रायपुर पुलिस की स्कॉर्पियो बनी चलता-फिरता बार, वीडियो हुआ वायरल
NEWS IN SHORT
- रायपुर में पुलिस स्कॉर्पियो का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
- पुलिसकर्मी की मौजूदगी में चालक ने चलती गाड़ी में पी शराब।
- यह विवादित गाड़ी रायपुर पुलिस लाइन से अटैच बताई गई।
- साय सरकार ने नशाखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई।
- नियमों के उल्लंघन पर पुलिस कप्तानों पर होगी कड़ी कार्रवाई।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार एक तरफ जहां सूबे में अपराध और नशाखोरी के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है, वहीं राजधानी रायपुर से कानून व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर पुलिस लाइन से अटैच एक स्कॉर्पियो वाहन (संख्या: CG 04 PV 6106) का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ड्यूटी के दौरान चलती गाड़ी में वाहन का चालक खुलेआम शराब पीता और बोतल रखता हुआ दिखाई दे रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान गाड़ी में एक पुलिसकर्मी भी मौजूद था, जो मूकदर्शक बना रहा।
यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और 'ड्रिंक एंड ड्राइव' (Drink and Drive) को लेकर सरकार बेहद सख्त है। राज्य के सभी पुलिस थानों और यातायात इकाइयों को इस संबंध में कड़ी कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
नशाखोरी पर साय सरकार की सख्त नीति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ पुलिस लगातार नशाखोरी के खिलाफ अभियान चला रही है। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ रायपुर समेत पूरे प्रदेश में विशेष चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत अब तक सैकड़ों वाहनों पर चालानी कार्रवाई की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी भी क्षेत्र में अवैध शराब या नशाखोरी पर लगाम नहीं लगी, तो इसका सीधा जिम्मेदार संबंधित जिले के पुलिस कप्तान (SP) और थाना प्रभारियों को माना जाएगा और उन पर कड़ी विभागीय कार्रवाई होगी।
लकिन सब सवाल यह उठता है की जब आम जनता पर 'ड्रिंक एंड ड्राइव' के लिए भारी-भरकम जुर्माना और जेल की कार्रवाई हो रही है, तब खाकी के साए में कानून की धज्जियां उड़ाने वाले इस चालक और लापरवाह पुलिसकर्मी पर प्रशासन क्या एक्शन लेता है? इस वायरल वीडियो ने पुलिस महकमे की छवि पर गंभीर दाग लगा दिया है।
निष्कर्ष
इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'जीरो टॉलरेंस' के दावों के बीच कानून के रखवालों की मौजूदगी में ऐसी लापरवाही सरकारी निर्देशों का मखौल उड़ाती है। निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई से ही जनता में कानून के प्रति विश्वास बहाल हो सकेगा।
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