पांच मांगों पर भड़के कर्मचारी, 55 संघों ने सरकार को चेताया, इंद्रावती भवन के सामने प्रदर्शनV
RAIPUR : पांच मांगों को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़क पर उतर आया है। शुक्रवार को इंद्रावती भवन के गेट के सामने प्रदेशभर से पहुंचे 55 कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने जमकर नारेबाजी की। एक मांग, एक मंच अभियान के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार को साफ संदेश दिया कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और बड़ा होगा।
इंद्रावती भवन गूंजा
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी लगातार नारे लगाते रहे। अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने, स्वास्थ्य विभाग से ठेका प्रथा खत्म करने, महंगाई भत्ता देने और कैशलेस इलाज जैसी मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में नियमित कर्मचारी, पेंशनर और नगरीय निकाय के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
पांच मांगों पर आर-पार
कर्मचारियों की पहली मांग मोदी की गारंटी के तहत अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की है। दूसरी मांग नगरीय निकाय के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की है। स्वास्थ्य विभाग में ठेका पद्धति पूरी तरह बंद करने की भी मांग उठी।
इलाज और DA पर नाराजगी
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए मध्य प्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मांग की गई है। इसके अलावा जनवरी 2026 की स्थिति में कर्मचारियों के साथ पेंशनरों को भी महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी करने की मांग है। कर्मचारियों ने DA के एरियर्स का भुगतान भी मांगा।
नारेबाजी में दिखा गुस्सा
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने ‘नियमित करो’, ‘ठेका प्रथा बंद करो’, ‘DA देना होगा’, ‘DA एरियर्स लेकर रहेंगे’ और ‘कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करो’ जैसे नारे लगाए। नगरीय निकाय में पुरानी पेंशन लागू करने की मांग को लेकर भी जमकर आवाज उठाई गई।
कई कर्मचारी नेताओं ने संभाला मोर्चा
सांकेतिक प्रदर्शन को डॉ. डीपी मनहर, करन सिंह अटेरिया, जयनारायण श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला, गोपाल साहू, अनिल पांडेय, महेंद्र सिंह राजपूत, सुजान बिंद, बीजापुर की अंजू गोरला, विकास सिंह राजपूत, संजय तिवारी, पीआर साहू, शरद दुबे, ओपी शर्मा, ऋषिकांत मोहरे सहित अन्य ने संबोधित किया। संचालन विद्याभूषण दुबे ने किया।
अब 30 अक्टूबर को घेराव
प्रदर्शन के बाद हुई बैठक में कर्मचारियों ने अगली रणनीति तय की। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अगर सरकार ने पांचों मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया तो 30 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।
यानी इंद्रावती भवन के बाहर उठी आवाज अब मंत्रालय तक पहुंचाने की तैयारी है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगों को लेकर सरकार का ध्यान खींचा जा रहा है, लेकिन अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
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