रंगाई-पुताई और मरम्मत के नाम पर लगाया 14 लाख का चूना, 2 अफसर निलंबित
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार में नवाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मरम्मत और रंगाई-पुताई के नाम पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने विभाग को 14 लाख 28 हजार रुपए का चूना लगा दिया। जांच में आरोपों की पुष्टि पाए जाने पर दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
अफसरों पर हैं ये आरोपआरोप है कि लोक निर्माण विभाग उपसंभाग सरायपाली की तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी शिखा पटेल ने 1 लाख 51 हजार रुपए तो तत्कालीन प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी अरविंद किशोर देवांगन की ओर से 12 लाख 77 हजार रुपए का माप दर्ज किया गया था । इस तरह से इन दोनों अफसरों ने कुल 14 लाख 28 लाख रुपए का माप दर्ज किया था। |
माप के अनुसार नहीं हुआ काम
काम की गुणवत्ता पर उठे सवालजांच में पाया गया कि सरायपाली के सरकारी हाईस्कूल भवन और शासकीय हाई स्कूल भवन (मंदिर) में प्लास्टर, मरम्मत एवं पुट्टी, ब्लॉक कालोनी के एच टाईप क्वॉर्टर में पुताई के अलावा एसडीओ एग्रीकल्चर क्वार्टर भवन में काम का अभाव देखने को मिला। इसके अलावा तहसील कार्यालय सरायपाली में पूर्व निर्धारित काम नहीं हुआ था। साथ ही कन्या हाई स्कूल सरायपाली में पोस्ट वॉटर प्रूफिंग का काम नहीं हुआ। इसके साथ ही पांच एच टाइप क्वॉर्टर में भी काम की कमी थी। |
दो अधिकारी निलंबित
FAQ
- 1. यह मामला किस विभाग से जुड़ा है और क्या आरोप हैं?
यह मामला छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ा है। आरोप है कि मरम्मत और रंगाई-पुताई के नाम पर 1 लाख 51 हजार और 12 लाख 77 हजार रुपए के माप दर्ज कर कुल 14 लाख 28 हजार रुपए का गबन किया गया, जबकि वास्तविक रूप से काम नहीं हुआ। - 2. किन अधिकारियों पर आरोप लगा है और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
शिखा पटेल (तत्कालीन उपसंभागीय अधिकारी) और अरविंद किशोर देवांगन (तत्कालीन प्रभारी उपसंभागीय अधिकारी) पर आरोप है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद, उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया गया है। - 3. जांच में किन कार्यों में अनियमितता पाई गई?
जांच में पाया गया कि निम्न स्थानों पर कार्य या तो अधूरे थे या बिल्कुल नहीं हुए । सरकारी हाई स्कूल भवन, सरायपाली ब्लॉक कॉलोनी के एच टाइप क्वॉर्टर एसडीओ एग्रीकल्चर क्वार्टर तहसील कार्यालय, सरायपाली कन्या हाई स्कूल, सरायपाली (पोस्ट वॉटर प्रूफिंग का काम नहीं हुआ) - यह मामला सामने कैसे आया और जांच किसने की?
काम नहीं होने की शिकायत मिलने पर, लोक निर्माण विभाग रायपुर के मुख्य अभियंता ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी। जांच में फर्जी माप और घटिया गुणवत्ता के आरोप सिद्ध हुए, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
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