16 करोड़ खर्च फिर भी सड़क बदहाल, चार महीने में उखड़ी कुम्हारी ब्रिज की सड़क, गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा
16 करोड़ खर्च करने के बाद भी सड़क नहीं टिकी
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को दुर्ग और भिलाई से जोड़ने वाला कुम्हारी-खारुन पुल एक बार फिर चर्चा में है। करीब 35 साल पुराने इस पुल की मरम्मत पर 16 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। मरम्मत के दौरान 10 दिन तक पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद रखी गई थी।
काम पूरा होने के बाद उम्मीद थी कि लोगों को खराब सड़क से राहत मिलेगी। कुछ ही महीनों में सड़क की हालत दोबारा बिगड़ गई। अब पुल पर जगह-जगह गड्ढे नजर आ रहे हैं। इससे मरम्मत के काम और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
सितंबर की बारिश में खुल गई सड़क की पोल
जानकारी के मुताबिक 25 और 26 सितंबर को हुई बारिश के बाद पुल की सड़क उखड़ने लगी। कई जगह डामर की ऊपरी परत निकल गई। सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर गया। इससे वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई समझने में परेशानी होने लगी।
बारिश के बाद सड़क की हालत लगातार खराब होती गई। गड्ढों की वजह से वाहनों की रफ्तार भी कम हो गई। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है।
गड्ढों में बजरी डाली, वह भी निकल गई
सड़क खराब होने के बाद ठेकेदार ने गड्ढों को भरने की कोशिश की। इसके लिए गड्ढों में बजरी डाल दी गई। हालांकि यह उपाय ज्यादा समय तक नहीं चला।
पुल से लगातार भारी वाहन गुजरते हैं। इनके दबाव से गड्ढों में भरी बजरी बाहर निकल गई। इससे सड़क फिर पहले जैसी हो गई। अब कई जगह गड्ढे और गहरे हो गए हैं। लोगों का कहना है कि केवल बजरी डालकर सड़क को ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए मजबूत और टिकाऊ मरम्मत जरूरी है।
सड़क से बाहर निकले सरिये, वाहन चालकों को खतरा
पुल पर सिर्फ गड्ढे ही परेशानी नहीं बने हैं। कई हिस्सों में लोहे के सरिये भी बाहर निकल आए हैं। इससे वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खासकर बाइक और स्कूटी चलाने वालों के लिए यह स्थिति खतरनाक है। सरिये से टायर खराब होने या फटने का खतरा बना रहता है। वहीं अचानक गड्ढा सामने आने पर वाहन चालक ब्रेक लगाते हैं। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन से टक्कर हो सकती है।
रोज करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं
कुम्हारी-खारुन पुल रायपुर और दुर्ग-भिलाई के बीच आने-जाने का प्रमुख रास्ता है। इस पुल से हर दिन करीब डेढ़ लाख छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं।
इनमें बाइक, कार, बस और मालवाहक वाहन शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क खराब होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालकों को रफ्तार कम करनी पड़ रही है। कई बार अचानक वाहन मोड़ने की नौबत भी आ जाती है।
अप्रैल में 10 दिन बंद रखकर हुई थी मरम्मत
खारुन नदी पर बने इस पुल को 35 साल से ज्यादा समय हो चुका है। पुराने होने के कारण इसके बेयरिंग और स्लैब में खराबी की शिकायतें सामने आई थीं। भारी वाहन गुजरने पर पुल में कंपन होने की समस्या भी थी।
इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए मरम्मत का काम कराया गया। इसके तहत 5 से 15 अप्रैल तक पुल पर यातायात बंद रखा गया था। काम पूरा होने के बाद वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में सड़क खराब होने से काम की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
टोल पूरा वसूल रहे, सड़क की जिम्मेदारी किसकी?
कुम्हारी टोल प्लाजा पर वाहन चालकों से पहले की तरह टोल टैक्स लिया जा रहा है। दूसरी तरफ पुल की खराब सड़क से लोगों को परेशानी हो रही है।
इसको लेकर वाहन चालक सवाल उठा रहे हैं कि जब टोल लिया जा रहा है तो सुरक्षित सड़क क्यों नहीं मिल रही।
टोल कर्मचारियों के मुताबिक उनका काम केवल टोल वसूली करना है। पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी दूसरे ठेकेदार की है।
कांग्रेस ने उठाई मरम्मत की जांच की मांग
पुल की बदहाल स्थिति को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेमन ने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च होने के कुछ ही महीनों में सड़क खराब होना गंभीर मामला है।
उन्होंने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 16 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी पुल की सड़क इतनी जल्दी क्यों खराब हो गई और लोगों को सुरक्षित सफर कब मिलेगा।