पहली बारिश में डूबा रायपुर : निगम की बैठक में तीखी बहस

Aishwarya Dwivedi | Jul 07, 2026, 09:38 IST
रायपुर-पहली बारिश-बाढ़-नागरिक बैठक-बहस
रायपुर में मानसून की पहली बारिश के बाद भीषण जलभराव हो गया। इस गंभीर समस्या पर नगर निगम की विशेष बैठक में नौ घंटे तक पक्ष-विपक्ष के बीच भारी हंगामा और तीखी बहस हुई।

समझें क्या है पूरा मामला

रायपुर में मानसून की पहली बारिश के बाद पूरा शहर पानी में डूब गया। इस गंभीर समस्या को लेकर सोमवार को नगर निगम की विशेष सामान्य सभा बुलाई गई। यह महत्वपूर्ण बैठक सुबह 11 बजे से लेकर रात 8 बजे तक चलती रही। पूरे नौ घंटे तक पक्ष और विपक्ष के नेता आपस में बहस करते रहे। किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस बदहाली की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं ली। नेताओं ने पूरी समस्या का ठीकरा सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों पर फोड़ दिया।



रायपुर में जलभराव पर भारी हंगामा

रायपुर में मानसून की पहली बारिश ने ही नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। शहर के कई इलाकों में पानी भरने से जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को निगम की विशेष सामान्य सभा बुलाई गई थी।



यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और रात 8 बजे तक चलती रही। पूरे नौ घंटे तक सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती रही। पार्षदों ने अपनी ही सरकार और अधिकारियों के खिलाफ जमकर गुस्सा निकाला। लेकिन इतनी लंबी चर्चा के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।



जिम्मेदारी लेने से बचते रहे जनप्रतिनिधि

बैठक में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कोई भी नेता जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने मिलकर सारा दोष अधिकारियों के सिर मढ़ दिया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारी बेहद लापरवाह हो चुके हैं।



वे फील्ड में जाकर काम का निरीक्षण बिल्कुल नहीं करते हैं। अधिकारी सिर्फ दफ्तरों में बैठकर फाइलों को आगे बढ़ाने में व्यस्त रहते हैं। इसी वजह से आपात स्थिति में जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो पाता है।



पार्षदों ने जताई अपनी नाराजगी

वार्डों में काम न होने से नाराज कई पार्षदों ने अपनी बात मजबूती से रखी। पार्षद प्रदीप वर्मा ने कहा कि नाली सफाई और अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार आवेदन दिए गए। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।



पार्षद शेख मुशीर ने मौदहापारा इलाके में सफाई कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के प्रस्तावों को जानबूझकर मंजूरी नहीं दी जा रही है। वहीं पार्षद अंजलि गोलछा ने कहा कि संकट के समय निगम कमिश्नर फोन तक नहीं उठाते हैं। पार्षद अर्जुमन ठेबर ने भी अधिकारियों के दफ्तर से बाहर न निकलने पर नाराजगी जताई।



विपक्ष ने जताई गहरी आपत्ति

बैठक के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष ने तीखा विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सफाई व्यवस्था के पूरी तरह ठप होने पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब शहर साफ ही नहीं है तो यूजर चार्ज क्यों बढ़ाया गया।



उन्होंने आरोप लगाया कि जलभराव रोकने के लिए सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई है। जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। इसे उन्होंने महापौर और एमआईसी (Mayor-in-Council) की सबसे बड़ी विफलता बताया। विरोध स्वरूप उन्होंने अधिकारियों द्वारा दिए गए लिखित जवाब की प्रति को सदन में ही फाड़ दिया।



महापौर ने पिछले प्रबंधन को कोसा

इन आरोपों के बीच महापौर मीनल चौबे ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि शहर पिछले 15 वर्षों के खराब प्रबंधन का खामियाजा भुगत रहा है। उन्होंने बताया कि शहर के बड़े नालों पर वर्षों से अवैध निर्माण और अतिक्रमण होते रहे हैं।



इसके अलावा अवैध नल कनेक्शनों के कारण वैध उपभोक्ताओं को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है। महापौर ने सदन में मांग की कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।



बैठक में लिए गए कुछ जरूरी फैसले

भारी हंगामे और लंबी बहस के बाद सदन में कुछ अहम फैसले लिए गए। भविष्य में जलभराव को रोकने के लिए शहर के सभी नालों का सीमांकन कराया जाएगा। निगम कमिश्नर खुद इस काम की निगरानी करेंगे।



इसके साथ ही जोन आयुक्तों और स्थानीय पार्षदों की मदद से नालों पर हुए अवैध कब्जों को हटाया जाएगा। सफाई व्यवस्था, पानी की सप्लाई और अवैध प्लॉटिंग के मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक के अंत में पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी गई।



FAQ

  1. रायपुर नगर निगम की यह विशेष बैठक क्यों बुलाई गई थी?
    Ans: मानसून की पहली ही बारिश में रायपुर के कई इलाकों में भारी जलभराव (पानी भरने) की समस्या खड़ी हो गई थी। निगम के दावों की पोल खुलने और जनता को हुई परेशानी को लेकर चर्चा करने के लिए यह विशेष सामान्य सभा बुलाई गई थी।
  2. रायपुर जलभराव की इस बदहाली के लिए जनप्रतिनिधियों ने किसे जिम्मेदार ठहराया?
    Ans: पक्ष और विपक्ष के किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस लापरवाही की जिम्मेदारी खुद पर नहीं ली। सभी नेताओं ने एक सुर में इसका पूरा ठीकरा प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और उनके फील्ड में न जाने पर फोड़ दिया।
  3. रायपुर महापौर ने शहर की इस स्थिति का क्या कारण बताया?
    Ans: महापौर मीनल चौबे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि शहर पिछले 15 वर्षों के खराब प्रबंधन का खामियाजा भुगत रहा है। उन्होंने मुख्य रूप से बड़े नालों पर हुए अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध नल कनेक्शनों को इस समस्या की वजह बताया।

यह खबरें भी पढ़ें...

सावधान! MP, CG और राजस्थान में अगले 48 घंटे भारी, मानसून का दिखेगा रौद्र रूप



मिथुन राशि में वक्री होंगे बुध ग्रह, जुलाई में बदलेगी सभी 12 राशियों की किस्मत



इस दिन से शुरू होगा चातुर्मास 2026, चार महीनों तक नहीं होंगे मांगलिक काम



MP-CG से राजस्थान तक आफत बना मानसून: 3 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट



Tags:
  • रायपुर
  • मानसून
  • अतिक्रमण
  • श्रद्धांजलि
  • नगर निगम
  • सफाई व्यवस्था