छह महीने बाद बदलेगा कमिश्नर सिस्टम, एयरपोर्ट, विधानसभा हो सकते हैं शामिल
राजधानी रायपुर की पुलिस व्यवस्था में एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की सीमाओं के विस्तार को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार माना एयरपोर्ट, विधानसभा, राखी और धरसींवा थानों को पुलिस कमिश्नरेट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा अभनपुर और मंदिरहसौद सहित कुछ अन्य क्षेत्रों को भी कमिश्नरी में जोड़ने पर मंथन जारी है।
कमिश्नरी विस्तार की तैयारी:
23 जनवरी 2026 से रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई थी। उस समय पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। परिणामस्वरूप 22 थानों को कमिश्नरेट के दायरे में रखा गया, जबकि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए 11 थानों को अलग कर रायपुर ग्रामीण पुलिस जोन का गठन किया गया।
अब करीब छह महीने के अनुभव के बाद फिर से व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण कमिश्नरेट और ग्रामीण जोन दोनों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
वर्तमान में एक कंट्रोल रूम, एक पुलिस लाइन, एक पुलिस कार्यालय और एक फोरेंसिक शाखा के जरिए दोनों इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। इससे प्रशासनिक और पुलिसिंग से जुड़े कार्यों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
कमिश्नरी का दायरा बढ़ेगा:
इसी वजह से ग्रामीण जोन को दोबारा कमिश्नरेट में विलय करने या फिर माना, विधानसभा, अभनपुर, मंदिरहसौद, राखी और धरसींवा जैसे थानों अथवा इनके कुछ हिस्सों को कमिश्नरेट में शामिल करने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
प्रदेश के अन्य जिलों जैसे कोरिया, पेंड्रा, खैरागढ़ और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में तीन से पांच थानों के आधार पर प्रशासनिक ढांचा तैयार किए जाने के अनुभवों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
अब हो रही समीक्षा:
पहले पुलिस मुख्यालय की उच्चस्तरीय समिति ने पूरे रायपुर जिले को कमिश्नरेट बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को पूरी तरह मंजूरी नहीं मिली और 22 थानों को कमिश्नरेट तथा 11 थानों को ग्रामीण जोन में रखा गया।
इसके चलते नया रायपुर एयरपोर्ट और मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी कमिश्नरेट के दायरे से बाहर रह गए, जबकि सुरक्षा की दृष्टि से इन्हें कमिश्नरेट में शामिल करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
दूसरी ओर, रायपुर नगर निगम के कई शहरी वार्ड और प्रमुख शहरी पुलिस चौकियां ग्रामीण जोन में होने के कारण पुलिसिंग का विभाजन भी व्यवहारिक कठिनाइयां पैदा कर रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से समन्वय प्रभावित होता है और कई मामलों में त्वरित कार्रवाई तथा जवाबदेही पर असर पड़ता है।
50 करोड़ का खर्चा:
कहा जा रहा है कि यदि ग्रामीण जोन का विलय या कमिश्नरेट का विस्तार किया जाता है तो भवन, कार्यालय, पुलिस लाइन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए 50 करोड़ रूपए से अधिक की अतिरिक्त आवश्यकता पड़ सकती है।
वहीं, पुलिस बल की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, स्वीकृत बल की तुलना में वर्तमान में लगभग 45 प्रतिशत स्टाफ के सहारे ही रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण जोन का संचालन किया जा रहा है।
आठ वर्ष पहले जिस जनसंख्या और संसाधनों को ध्यान में रखकर बल स्वीकृत किया गया था, अब उसी ढांचे पर कहीं अधिक आबादी और जिम्मेदारियों का बोझ है। इसके बावजूद पुलिसिंग की गुणवत्ता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
निष्कर्ष:
पिछले छह महीनों के अनुभव और पुलिस मुख्यालय की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक स्तर पर फिर से कवायद तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में रायपुर की पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संसाधन-संतुलित बनाने के उद्देश्य से कमिश्नरेट के विस्तार या पुनर्गठन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल पुलिस मुख्यालय इस पूरे प्रस्ताव पर विभिन्न पहलुओं का परीक्षण कर रहा है।
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