करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे का दावा, ई-नीलामी पर हाईकोर्ट में जंग
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की करोड़ों की जमीन पर एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के कब्जे और उसे ई नीलामी के जरिए बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है। मामला राजधानी रायपुर के ग्राम डुंडेरा स्थित 3270 वर्गमीटर जमीन से जुड़ा है। मंडल का दावा है कि यह जमीन उसे आवासीय योजना के लिए आवंटित की गई थी और लंबे समय से उसके आधिपत्य में है। इसके बावजूद जमीन को ई-नीलामी के जरिए बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। विवाद बढ़ा तो मंडल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
खसरा नंबर 83/20 की जमीन पर विवाद
पूरा विवाद रायपुर के ग्राम डुंडेरा स्थित खसरा नंबर 83/20 की जमीन को लेकर है। इस जमीन का कुल रकबा 3270 वर्गमीटर है। गृह निर्माण मंडल के अनुसार, यह जमीन उसे आवासीय योजना के लिए आवंटित की गई थी। मंडल का कहना है कि जमीन उसके आधिपत्य और कब्जे में है।मंडल के दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि जमीन को लेकर उसका अधिकार पहले से तय है। इसके बावजूद इस जमीन को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यही वजह है कि अब मामला विवाद में बदल गया है।
इंफ्रा कंपनी के जरिए नीलामी की कोशिश
गृह निर्माण मंडल की ओर से कहा गया है कि उक्त जमीन को एक्सेस इंफ्राकॉर प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से ई नीलामी के जरिए बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई। मंडल का दावा है कि यह कार्रवाई उसकी जानकारी या सहमति के बिना की जा रही है।
मंडल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
मंडल के मुताबिक, जमीन से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में इस जमीन को ई-नीलामी के जरिए बेचने की कोशिश पर उसने आपत्ति जताई है। मंडल का कहना है कि जब जमीन के अधिकार को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है, तब इसकी बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं है। मामले में अब गृह निर्माण मंडल ने संभावित खरीदारों को भी सीधे चेतावनी दी है। मंडल ने कहा है कि 3270 वर्गमीटर की उक्त जमीन की ई नीलामी की कार्रवाई में कोई भी व्यक्ति या संस्था हिस्सा न ले।मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस चेतावनी के बाद भी कोई व्यक्ति या संस्था जमीन खरीदता है, तो भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई और उसके परिणामों के लिए वह खुद जिम्मेदार होगा।
आमने-सामने दोनों पक्ष
इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। गृह निर्माण मंडल का कहना है कि जमीन उसे आवासीय योजना के लिए आवंटित हुई थी और वह उसके कब्जे में है। दूसरी ओर, इसी जमीन को ई नीलामी के जरिए बेचने की प्रक्रिया सामने आई है।हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण अब इस विवाद का अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया से होने की उम्मीद है। फिलहाल गृह निर्माण मंडल की चेतावनी के बाद संभावित खरीदारों के लिए भी स्थिति साफ है कि वे विवादित जमीन की ई नीलामी से दूरी बनाए रखें।3270 वर्गमीटर जमीन, ई नीलामी की कोशिश और हाईकोर्ट में लंबित मामला। इन तीनों प्वाइंट ने इस पूरे विवाद को गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस जमीन पर वैध अधिकार किसका है और उसे बेचने की कोशिश किस अधिकार के तहत की जा रही है।
FAQ
- रायपुर डुंडेरा जमीन विवाद किससे जुड़ा है?
यह विवाद रायपुर के ग्राम डुंडेरा स्थित 3270 वर्गमीटर जमीन को लेकर है। गृह निर्माण मंडल ने इस जमीन पर अपना अधिकार बताया है। - जमीन की ई-नीलामी का विरोध क्यों किया गया है?
गृह निर्माण मंडल का दावा है कि जमीन उसके आधिपत्य में है। इसके बावजूद ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई, इसलिए उसने हाईकोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई है। - इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की गई?
मंडल ने कहा है कि जब जमीन के अधिकार को लेकर मामला न्यायालय में लंबित है, तो उसकी बिक्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। इसी मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
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