच है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा। वहीं पेड़ों की कटाई रोकने पहुंचे ग्रामीणों और पुलिस के बीच झूमाझटकी और कुछ लोगों को हिरासत में लेने से मामला और गरमा गया है।
FAQ
सवाल: माना-तूता में कितने पेड़ काटे जाने हैं?
जवाब: करीब 1100 पेड़। यह चित्रोत्पला फिल्म सिटी परियोजना के लिए प्रस्तावित है। ग्रामीणों के मुताबिक कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं।
सवाल: पर्यटन विभाग ने क्या दावा किया है?
जवाब: विभाग के मुताबिक 1100 पेड़ों की भरपाई के लिए 11 हजार नए पौधे लगाए जाएंगे। अब तक करीब 1000 पौधे लग चुके हैं।
सवाल: ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
जवाब: वे फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में कोई दूसरी जगह चाहते हैं, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ न कटें। वे परियोजना का सीधा विरोध नहीं कर रहे।