आयकर विभाग की छापेमारी : बैंकों से नए नोटों की ब्लैक सप्लाई, जांच में जुटी एजेंसियां
NEWS IN SHORT
- हंस ट्रैवल्स के गोदाम से नए नोटों की खेप जब्त।
- बंगाल और ओडिशा के बैंकों से अवैध करेंसी की सप्लाई।
- छोटे नोटों की आड़ में नकली करेंसी खपाने की आशंका।
- हवाला नेटवर्क और व्यापारियों के जुड़े होने का बड़ा खुलासा।
- आयकर विभाग और डीआरआई मामले की जांच में जुटे।
NEWS IN DETAIL
राजधानी रायपुर के अशोका मिलेनियम प्लाजा स्थित हंस ट्रैवल्स के गोदाम से बीती 6 मई को 10 और 20 रुपए के नए नोटों की एक बड़ी खेप बरामद हुई है। इस मामले के सामने आने के बाद एक ऐसे नए और चौंकाने वाले 'क्राइम सिंडिकेट' का पर्दाफाश हुआ है, जो पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बैंकों से अवैध तरीके से नए नोटों की सप्लाई कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस के साथ-साथ आयकर विभाग और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने भी अपनी जांच तेज कर दी है।
कैसे काम करता है यह ब्लैक रूट नेटवर्क?
जांच में सामने आया है कि बड़े शहरों में शादियों, शगुन और धार्मिक कार्यक्रमों में छोटे व नए नोटों की भारी मांग रहती है। इसी का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट सक्रिय है।
पहला चरण: कारोबारी पहले पुराने नोटों को बोरियों में भरकर बंगाल और ओडिशा के दलालों के पास भेजते हैं।
दूसरा चरण: दलाल बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से इन पुराने नोटों को नए नोटों से बदलवाते हैं। इसके बदले बैंक कर्मियों को मोटा कमीशन कैश में दिया जाता है।
तीसरा चरण: इन नए नोटों को पार्सल और ट्रांसपोर्टर के जरिए दूसरे शहरों में भेजा जाता है। इस पूरे लेन-देन का सरकारी रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं होता।
हालिया मामले में दिल्ली के कमल किशोर गुप्ता ने 20 लाख रुपए के पुराने नोट भेजे थे, जिसके बदले बंगाल के उदय सिंह बिस्वाल ने पार्सल के जरिए 16 लाख रुपए के नए नोट भेजे थे।
नकली नोट खपाने की आशंका और RBI नियमों का उल्लंघन
पुलिस ने जब्त किए गए 10-20 रुपए के नोटों को जांच के लिए भेजा है। आशंका जताई जा रही है कि इस सिंडिकेट की आड़ में बाजार में नकली नोट खपाए जा रहे हैं। आमतौर पर लोग बड़े नोटों की जांच करते हैं, लेकिन 10-20 रुपए के नोटों को बिना जांचे स्वीकार कर लेते हैं, जिसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की 'क्लीन नोट पॉलिसी' और करेंसी चेस्ट प्रबंधन के नियमों का खुला उल्लंघन है। बैंक अधिकारी आम जनता को नोटों की कमी का बहाना बनाकर मना कर देते हैं, जबकि दलालों को मोटी गड्डियां कमीशन लेकर बेच रहे हैं।
रायपुर का मजबूत हवाला नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन
इस मामले के तार रायपुर के बेहद मजबूत हवाला सिस्टम से भी जुड़े हैं। रायपुर में रामसागरपारा, भैंसथान, स्टेशन रोड, पंडरी कपड़ा मार्केट, सदर बाजार और गोलबाजार इसके प्रमुख केंद्र हैं। यहां 'कोड सिस्टम' (जैसे नोट का आधा टुकड़ा दिखाना) के जरिए रोजाना करोड़ों का लेन-देन हो रहा है। सराफा, कपड़ा, सरिया, गुटखा और अनाज कारोबार से जुड़े कई बड़े व्यापारी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं और इसमें 1 से 10 फीसदी तक कमीशन का खेल चल रहा है।
आधिकारिक बयान: "नोटों को जब्त कर मामले की आगे की जांच के लिए आयकर विभाग को पत्र लिखा गया है। वहीं से पूरी जांच की जा रही है। पुलिस को अभी अंतिम जांच रिपोर्ट मिलना बाकी है।"— राहुल देव शर्मा, एडिशनल डीसीपी
निष्कर्ष
बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा नए नोटों का यह अवैध कारोबार अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। छोटे नोटों की आड़ में नकली करेंसी खपाने और टैक्स चोरी का यह खेल बेहद खतरनाक है। पुलिस,आयकर विभाग और डीआरआई की संयुक्त जांच से ही इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।
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