रायपुर में किताबों की कमी से नया शिक्षा सत्र होगा प्रभावित, छात्र परेशान

Aishwarya Dwivedi | Jun 04, 2026, 16:05 IST
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रायपुर जिले के स्कूलों में वितरण कार्य अधूरा रहने के कारण 15 जून से नया शिक्षा सत्र बिना किताबों के शुरू हो सकता है, जिससे करीब 3 लाख 50 हजार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

NEWS IN SHORT

  • रायपुर में बिना किताबों के शुरू हो सकता है नया सत्र।
  • किताबें न मिलने से 3 लाख 50 हजार रुपए छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
  • स्कूल खुलने में बचे चंद दिन, 50 फीसदी काम अधूरा।
  • रायपुर और अभनपुर विकासखंडों में वितरण कार्य अब तक ठप।
  • प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के बच्चों को किताबों का इंतजार।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब महज कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। रायपुर जिले के सरकारी स्कूलों में किताबों की भारी कमी एक बार फिर बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। स्थिति यह है कि आगामी 15 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन अब तक आधे बच्चों के पास भी किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम के सुस्त रवैये का सीधा असर जिले के लाखों छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने वाला है।



3 लाख 50 हजार रुपए विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

रायपुर जिले के चार प्रमुख विकासखंडों—रायपुर, धरसींवा, आरंग और अभनपुर में कक्षा पहली से लेकर नौवीं तक के लगभग 3 लाख 50 हजार रुपए विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जाना है। परंपरा के अनुसार, सत्र की शुरुआत के पहले दिन ही बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान जमीनी हकीकत को देखते हुए स्कूल खुलने से पहले सभी विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस संकट को टालने के लिए कई स्कूलों में फिलहाल किताबों की जगह केवल अभ्यास पुस्तिकाएं (वर्कबुक) बांटी जा रही हैं।



केवल 12 दिन शेष, 50 फीसदी काम भी अधूरा

पाठ्यपुस्तक निगम ने दावा किया था कि 15 जून तक सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत किताबें पहुंचा दी जाएंगी। लेकिन अब जब गिनती के 12 दिन बचे हैं, तब भी रायपुर जिले में 50 फीसदी वितरण कार्य पूरा नहीं हो सका है।



विकासखंडवार स्थिति पर नजर डालें तो:

  • धरसींवा : यहां पुस्तकों का वितरण कार्य पूरा हो चुका है।
  • आरंग : इस ब्लॉक में वितरण का काम अपने अंतिम चरण में है।
  • रायपुर और अभनपुर : इन दोनों बड़े विकासखंडों में प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के लिए वितरण की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हो सकी है।

चिंता की बात यह है कि जो भी थोड़ी-बहुत किताबें बांटी जा रही हैं, वे केवल हाई स्कूलों तक पहुंची हैं। प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के बच्चे अभी भी पूरी तरह खाली हाथ हैं।



हर साल दावों की हवा, पढ़ाई प्रभावित होना तय

यह कोई पहला मौका नहीं है जब शिक्षा विभाग का यह ढर्रा सामने आया है। हर साल सत्र शुरू होने से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी, लेकिन धरातल पर योजनाएं दम तोड़ देती हैं। पिछले सत्र में भी ऐसी ही लापरवाही देखने को मिली थी, जहां निजी स्कूल संचालकों ने समय पर निगम के डिपो से किताबें ही नहीं उठाई थीं। यदि आने वाले दो-चार दिनों में युद्ध स्तर पर वितरण प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो रायपुर के लाखों नौनिहालों को इस साल भी बिना किताबों के ही अपने नए सत्र की शुरुआत करनी पड़ेगी।



निष्कर्ष

रायपुर में समय पर किताबों का न मिलना शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली को दर्शाता है। हर साल दावों के बावजूद सत्र की शुरुआत में बच्चों को किताबें न मिलना उनकी पढ़ाई को पीछे धकेलता है। प्रशासन को इस गंभीर लापरवाही को सुधारकर जल्द से जल्द वितरण प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें बांटने का जिम्मा किस संस्था का है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम (CGTBC - Chhattisgarh Text Book Corporation)।
  2. रायपुर जिले में नए शैक्षणिक सत्र 2026 में कितने बच्चों को मुफ्त किताबें बांटने का लक्ष्य रखा गया है?
    उत्तर: जिले के चार विकासखंडों के कक्षा 1 से 9वीं तक के लगभग 3.50 लाख (साढ़े तीन लाख) विद्यार्थियों को।
  3. रायपुर जिले में कुल कितने विकासखंड (ब्लॉक्स) हैं, और उनके नाम क्या हैं?
    उत्तर: रायपुर जिले में कुल 4 विकासखंड हैं: रायपुर धरसींवा आरंग अभनपुर
  4. छत्तीसगढ़ का पहला सरकारी स्कूल कौन सा है और इसकी स्थापना कब हुई थी?
    उत्तर: रायपुर का लॉरी स्कूल (अब सप्रे शाला या शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) छत्तीसगढ़ का पहला स्कूल माना जाता है। इसकी स्थापना ब्रिटिश काल में 1864 में हुई थी। महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित माधवराव सप्रे के नाम पर बाद में इसका नामकरण किया गया।
  5. छत्तीसगढ़ का सबसे साक्षर जिला कौन सा है?
    उत्तर: 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ का सबसे साक्षर जिला दुर्ग है (साक्षरता दर लगभग 79.06%)। वहीं राजधानी रायपुर भी राज्य के शीर्ष साक्षर जिलों में शामिल है।

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